स्मार्ट पुलिसिंग में एआई बनेगा ‘फोर्स मल्टीप्लायर’, अपराध रोकथाम में मिलेगी नई गति

Date:

 जयपुर 
29वें राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस सम्मेलन के दूसरे दिन गुरुवार को राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर में 'एआई फॉर स्मार्ट पुलिसिंग एंड पब्लिक सेफ्टी' विषय पर प्लेनरी सत्र आयोजित किया गया। सत्र की अध्यक्षता ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च एंड डेवलपमेंट (बीपीआरएंडडी) के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक गोपेश अग्रवाल ने की। उन्होंने कहा कि कृत्रिम एआई के उपयोग से पुलिसिंग अब प्रतिक्रियात्मक (रिएक्टिव) से निवारक (प्रिवेंटिव) स्वरूप की ओर बढ़ रही है। इससे अपराधों में कमी आई है तथा आपातकालीन प्रतिक्रिया समय भी घटा है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में देश के सभी राज्यों की पुलिस एआई का उपयोग कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि एआई को मानव संसाधन के विकल्प के रूप में नहीं, बल्कि पुलिसिंग में 'फोर्स मल्टीप्लायर' के रूप में देखा जाना चाहिए।

स्वदेशी और जिम्मेदार एआई इस्तेमाल से सुरक्षित होगी पुलिसिंग
सत्र के पैनलिस्ट डॉ. अमनदीप कपूर, निदेशक, ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च एंड डेवलपमेंट, जयपुर ने कहा कि एआई के किसी भी संभावित दुरुपयोग को रोकने के लिए मजबूत सुरक्षा तंत्र विकसित करना आवश्यक है। उन्होंने एआई, ब्लॉकचेन, डेटा कंप्यूटिंग, सीसीटीएनएस 2.0, ई-साक्ष्य, एजेंटिक एआई, एज-आधारित एलएलएम, म्यूल हंटिंग ऐप तथा डार्क वेब जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा करते हुए बताया कि ये तकनीकें आधुनिक पुलिसिंग को अधिक प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने कहा कि सुरक्षित एवं व्यापक स्तर पर एआई के उपयोग के लिए संप्रभु, जिम्मेदार और स्वदेशी एआई का विकास आवश्यक है। उन्होंने बताया कि बीपीआरएंडडी इस दिशा में प्रशिक्षण प्रदान करने तथा आवश्यक प्रणालियां विकसित करने का कार्य कर रहा है।

संतुलित और सुरक्षित एआई अपनाने पर विशेषज्ञों ने दिया जोर
पैनलिस्ट कोम्मी किशोर, पुलिस अधीक्षक, एलुरु (आंध्र प्रदेश) ने कहा कि वर्तमान समय में सभी पुलिस बलों का एआई से परिचित होना आवश्यक है। उन्होंने पुलिस द्वारा उपयोग में लाई जा रही विभिन्न जांच संबंधी एप्लीकेशंस का उल्लेख करते हुए भाषा अनुवाद की उपयोगिता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि एआई के उपयोग से दोषसिद्धि (कन्विक्शन) की दर में सकारात्मक सुधार देखने को मिला है। उन्होंने कहा कि पुलिसिंग में एआई के बढ़ते उपयोग के बीच बहुत तेजी और बहुत धीमी गति से आगे बढ़ने के बजाय संतुलित एवं चरणबद्ध तरीके से इसे अपनाना आवश्यक है। बिना उचित नियमन के नवाचार जोखिमपूर्ण हो सकता है तथा पुलिस जांच में 'एल्गोरिद्मिक बायस' से बचना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि एआई का उद्देश्य पुलिसिंग को प्रोएक्टिव बनाना होना चाहिए, केवल प्रिडिक्टिव नहीं।

डेटा फ्यूजन सेंटर से मजबूत होगी जांच व्यवस्था
पैनलिस्ट सलमान ताज, निदेशक, सीडीटीआई, हैदराबाद ने कहा कि पुलिसिंग से संबंधित अधिकांश डेटा विभिन्न प्लेटफॉर्म पर बिखरा हुआ है, जिसे एकीकृत कर डेटा फ्यूजन सेंटर के माध्यम से एक स्थान पर उपलब्ध कराया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि वीडियो एनालिटिक्स में एआई का उपयोग पुलिस जांच को अधिक सटीक और प्रभावी बना सकता है। उन्होंने एआई डेटा की संप्रभुता को सुरक्षित एवं विश्वसनीय उपयोग के लिए अनिवार्य बताया।

सत्र के समापन पर विशेषज्ञों एवं प्रतिभागियों के बीच विभिन्न विषयों पर संवाद हुआ। अंत में राजस्थान पुलिस के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (कानून एवं व्यवस्था) श्री विजय कुमार सिंह ने सभी पैनलिस्टों को स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मानित किया। सत्र में एआई आधारित स्मार्ट पुलिसिंग, सुरक्षित डिजिटल अवसंरचना तथा आधुनिक जांच प्रणाली को सुदृढ़ बनाने के लिए प्रौद्योगिकी के जिम्मेदार एवं संतुलित उपयोग पर विशेष बल दिया गया।

 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

spot_imgspot_img

Popular

More like this
Related

‘शॉर्टकट से कमाई की तो बेऊर जेल भेजेंगे’, CM सम्राट चौधरी का अपराधियों को खुला संदेश

पटना. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त संदेश...

मंत्री सारंग से की सौजन्य भेंट, मंत्री ने अनिमेष दी शुभकामनाएं

भोपाल विश्वास सारंग क्रिकेट अकादमी के उभरते तेज गेदबाज  अनिमेष...

क्या कांग्रेस छोड़ेंगे मनीष तिवारी? पंजाब चुनाव से पहले बयान से बढ़ी राजनीतिक हलचल

चंडीगढ़. कांग्रेस सांस मनीष तिवारी की एक सोशल मीडिया पोस्ट...

PTRI में दो दिवसीय प्रशिक्षण

भोपाल सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम एवं यातायात की नवीन तकनीकों...