फैटी लिवर बन सकता है हार्ट अटैक की वजह! जानिए शुरुआती लक्षण और कब लें डॉक्टर की सलाह

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नई दिल्ली

अगर लिवर में खराबी है तो यह सीधे तौर पर हार्ट को भी नुकसान कर सकता है. नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज से हार्ट अटैक का भी रिस्क होता. विशेषज्ञों का कहना है कि नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज जिसे अब मेटाबोलिक डिसफंक्शन-एसोसिएटेड स्टीटोटिक लिवर डिजीज ( MASLD)  कहते हैं यह दिल के लिए भी बड़ा खतरा है. इससे पीड़ित अधिकांश लोगों में मृत्यु का सबसे बड़ा कारण हार्ट की बीमारी ही होती है. ऐसे में इसको कंट्रोल करना जरूरी है। 

MASLD एक ऐसी बीमारी है जिसमें मेटाबॉलिक समस्याओं जैसे मोटापा,डायबिटीज, हाई बीपी और बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल के कारण लिवर में जरूरत से अधिक फैट जमा हो जाता है. ये बीमारी सीधे तौर पर हार्ट को नुकसान करती है। 

MASLD से हार्ट डिजीज का खतरा क्यों बढ़ता है?

इस बारे में मेदांता मेडिसिटी मूलचंद अस्पताल में कार्डियोलॉजी विभाग में प्रोफेसर डॉ. तरुण कुमार ने  आजतक.इन को बताया है. डॉ तरुण कहते हैं कि MASLD से पीड़ित अधिकतर लोगों में मौत का कारण हार्ट की ही बीमारी होती है, जबकि ये बीमारी होती तो लिवर में है, लेकिन सीधे तौर पर हार्ट को नुकसान करती है। 

डॉ तरुण बताते हैं कि MASLD के कारण शरीर में लगातार सूजन रहती है. इस वजह से इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ता है. ब्लड में बैड कोलेस्ट्रॉल और खतरनाक कण बढ़ जाते हैं. शरीर में अच्छे कोलेस्ट्रॉल की भी कमी होने लगती है. इससे नसों की भीतरी परत को नुकसान होता है. हार्ट में खून के थक्के बनने का रिस्क होता है. यही थक्के आगे चलकर हार्ट अटैक का कारण बन सकते हैं. कुछ मामलों में ये कोरोनरी हार्ट डिजीज, स्ट्रोक से लेकर हार्ट के फेल होने का भी खतरा बढ़ा देते हैं। 

किन लोगों में लिवर की बीमारी से हार्ट डिजीज का अधिक खतरा होता है

डायबिटीज

मोटापा

हाई बीपी

किडनी की बीमारी

 लिवर में फाइब्रोसिस 

कौन से टेस्ट जरूर कराने चाहिए

लिपिड प्रोफाइल (LDL, HDL, Triglycerides, ApoB)

HbA1c या ब्लड शुगर

 लिवर फंक्शन टेस्ट

FIB-4 या FibroScan 

हार्ट की जांच

कौन से लक्षण हैं खतरनाक

पेट के दाएं और तेज दर्द

उल्टी के साथ ठंडा पसीना आना

सांस फूलना

छाती में तेज दर्द जो हाथ तक जाए

इस समस्या से बचाव के लिए क्या करें

डॉ तरुण बताते हैं कि अगर फैटी लिवर से हार्ट को होने वाले नुकसान से बचना है तो सबसे पहले शरीर का वजन 7–10% कम करें. जंक फूड से दूरी बनाएं. सप्ताह में कम के सम 150 मिनट की एक्सरसाइज करें. जरूरत होने पर डॉक्टर की सलाह से स्टैटिन, GLP-1 रिसेप्टर एगोनिस्ट या SGLT2 इनहिबिटर जैसी दवाएं ले सकते हैं. डॉ तरुण कहते हैं कि अगर आपको लिवर की बीमारी है तो हार्ट का भी खास ध्यान रखें. इस मामले में लापरवाही न करें। 

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