शिक्षा के क्षेत्र में पंजाब का बड़ा कमाल, स्कूल रैंकिंग में केरल को पछाड़कर बना देश का नंबर-1 राज्य

Date:

 नई दिल्ली

एक समय था जब पंजाब के सरकारी स्कूलों का नाम आते ही अभिभावकों के मन में अपने बच्चों के भविष्य को लेकर चिंता घर कर जाती है. जर्जर इमारतें, संसाधनों की कमी और गिरती शैक्षणिक गुणवत्ता के बीच लाखों परिवार अपने बच्चों के बेहतर भविष्य का सपना देखते थे. हालात ऐसे थे कि शिक्षा के क्षेत्र में पंजाब की रैंकिंग लगातार नीचे खिसकती जा रही थी और राज्य देश के पिछड़े राज्यों में गिना जाने लगा था. लेकिन कुछ ही सालों में पंजाब के स्कूलों की तस्वीर पूरी तरह बदल गई। 

आज वही पंजाब सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता, आधुनिक सुविधाओं और बेहतर शैक्षणिक प्रदर्शन के दम पर देश में नंबर-1 बनकर उभरा है. यह सिर्फ रैंकिंग में सुधार की कहानी नहीं, बल्कि उन लाखों छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों की मेहनत और उम्मीदों की जीत की कहानी है, जिन्होंने बदलाव पर भरोसा किया। 
 
2016-17 में पंजाब शिक्षा के क्षेत्र में 22वें स्थान पर रहा, वहीं, 2018-19 में 26वें और 2020 में 27वें स्थान तक फिसल गया था. लेकिन साल 2022 में पंजाब की जनता ने बदलाव का फैसला किया और आम आदमी पार्टी की सरकार को जिम्मेदारी सौंपी. आज सिर्फ चार सालों के अंदर पंजाब ने वह कर दिखाया जिसकी कल्पना भी मुश्किल मानी जाती थी. नीति आयोग की शिक्षा गुणवत्ता रिपोर्ट 2026 के ताजा आंकड़ों के अनुसार पंजाब ने स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली जैसे राज्यों को पीछे छोड़ते हुए देश में पहला स्थान हासिल कर लिया है। 

ऐसे बना नंबर वन

यह सिर्फ एक रैंकिंग नहीं है. यह लाखों पंजाबी परिवारों के सपनों की जीत है. यह उन माता-पिता की जीत है जो चाहते थे कि उनका बच्चा गरीब हो या अमीर, उसे भी विश्वस्तरीय शिक्षा मिले. यह उन शिक्षकों की मेहनत की जीत है जिन्हें नई सोच और नए संसाधनों के साथ आगे बढ़ने का अवसर मिला. नीति आयोग की रिपोर्ट बताती है कि तीसरी कक्षा के भाषा स्तर में पंजाब के बच्चों ने 82 प्रतिशत दक्षता हासिल की है, जबकि केरल 75 प्रतिशत पर रहा. गणित में पंजाब ने 78 प्रतिशत अंक प्राप्त किए, जबकि केरल 70 प्रतिशत पर रहा. नौवीं कक्षा के गणित में पंजाब का प्रदर्शन 52 प्रतिशत रहा, जबकि केरल केवल 45 प्रतिशत तक पहुंच पाया. ये आंकड़े साफ बताते हैं कि पंजाब के सरकारी स्कूलों में बच्चों की बुनियादी शिक्षा पहले से कहीं अधिक मजबूत हुई है। 

99.9 प्रतिशत रहा परिणाम 
आज पंजाब के 99.9 प्रतिशत सरकारी स्कूलों में बिजली उपलब्ध है. 99 प्रतिशत स्कूलों में चालू कंप्यूटर मौजूद हैं. 80 प्रतिशत से अधिक स्कूलों में स्मार्ट क्लासरूम बनाए जा चुके हैं. स्मार्ट क्लासरूम की उपलब्धता में पंजाब 80.1 प्रतिशत पर है जबकि हरियाणा 50.3 प्रतिशत पर है. इंटरनेट सुविधा के मामले में पंजाब 88.9 प्रतिशत पर है जबकि हरियाणा 78.9 प्रतिशत पर है. यह अंतर सिर्फ आंकड़ों का नहीं बल्कि सोच और प्राथमिकताओं का अंतर है। 

गुरुग्राम का स्तर रहा सबसे खराब 
सबसे दिलचस्प तथ्य यह है कि हरियाणा के सबसे समृद्ध और साइबर सिटी शहर गुरुग्राम के सरकारी स्कूलों का प्रदर्शन भी पंजाब के सबसे निचले पायदान वाले जिलों से बहुत पीछे है. यह उस मॉडल की ताकत दिखाता है जिसने सरकारी स्कूलों को राजनीति का विषय नहीं बल्कि भविष्य निर्माण का मिशन बनाया. मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की अगुवाई में पंजाब ने शिक्षा को सरकारी फाइलों से निकालकर जन आंदोलन बनाया है. शिक्षकों को फिनलैंड और सिंगापुर जैसे देशों में प्रशिक्षण के लिए भेजा गया ताकि पंजाब के बच्चे भी दुनिया के बेस्ट एजुकेशन मॉडल का लाभ उठा सकें. यही कारण है कि सरकारी स्कूलों के 786 छात्रों ने जेईई मेन और 1284 छात्रों ने नीट जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाएं पास की है. यह उपलब्धि बताती है कि प्रतिभा सिर्फ निजी स्कूलों की संपत्ति नहीं होती, अवसर मिलने पर सरकारी स्कूलों के बच्चे भी देश का भविष्य बन सकते हैं। 

भर्त‍ियों का ग्राफ भी बढ़ा 
राज्य सरकार 13 हजार से अधिक नए शिक्षकों और स्टाफ की भर्ती कर चुकी है. 3 लाख छात्रों के लिए इंग्लिश एज कार्यक्रम चलाया जा रहा है ताकि पंजाब का बच्चा दुनिया के किसी भी मंच पर आत्मविश्वास के साथ खड़ा हो सके. राज्य में 118 अत्याधुनिक स्कूल ऑफ एमिनेंस स्थापित किए गए हैं जो आने वाले वर्षों में पंजाब की नई पहचान बनने जा रहे हैं. आज पंजाब के सरकारी स्कूलों में प्रवेश लेने वाले बच्चे सिर्फ किताबें नहीं पढ़ रहे, बल्कि आधुनिक लैब, डिजिटल तकनीक, स्मार्ट क्लासरूम और वैश्विक स्तर की शिक्षा का अनुभव प्राप्त कर रहे हैं. यह वही सपना है जो विकसित देशों जैसे अमेरिका, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया और जापान में सरकारी शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाता है. पंजाब उसी दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। 

इन जगहों पर अब भी हो रहा है बदलाव का इंतजार
दूसरी तरफ कई ऐसे राज्य हैं जहां वर्षों से एक ही सरकारें चल रही हैं, लेकिन सरकारी शिक्षा व्यवस्था अब भी अपेक्षित बदलाव का इंतजार कर रही है. हरियाणा में पिछले 12 वर्षों से बीजेपी सरकार है, लेकिन शिक्षा के कई मानकों पर पंजाब उससे काफी आगे निकल चुका है. पंजाब के गांवों में अब माता-पिता गर्व से कहते हैं कि उनका बच्चा सरकारी स्कूल में पढ़ता है. यह बदलाव किसी विज्ञापन या नारे से नहीं आया. यह बदलाव स्कूलों की नई इमारतों, स्मार्ट क्लासरूम, प्रशिक्षित शिक्षकों, बेहतर परिणामों और बच्चों के उज्जवल भविष्य के रूप में दिखाई दे रहा है. पंजाब ने साबित कर दिया है कि जब सरकार की प्राथमिकता शिक्षा होती है तो कुछ ही वर्षों में इतिहास बदला जा सकता है. जो राज्य कभी देश में 27वें स्थान पर था, वही आज देश में नंबर-1 बनकर खड़ा है. यह सिर्फ शिक्षा की कहानी नहीं, बल्कि नए पंजाब की कहानी है। 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

spot_imgspot_img

Popular

More like this
Related

गैस सिलेंडर उपभोक्ताओं के लिए अलर्ट, LPG को लेकर बदले नियम; 30 दिन का मिला समय

 नई दिल्ली देश में जून महीने की शुरुआत कई बड़े...

सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी, सहमति से सेक्स वर्क को लेकर पुलिस को दी नसीहत

 नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट की वेकेशन (अवकाश) बेंच ने महत्वपूर्ण...

राज्यपाल पटेल ने अपना जन्म दिवस बच्चों के साथ मनाया

राज्यपाल पटेल ने अपना जन्म दिवस बच्चों के साथ...

TMC में अनुशासनहीनता पर सख्ती, ममता ने दो नेताओं को पार्टी से निकाला

कलकत्ता पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली करारी शिकस्त के...