चंडीगढ़
हरियाणा में गोशालाओं को पशुधन की देखरेख के लिए 820 ई-रिक्शा उपलब्ध कराई जाएंगी। एक हजार तक पशु रखने वाली गोशालाओं को एक तथा इससे अधिक गायों को रखने वाली गोशालाओं को दो ई-रिक्शा दी जाएंगी। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में सोमवार को आयोजित हाई पावर्ड परचेज कमेटी की बैठक में सवा दस करोड़ रुपये की लागत से ई-रिक्शा खरीदने को अनुमति दी गई।
प्रदेश में कुल 770 गोशालाएं हैं। इनमें 553 गोशालाओं में एक हजार से कम, 79 गोशालाओं में दो हजार तक, 20 गोशालाओें में तीन हजार, आठ गोशालाओं में चार हजार, एक गोशाला में पांच हजार व एक गोशाला में छह हजार तक पशुधन है। गोशालाओं को आत्मनिर्भर एवं सशक्त बनाने की कड़ी में गोशालाओं को ई-रिक्शा उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया है।
बैठक में शिक्षा मंत्री महीपाल ढांडा, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री विपुल गोयल, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा, लोक निर्माण, जनस्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी मंत्री रणबीर गंगवा और महिला एवं बाल विकास तथा सिंचाई मंत्री श्रुति चौधरी मौजूद थे। मुख्यमंत्री ने कैथल शहर की विभिन्न कालोनियों में करीब 13 करोड़ रुपये की लागत से सीवरेज लाइन डालने के कार्य को मंजूरी प्रदान की। इससे शहर की अधिकतर आबादी में सीवरेज व्यवस्था शुरू हो जाएगी जो आगामी 2042 तक की जनसंख्या को ध्यान में रखकर तैयार की गई है।
इसके अलावा खेदड़ में वाटर सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट को अपग्रेड करने एवं आरसीसी टैंक का निर्माण करने की भी मंजूरी दी गई। इस कार्य पर लगभग 28 करोड़ रुपये की लागत आएगी। फरीदाबाद मेट्रोपोलियन विकास प्राधिकरण में 10 एमएलडी क्षमता के पांच रैनीवैल ट्यूबवैल लगाने की स्वीकृति दी गई है।
गांव मंझावली, मोठूका के आसपास यमुना नदी के जलभराव वाले क्षेत्रों में लगभग 165 करोड़ रुपये की लागत से लगाए जाने वाले रेनीवैल ट्यूबवैल से पेयजल हेतु टेस्टिंग की जाएगी। गुरुग्राम के गांव बसई में 1000 एमएलडी क्षमता का दूसरा जल घर बनाने का निर्णय लिया गया है। इसके निर्माण पर लगभग 149 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
मोलभाव कर बचाए 16.58 करोड़
बैठक में 380.40 करोड़ रुपये के विभिन्न कार्यों के लिए 363.82 करोड़ रुपये में टेंडर छोड़े गए। इस तरह मोल-भाव कर लगभग 16.58 करोड़ रुपये की बचत की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि कि विकास कार्यों में किसी प्रकार की देरी व लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी कार्य निर्धारित अवधि में पूर्ण किए जाने चाहिए। विकास कार्यो में उच्च गुणवत्ता सुनिश्चित की जाए।

