मनीष तिवारी की पंजाब वापसी के संकेत? प्रताप बाजवा का मिला साथ, लुधियाना सीट बनी चर्चा का केंद्र

Date:

चंडीगढ़.

पंजाब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा पूर्व केंद्रीय मंत्री व चंडीगढ़ से सांसद मनीष तिवारी के पक्ष में आ गए हैं। बाजवा ने कहा कि मनीष अनुभवी नेता हैं और पंजाब में कांग्रेस को अनुभवी नेताओं की जरूरत है।

यह बयान ऐसे समय में आया है जब लीडरशिप को लेकर धड़ों में बंटे प्रदेश के नेताओं को हाईकमान एकता का पाठ पढ़ाने में लगी हुई है। खास बात यह है कि बाजवा अभी तक किसी भी गुट का हिस्सा नहीं हैं लेकिन माना जा रहा है कि बाजवा मनीष तिवारी का समर्थन करके शायद खुद को भी अनुभवी होने की हाईकमान को याद दिलाना चाह रहे हैं। बाजवा ने कहा कि मनीष तिवारी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हैं और उनका पंजाब में सांसद और मंत्री के तौर पर काफी अनुभव रहा है। उनके अनुभव का आगामी विधानसभा चुनाव में पार्टी लाभ ले सकती है। तिवारी की भावनाओं को हाईकमान के सामने रखा जाएगा।

यह पहली बार है कि पंजाब के किसी वरिष्ठ नेता ने मनीष तिवारी की ओर से उनकी पंजाब में विधानसभा चुनाव संबंधी समितियों में अनदेखी के आरोप का समर्थन किया है। दूसरी तरफ, पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी का खुलकर समर्थन करने के बाद हाईकमान द्वारा एकता का पाठ पढ़ाकर भेजे गए सुखजिंदर सिंह रंधावा ने इस मामले पर सधा हुआ बयान दिया है। उनका कहना है कि पार्टी से जुड़े किसी भी मामले में फैसला हाईकमान को लेना होता है। ऐसे में वह कुछ अधिक नहीं कह सकते। पार्टी के कई अन्य वरिष्ठ नेता भी हाईकमान द्वारा बरती गई सख्ती के बाद इस मामले पर कोई भी टिप्पणी करने से बच रहे हैं। हालांकि दबी जुबान में कुछ कांग्रेसियों का यह भी कहना है कि मनीष तिवारी असल में चंडीगढ़ से वापिस पंजाब की राजनीति में अपनी जगह तलाश रहे हैं। रवनीत बिट्टू के भाजपा में शामिल होने के बाद उनकी निगाह लुधियाना पर है और वे पहले भी यहां से सांसद रह चुके हैं।

पार्टी नेताओं का यह भी मानना है कि पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान आम आदमी पार्टी के साथ गठबंधन के तहत चंडीगढ़ सीट पर जीत दर्ज करने वाले तिवारी चंडीगढ़ के मौजूदा राजनीति हालात के वाकिफ हैं। आम आदमी पार्टी के साथ गठबंधन का कोई चांस नहीं है और भाजपा भी पूरी ताकत के साथ आगामी लोकसभा चुनाव लड़ने की तैयारी में जुटी हुई है। यही नहीं, एसआईआर के बाद चंडीगढ़ से कई हजार वोट कटने की भी संभावना बनी हुई है और मनीष तिवारी मात्र ढाई हजार वोट से जीते थे। यही बड़ी वजह है कि मनीष तिवारी को पंजाब फिर से अच्छा लगने लगा है।

कांग्रेस हाईकमान द्वारा 2027 पंजाब विधानसभा चुनाव समितियों के गठन में अपनी अनदेखी पर मनीष तिवारी की नाराजगी पहले इंटरनेट मीडिया और अब एक पोड कास्ट को दिए इंटरव्यू में सामने आई है। तिवारी ने कहा कि वह न सिर्फ श्री आनंदपुर साहिब और इंडस्ट्रियल हब लुधियाना से सांसद रहे हैं, बल्कि केंद्रीय मंत्री भी रहे हैं। उनके परिवार ने आतंकवाद के दौरान बलिदान तक दिया है। वे पंजाब और पंजाबियत के अलावा प्रदेश के मुद्दों को भी बेहतर तरीके से समझते हैं। पंजाब कांग्रेस के कुछ नेता नहीं चाहते कि उनके पंजाब के अनुभव का आगामी चुनाव में लाभ मिल सके। यह मेरा नहीं बल्कि कांग्रेस का नुकसान है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

spot_imgspot_img

Popular

More like this
Related

जेएनयू प्रशासन में फेरबदल, प्रो. पांडेय और दास पदों से हटाए गए

नई दिल्ली  जेएनयू में बड़ा प्रशासनिक बदलाव करते हुए कुलगुरु...

सम्राट सरकार के सौ दिन पूरे, विकास कार्यों को मिली नई रफ्तार

पटना  बिहार में संसाधनों की कमी के बीच बुलंद इमारत...

अनूठी कांवड़ यात्रा में 12 क्विंटल कार खींच रहे नरेंद्र, मेरठ पहुंचे

 मेरठ  गोमाता को राष्ट्र माता का दर्जा दिलाने की मांग...

जालंधर में दाखिला नहीं मिलने पर कॉलेज के बाहर बवाल, अभिभावकों ने किया सड़क जाम

जालंधर. जालंधर के एक महाविद्यालय में दाखिले को लेकर शनिवार...