अब पंजाब में बिना पंजाबी साइन बोर्ड नहीं चलेगा काम, सरकार ने सभी दुकानदारों को दिए आदेश

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चंडीगढ़.

पंजाब सरकार ने राज्यभर में दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के साइन बोर्ड पर पंजाबी (गुरमुखी) भाषा को प्रमुखता से लिखे जाने संबंधी नियमों को सख्ती से लागू कराने के निर्देश जारी किए हैं। श्रम विभाग ने सभी सहायक श्रम आयुक्तों और श्रम-सह-सुलह अधिकारियों को पंजाब शॉप्स एंड कमर्शियल एस्टैब्लिशमेंट्स (प्रथम संशोधन) नियम, 2023 के नियम 23 और 24 का प्रभावी ढंग से पालन सुनिश्चित करने के लिए कहा है।

सरकार की ओर से जारी निर्देश सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी एवं केएस राजू लीगल ट्रस्ट के चेयरमैन डाॅ. जगमोहन सिंह राजू की ओर से मुख्य सचिव को दिए गए प्रतिनिधित्व के बाद जारी किए गए हैं। अपने प्रतिनिधित्व में डॉ. राजू ने कहा था कि नियम लागू होने के तीन वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बावजूद राज्य में बड़ी संख्या में दुकानें और व्यावसायिक प्रतिष्ठान अब भी पंजाबी में साइन बोर्ड नहीं लगा रहे हैं या फिर कानून के अनुरूप पंजाबी को प्रमुखता नहीं दे रहे हैं।

जिलों में समान रूप से पालना जरूरी
सरकार के निर्देशों का स्वागत करते हुए डाॅ. राजू ने कहा कि अब उम्मीद है कि सभी जिलों में कानून का समान रूप से पालन कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह केवल साइन बोर्ड का मुद्दा नहीं, बल्कि पंजाब की मातृभाषा की गरिमा, पहचान और उसके सम्मान से जुड़ा विषय है। पंजाब में पंजाबी भाषा को उसका वैधानिक स्थान दिलाना सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी है।

RTI में हैरान करने वाला तथ्य आया
डाॅ. राजू ने बताया कि सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के तहत विभिन्न जिलों से प्राप्त जवाबों में सामने आया कि नियम 24 के तहत पंजाबी में साइन बोर्ड नहीं लगाने वाले किसी भी प्रतिष्ठान पर अब तक कोई जुर्माना नहीं लगाया गया है। उनके अनुसार, तीन वर्ष से अधिक समय तक नियम लागू रहने के बावजूद किसी भी जिले में दंडात्मक कार्रवाई नहीं होना कानून के क्रियान्वयन की स्थिति को दर्शाता है।

पंजाबी भाषा को सम्मान दिलाने के लिए संघर्ष जारी
उन्होंने कहा कि अब सरकार की ओर से स्पष्ट निर्देश जारी किए जाने के बाद संबंधित अधिकारियों को नियमों का सख्ती से पालन कराना चाहिए, ताकि सभी दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के साइन बोर्ड कानून के अनुरूप पंजाबी भाषा में प्रमुखता के साथ प्रदर्शित हों। डाॅ. राजू ने चेतावनी दी कि सरकार के निर्देश जारी होने के बाद भी अगले 60 दिनों के भीतर पूरे पंजाब में नियमों का पालन सुनिश्चित नहीं किया गया तो वह इस मुद्दे पर सीधी कार्रवाई करेंगे। उनका कहना है कि पंजाब में पंजाबी भाषा को उसका उचित सम्मान और कानूनी दर्जा दिलाने के लिए लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष जारी रहेगा।

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