पंजाब के सरकारी स्कूल प्रिंसिपलों के लिए बड़ी राहत, हाई कोर्ट ने हटाया अंतरिम आदेश, प्रमोशन को मिली मंजूरी

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चंडीगढ़
 पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने पंजाब के सरकारी स्कूलों में प्रिंसिपलों की पदोन्नति पर लगी अंतरिम रोक हटा दी है। हालांकि अदालत ने उन याचिकाओं को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है, जिनमें यह मुद्दा उठाया गया है कि सरकारी स्कूलों में प्रिंसिपल और अन्य प्रशासनिक पदों पर नियुक्ति या पदोन्नति के लिए भी टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (टीईटी) उत्तीर्ण होना अनिवार्य होना चाहिए। हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मामले के अंतिम निर्णय तक की जाने वाली सभी पदोन्नतियां न्यायालय के अंतिम फैसले के अधीन रहेंगी।

जस्टिस हरसिमरन सिंह सेठी और जस्टिस अमरिंदर सिंह ग्रेवाल की खंडपीठ ने सभी संबंधित याचिकाओं की सुनवाई छह माह के भीतर पूरी करने का निर्देश दिया।याचिकाकर्ताओं ने अदालत में दलील दी कि सरकारी स्कूलों में प्रिंसिपल और अन्य प्रशासनिक पदों पर नियुक्त होने वाले अधिकारियों के लिए भी टीईटी योग्यता अनिवार्य होनी चाहिए। उनका कहना था कि ये पद शिक्षा व्यवस्था से जुड़े हैं, इसलिए इनके लिए भी वही पात्रता लागू होनी चाहिए जो शिक्षकों पर लागू होती है।

पंजाब सरकार ने क्या कहा?
वहीं, पंजाब सरकार की ओर से अदालत को बताया कि जिन पदों पर नियुक्तियां की जा रही हैं, वे मूल रूप से प्रशासनिक प्रकृति के हैं, न कि अध्यापन के। उन्होंने कहा कि यदि किसी विशेष परिस्थिति में प्रिंसिपल या अन्य अधिकारी को अस्थायी अथवा अंतरिम व्यवस्था के तहत किसी कक्षा को पढ़ाना भी पड़े, तब भी उस पद का मूल स्वरूप प्रशासनिक ही रहता है।

राज्य सरकार ने यह भी तर्क दिया कि बच्चों को निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 के तहत टीईटी केवल कक्षा पहली से आठवीं तक पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए अनिवार्य है। इस संबंध में सरकार ने अंजुमन इशाअत-ए-तालीम ट्रस्ट मामले में उच्चतम न्यायालय के निर्णय का भी हवाला दिया।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद खंडपीठ ने कहा कि यह विवाद 'आगे विस्तृत विचार' की मांग करता है। इसके साथ ही अदालत ने 18 दिसंबर 2025 को समन्वय पीठ द्वारा पारित अंतरिम आदेश को निरस्त कर दिया, जिसके कारण प्रिंसिपलों की पदोन्नति प्रक्रिया रुकी हुई थी।

अतंरिम आदेश को समाप्त किया जाता है
अदालत ने अपने आदेश में कहा, 18 दिसंबर 2025 को समन्वय पीठ द्वारा दिया गया अंतरिम आदेश समाप्त किया जाता है, क्योंकि किसी स्कूल में नियमित प्रिंसिपल के अभाव में उसका कार्य प्रभावित हो रहा है। अंतरिम आदेश के कारण कोई पदोन्नति नहीं हो सकी है। स्कूल और प्रशासन के व्यापक हित को ध्यान में रखना आवश्यक है तथा राज्य ने रिकॉर्ड पर बताया है कि नियमित प्रिंसिपल न होने से प्रशासनिक कार्यों में कठिनाई आ रही है।

साथ ही हाई कोर्ट ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि वर्तमान याचिकाओं के लंबित रहने के दौरान की गई कोई भी पदोन्नति इन मामलों के अंतिम निर्णय के अधीन रहेगी। इससे फिलहाल पदोन्नति प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी, लेकिन उसका अंतिम प्रभाव अदालत के फैसले पर निर्भर करेगा।

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