जाति प्रमाण पत्र विवाद पर मंत्री प्रतिमा बागरी का जवाब, बोलीं- 110 साल पुराने दस्तावेज दिए, फैसला जांच समिति करेगी

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भोपाल
 मध्य प्रदेश की राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी ने मंगलवार को अपने अनुसूचित जाति (एससी) प्रमाण पत्र को लेकर लगे आरोपों को खारिज किया। बागरी ने कहा कि उन्होंने राज्य की उच्च स्तरीय जाति जांच समिति के समक्ष सभी दस्तावेजी सबूत प्रस्तुत कर दिए हैं और उनका जाति प्रमाण पत्र वैध है। विवाद तब शुरू हुआ जब मध्य प्रदेश कांग्रेस के अनुसूचित जाति विभाग के अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने आरोप लगाया कि बागरी अनुसूचित जाति श्रेणी से नहीं आती हैं और उन्होंने गलत जानकारी के आधार पर अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र प्राप्त किया था।

क्या लगा था आरोप
उन्होंने दावा किया कि प्रतिमा बागरी राजपूत समुदाय से हैं और आरोप लगाया कि उन्होंने आरक्षित रैगांव निर्वाचन क्षेत्र से 2023 का विधानसभा चुनाव लड़ा और बाद में एक अमान्य जाति प्रमाण पत्र का उपयोग करके मंत्री बनीं। अहिरवार ने उनका जाति प्रमाण पत्र रद्द करने, विधानसभा से अयोग्य घोषित करने और राज्य मंत्रिमंडल से हटाने की मांग की थी।

सोमवार को जांच समिति के सामने पेश हुईं
प्रतिमा बागरी ने बताया कि वह सोमवार को जाति जांच समिति के सामने पेश हुईं और अपने दावे के समर्थन में सभी दस्तावेज प्रस्तुत किए। उन्होंने कहा कि समिति के साथ बैठक हुई थी और उन्होंने 110 साल से अधिक पुराने सबूतों सहित सभी दस्तावेज समिति के समक्ष प्रस्तुत किए। दस्तावेजों की जांच के बाद किसी को भी कोई अनियमितता नहीं मिली और उनका जाति प्रमाण पत्र असली है।

मंत्री ने दर्ज कराया था बयान
सोमवार को बागरी ने समिति के समक्ष अपना बयान दर्ज कराया और ऐतिहासिक रिकॉर्ड और अनुसूचित जाति सूची में बागड़ी समुदाय के शामिल होने से संबंधित दस्तावेज सहित दस्तावेजी सबूत प्रस्तुत किए। अहिरवार भी समिति के समक्ष पेश हुए और उनकी जातिगत स्थिति को चुनौती देने वाले दस्तावेज प्रस्तुत किए।

    प्रतिमा बागरी ने कहा- मेरा जाति प्रमाण पत्र सही
    जांज समिति को मेरे जाति प्रमाण पत्र पर आपत्ति नहीं
    मंत्री ने कहा- 110 साल पुराने दस्तावेज समिति को सौंपे
    जांच समिति का फैसला आना अभी बाकी है

जांज समिति का फैसला आना बाकी
कांग्रेस नेता के आरोपों को खारिज करते हुए मंत्री प्रतिमा बागरी ने उन पर राजनीतिक कारणों से झूठे दावे करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि उनका जाति प्रमाण पत्र फर्जी नहीं है और यह साबित हो चुका है। उन्होंने कहा कि अहिरवार ने झूठे आरोप लगाए हैं और मीडिया के सामने गलत तथ्य पेश किए हैं, और अब सच्चाई सामने आ गई है। जांच समिति दोनों पक्षों द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों की जांच कर रही है और अपनी जांच पूरी करने के बाद इस मामले पर फैसला सुनाएगी।

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