मुश्किलों को मात देकर रचा इतिहास, हरियाणा की शर्मिला धनखड़ के नाम कॉमनवेल्थ गेम्स का गोल्ड मेडल

Date:

रेवाड़ी.

महज दो साल की उम्र में पोलियो ने कदम रोक दिए। दाम्पत्य जीवन में आकर घरेलू हिंसा ने नई चुनौती खड़ी कर दीं, लेकिन कभी हार नहीं मानने का संकल्प लेकर आगे बढ़ी शर्मिला धनखड़ ने उस उम्र में आकर विश्व स्तर पर कीर्तिमान स्थापित किया, जिस उम्र की दहलीज पर आकर लोग खुद को थका हुआ महसूस करते हैं।

रेवाड़ी की रहने वाली पैरा खिलाड़ी 39 वर्षीय शर्मिला ने कामनवेल्थ गेम्स में शॉटपुट में गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया है।

संघर्षपूर्ण रहा है जीवन
दो बेटियों की मां शर्मिला धनखड़ की कहानी संघर्ष भरी रही है। मूलरूप से महेंद्रगढ़ जिले के छिछरोली की रहने वाली शर्मिला की शादी करीब 20 साल पहले रेवाड़ी में हुई थी, लेकिन पहले पति से घरेलू हिंसा के चलते वह अलग हो गईं और दूसरी शादी की। हालांकि, दूसरी शादी के बाद भी संघर्ष ने साथ नहीं छोड़ा। बेहद गरीब परिवार से ताल्लुक रखने वाली शर्मिला के पति छोटी सी परचून की दुकान चलाते हैं। उन्होंने खेल की शुरुआत वर्ष 2020 में कोरोना काल के समय की। शर्मिला के मुताबिक, उस समय वह हरियाणा रोडवेज के रेवाड़ी डिपो में पहली महिला कंडेक्टर लगी थी। यह अस्थायी नौकरी थी।

एक दिन उन्हें शहर के ही राव तुलाराम स्टे़डियम में जाने का मौका मिला। उस समय पैरा खिलाड़ी टेकचंद को व्हील चेयर पर खेलते हुए उनके भी मन में आया कि जब वह व्हील चेयर पर खेल सकते हैं, मैं भी खेल सकती हूं और यहीं से शर्मिला के खेल करियर की शुरुआत हुई। उन्होंने टेकचंद को ही अपना गुरु बना लिया और उनके मार्ग दर्शन में प्रशिक्षण शुरू किया। महज एक साल के भीतर ही उन्होंने वर्ष 2021 में राष्ट्रीय चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीता। वर्ष 2022 में कॉमनवेल्थ तक तो पहुंच गई, लेकिन पदक जीतने का सपना अधूरा रह गया। लेकिन हार नहीं मानी और लगातार संघर्ष और मेहनत को जारी रखा। चार साल बाद आज उसी मंच पर शर्मिला ने गोल्ड मेडल जीतकर साबित कर दिया कि चुनौतियां चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न हो, लेकिन संघर्ष के आगे ही जीत लिखी होती है।

बेटी को मिली प्रेरणा
शर्मिला की एक बेटी अनुज बीए प्रथम वर्ष की छात्रा है। जबकि छोटी बेटी लक्ष्मी 10वीं कक्षा की छात्रा है। बड़ी बेटी अनुज ने मां से प्रेरणा लेकर खेलों में कदम रखा और वह आज जेवलिन थ्रो की प्रदेश स्तरीय खिलाड़ी हैं। शर्मिला के मायके छिछरोली में उनकी मां और भाई हैं। देश के लिए गोल्ड जीतने के बाद रेवाड़ी स्थित घर ही नहीं, बल्कि मायके में भी जश्न का माहौल है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

spot_imgspot_img

Popular

More like this
Related

तूफानी तेजी के बाद शेयर बाजार में अचानक क्रैश, दिन के हाई से 1300 अंक फिसला सेंसेक्स

मुंबई  मंगलवार का दिन शेयर बाजार में पैसे लगाने वालों...

जाजमऊ पुल मरम्मत के चलते तीन माह तक बदले रूट से चलेंगी लखनऊ-कानपुर बसें

लखनऊ राजधानी से कानपुर का बस से सफर महंगा हो...