चंडीगढ़ में 248 वेंडरों के लिए मेगा वेंडिंग जोन का प्रस्ताव, स्ट्रीट वेंडरों को बड़ी राहत

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चंडीगढ़.

हरियाणा सरकार ने प्रदेश में जलापूर्ति, सीवरेज और बरसाती जल निकासी व्यवस्था को आधुनिक और मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। वर्ष 2026-27 के लिए 2,534.39 करोड़ रुपये की लागत वाली 712 नई परियोजनाओं को मंजूरी प्रदान की गई है।

इनमें से 603 परियोजनाएं ग्रामीण क्षेत्रों की हैं। इन परियोजनाओं के जरिए शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में पेयजल उपलब्धता बढ़ाने, सीवरेज नेटवर्क के विस्तार, जल निकासी व्यवस्था में सुधार और जल प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाने पर जोर रहेगा। जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी एवं लोक निर्माण मंत्री रणबीर गंगवा ने मंगलवार को बताया कि हरियाणा जल आपूर्ति एवं सीवरेज बोर्ड (डब्ल्यूएसएसबी) की 59वीं बैठक में इन परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई। सरकार का उद्देश्य हर घर तक सुरक्षित पेयजल पहुंचाना और बेहतर सीवरेज व्यवस्था उपलब्ध कराना है। हरियाणा सरकार ने तेजी से विकसित हो रहे शहरों की जरूरतों को देखते हुए 603.32 करोड़ रुपये की लागत से 69 शहरी जलापूर्ति परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इन योजनाओं से बहादुरगढ़, धारूहेड़ा, झज्जर, नारनौल, रेवाड़ी और कुरुक्षेत्र जैसे शहरों में पेयजल आपूर्ति व्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

निर्धारित समय में कार्य पूरा करने के निर्देश
मंत्री रणबीर गंगवा ने बताया कि मुख्यमंत्री ने सभी परियोजनाओं को निर्धारित समय सीमा में पूरा करने, विभागीय प्रतिष्ठानों पर सौर ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने तथा जल शुल्क संग्रहण प्रणाली को और प्रभावी बनाने के निर्देश दिए हैं। सरकार ने 31 मार्च 2027 तक शहरी जल कनेक्शनों का दायरा 90 प्रतिशत से बढ़ाकर 93 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य भी तय किया है।

526.49 करोड़ लागत वाली 18 शहरी परियोजनाएं भी स्वीकृत
इसके अलावा 526.49 करोड़ रुपये की लागत से 18 शहरी सीवरेज परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं। इनका लाभ बहादुरगढ़, झज्जर, नारनौल, रेवाड़ी, कुरुक्षेत्र, जगाधरी और रोहतक को मिलेगा। ऐलनाबाद और बवानीखेड़ा में जलभराव की समस्या से राहत देने के लिए 19.11 करोड़ रुपये की लागत से दो बरसाती जल निकासी परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में सरकार ने बड़े पैमाने पर निवेश करने की योजना बनाई है। 1,108.28 करोड़ रुपये की लागत से 603 नई जलापूर्ति संवर्धन एवं सुधार योजनाएं स्वीकृत की गई हैं। इन योजनाओं के तहत नए नलकूप स्थापित किए जाएंगे, नहर आधारित जलघर बनाए और उन्नत किए जाएंगे, बूस्टिंग स्टेशन स्थापित होंगे, नई पाइपलाइन बिछाई जाएगी तथा पुरानी पाइपलाइन बदली जाएगी। इससे गांवों में पेयजल आपूर्ति की गुणवत्ता और उपलब्धता दोनों में सुधार आने की उम्मीद है।

ग्रामीण सीवरेज व्यवस्था के विस्तार पर भी ध्यान
ग्रामीण सीवरेज व्यवस्था को विस्तार देने के लिए 203.58 करोड़ की लागत से 13 महाग्राम सीवरेज व 71.58 करोड़ की लागत से तीन महाग्राम जलापूर्ति परियोजनाएं मंजूर की गई हैं। इनमें उजीना, बबैन, रामशरण माजरा, उमरी और टिकली समूह के गांवों की परियोजनाएं प्रमुख हैं। ग्रामीण बस्तियों में पेयजल आपूर्ति के दो कार्यों के लिए भी अलग से राशि स्वीकृत की गई है।

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