अफवाहों से तरबूज बाजार बेहाल, बिक्री घटी; किसान और व्यापारी दोनों परेशान

Date:

भोपाल

गर्मी के मौसम में सबसे ज्यादा खाए जाने वाले फलों में शामिल तरबूज इस बार डर की वजह से बाजार में मार झेल रहा है। महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश में तरबूज खाने के बाद कथित मौतों की खबरें सामने आने के बाद लोगों ने इसे खरीदना कम कर दिया है, जिसका सीधा असर बिक्री और कीमतों पर पड़ा है।

बाजार में मांग घटी, कीमतों में बड़ी गिरावट
इन घटनाओं और सोशल मीडिया पर फैली खबरों के बाद भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर और जबलपुर जैसे शहरों में तरबूज की मांग तेजी से घट गई है। थोक और खुदरा दोनों बाजारों में बिक्री कम होने से किसानों और छोटे फल विक्रेताओं को नुकसान उठाना पड़ रहा है। कई जगहों पर दाम 20 से 30 प्रतिशत तक नीचे आ गए हैं। पहले जो तरबूज 18–20 रुपए किलो बिक रहा था, वह अब 12–13 रुपए किलो तक पहुंच गया है, जबकि थोक में कीमत 7–8 रुपए किलो तक गिर गई है।

संदिग्ध मामलों से बढ़ी चिंता
मुंबई के पायधुनी इलाके में अप्रैल के अंत में एक परिवार की मौत के बाद मामला चर्चा में आया, जहां खाने के बाद अचानक सभी की तबीयत बिगड़ गई थी। बाद में फोरेंसिक रिपोर्ट में तरबूज में जिंक फॉस्फाइड जैसे जहरीले रसायन के संकेत मिलने की बात सामने आई, हालांकि जांच अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। इसके अलावा मध्यप्रदेश के श्योपुर में भी इसी तरह का मामला सामने आया, जहां तरबूज खाने के बाद दो लोगों की मौत हो गई थी और सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं।

मंडियों में माल, लेकिन ग्राहक गायब
भोपाल की करोंद फल मंडी में रोजाना 15 से 20 मिनी ट्रक तरबूज पहुंच रहा है। थोक व्यापारी मोहम्मद सैफुद्दीन का कहना है कि पिछले 15-20 दिनों में बिक्री पर बड़ा असर पड़ा है। उन्होंने बताया, ‘पहले 25-30 क्विंटल तरबूज वाली गाड़ी सुबह तक खाली हो जाती थी, लेकिन अब दोपहर तक भी मुश्किल से बिकती है। मजबूरी में दाम घटाने पड़ रहे हैं। अगर ये खबरें नहीं आतीं तो इतनी गर्मी में बिक्री दोगुनी होती और भाव 25-30 रुपए किलो तक पहुंच जाते।’

इंदौर में भी स्थिति अलग नहीं है। फार्मिंग इन्फ्लूएंसर नीलेश पाटीदार के मुताबिक सोशल मीडिया पर वायरल खबरों ने पूरे बाजार को प्रभावित किया है। उनका कहना है कि अच्छी गुणवत्ता वाले तरबूज के दाम सामान्य स्थिति में 17-18 रुपए किलो तक जाते, लेकिन अभी 10-12 रुपए से ऊपर नहीं पहुंच पा रहे।

सबसे ज्यादा मार छोटे विक्रेताओं पर
फुटपाथ पर फल बेचने वाले छोटे व्यापारियों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। भोपाल के अशोका गार्डन में ठेला लगाने वाले राजू बताते हैं कि गर्मी के मौसम में तरबूज ही उनकी कमाई का सबसे बड़ा सहारा होता है, लेकिन इस बार बिक्री आधी रह गई है।

राजू कहते हैं, ‘वीडियो और खबरें वायरल होने के बाद लोग खरीदने से डर रहे हैं। जो ग्राहक आते भी हैं, वे पूछते हैं कि इसमें कुछ मिलाया तो नहीं गया।’

किसानों की मेहनत पर पानी फिर रहा
खंडवा जिले के किसान अजय सिंह गुर्जर ने बताया कि इस बार मौसम अच्छा होने से उत्पादन बढ़िया हुआ और किसानों को अच्छी कमाई की उम्मीद थी। लेकिन अचानक मांग घटने से हालात बिगड़ गए।

उन्होंने कहा, ‘मंडी में दाम इतने गिर गए कि लागत निकालना मुश्किल हो गया। कई व्यापारी खेत से माल उठाने ही नहीं पहुंचे। कई जगह 5-6 रुपए किलो तक भाव आ गए। मजबूरी में फसल खेतों में ही खराब हो गई।’

खरीदारों में डर, बदल रही आदतें
भोपाल में पढ़ाई कर रहे एक छात्र के अनुसार, ऐसी खबरों के बाद लोग तरबूज खरीदने से बच रहे हैं या फिर बहुत सावधानी से चुनकर खरीद रहे हैं। कई ग्राहक अब इसकी जगह अन्य फलों की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे बाजार में मांग और भी कम हो गई है।

मंडियों में माल ज्यादा, ग्राहक कम
भोपाल की करोंद फल मंडी में रोजाना कई ट्रक तरबूज पहुंच रहे हैं, लेकिन बिक्री धीमी पड़ गई है। व्यापारियों का कहना है कि पहले पूरा माल सुबह तक बिक जाता था, लेकिन अब दिनभर में भी पूरा स्टॉक खत्म नहीं हो रहा। मजबूरी में दाम घटाने पड़ रहे हैं। इंदौर में भी स्थिति लगभग ऐसी ही है, जहां अच्छे क्वालिटी के तरबूज भी सामान्य कीमत से काफी कम दाम पर बिक रहे हैं।

फूड सेफ्टी विभाग अलर्ट
मामले सामने आने के बाद भोपाल, जबलपुर समेत कई शहरों में फूड सेफ्टी विभाग ने जांच अभियान चलाया। एहतियात के तौर पर कई जगह सैंपलिंग की गई है।

भोपाल के फूड सेफ्टी अधिकारी पंकज श्रीवास्तव के मुताबिक दुकानों और गोदामों से तरबूज, आम समेत कई फलों के सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं। कुछ जगहों पर कृत्रिम रूप से फल पकाने में इस्तेमाल किए जा रहे संदिग्ध केमिकल भी जब्त किए गए हैं।

घर पर ऐसे करें तरबूज की जांच
भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) के अनुसार तरबूज में कृत्रिम रंग या मिलावट की पहचान घर पर भी की जा सकती है।

    कॉटन टेस्ट: तरबूज के लाल हिस्से पर सफेद कॉटन या टिशू पेपर रगड़ें। अगर कॉटन गहरा लाल या चटक गुलाबी हो जाए तो कृत्रिम रंग होने की आशंका हो सकती है।
    वाटर टेस्ट: तरबूज का छोटा टुकड़ा पानी से भरे ग्लास में डालें। यदि पानी तुरंत लाल या गुलाबी होने लगे तो यह मिलावट का संकेत हो सकता है। इसके अलावा तरबूज के अंदर बड़े क्रैक, ज्यादा सफेद-पीले रेशे या असामान्य रूप से चमकदार सतह भी कृत्रिम पकाने के संकेत माने जाते हैं। विशेषज्ञ भरोसेमंद दुकानदार से ही ताजा फल खरीदने की सलाह दे रहे हैं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

spot_imgspot_img

Popular

More like this
Related

फ्यूल सरचार्ज से महंगी हुई बिजली, बढ़कर आएगा बिल

 लखनऊ  बढ़ती महंगाई की मार से परेशान बिजली उपभोक्ताओं को...

भीषण गर्मी का असर, कई बांध सूखे के कगार पर; दक्षिण भारत में स्थिति सबसे गंभीर

 नई दिल्ली  भीषण गर्मी और सूखे की बढ़ती आशंकाओं के...

गोरखपुर में पर्यटन को नई उड़ान: रामगढ़ताल के बाद अब चिलुआताल तैयार

 लखनऊ उत्तर प्रदेश में एक नया टूरिस्ट स्पॉट तैयार है।...