तेल कंपनियों को राहत! पेट्रोल, डीजल और ATF की एक्सपोर्ट ड्यूटी में कटौती

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भोपाल.

वैश्विक ऊर्जा संकट और पश्चिम एशिया में जारी भारी उथल-पुथल के बीच केंद्र सरकार ने देश के पेट्रोलियम निर्यातकों को एक बड़ी विधिक राहत दी है। सरकार ने 1 जून 2026 से शुरू होने वाले नए पाक्षिक (15 दिनों की अवधि) चक्र के लिए पेट्रोल, डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF – हवाई ईंधन) पर लागू एक्सपोर्ट ड्यूटी (निर्यात शुल्क) में भारी कटौती करने का एलान किया है.

शनिवार को जारी एक आधिकारिक सरकारी बयान में इस कूट फैसले की जानकारी साझा की गई है. यह राहत भरा प्रशासनिक कदम ऐसे समय में उठाया गया है, जब अमेरिका-ईरान युद्ध छिड़ने के बाद से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें लगातार आसमान छू रही हैं. इस भीषण सैन्य संघर्ष के कारण तेल की वैश्विक सप्लाई बाधित हुई है और सामरिक रूप से बेहद कूट 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (Hormuz Strait) के आसपास पैदा हुई समुद्री बाधाओं ने ऊर्जा बाजार पर भारी दबाव बना दिया है.

तेल उत्पादों पर तय हुईं नई विधिक दरें
संशोधित नियमों के तहत तीनों प्रमुख पेट्रोलियम ईंधनों पर निर्यात शुल्क को कूट रूप से घटाकर आधा या बेहद कम कर दिया गया है:
पेट्रोल: पेट्रोल के अंतरराष्ट्रीय निर्यात पर ड्यूटी को घटाकर अब 1.5 रुपये प्रति लीटर तय किया गया है.
डीजल: विदेशी बाजारों में भेजे जाने वाले डीजल पर अब 13.5 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से निर्यात शुल्क लगेगा.
ATF (हवाई ईंधन): विमानों के ईंधन यानी एटीएफ के निर्यात पर अब ड्यूटी 9.5 रुपये प्रति लीटर निर्धारित की गई है.

16 मई बनाम 1 जून 2026 की दरें
केंद्र सरकार द्वारा हर 15 दिनों में की जाने वाली विधिक समीक्षा के बाद निर्यात शुल्कों में आया कूट बदलाव इस प्रकार है:

ईंधन का प्रकार        16 मई को घोषित दरें       1 जून से दरें       प्रति लीटर शुद्ध राहत
पेट्रोल (Petrol)     ₹3.00 प्रति लीटर     ₹1.50 प्रति लीटर     ₹1.50 की कमी
डीजल (Diesel)     ₹16.50 प्रति लीटर     ₹13.50 प्रति लीटर     ₹3.00 की कमी
हवाई ईंधन (ATF)     ₹16.00 प्रति लीटर     ₹9.50 प्रति लीटर     ₹6.50 की कमी

घरेलू उपभोक्ताओं को फिलहाल कोई राहत नहीं
निर्यातकों के लिए शुल्क घटाने के बावजूद आम जनता के लिए राहत की खबर नहीं है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि घरेलू उपभोग के लिए जारी होने वाले पेट्रोल और डीजल पर मौजूदा एक्साइज ड्यूटी (केंद्रीय उत्पाद शुल्क) की दरों को यथावत रखा गया है। इसका विधिक मतलब यह है कि देश के भीतर पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतों में फिलहाल कोई कमी या बदलाव देखने को नहीं मिलेगा।

क्यों लागू किया गया था यह निर्यात शुल्क?
वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें बढ़ने पर घरेलू रिफाइनरी कंपनियां ज्यादा मुनाफे के लालच में पेट्रोल-डीजल विदेशों में न खपा दें, इसे रोकने के लिए सरकार ने 27 मार्च 2026 को पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच यह कड़ा टैक्स विन्यास लागू किया था। इस टैक्स (जिसमें विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क और सड़क एवं बुनियादी ढांचा उपकर शामिल हैं) का मुख्य कूट उद्देश्य अत्यधिक अनियंत्रित निर्यात पर लगाम लगाना और भारत के भीतर पेट्रोलियम उत्पादों की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करना था।

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