सस्ती और महंगी USB-C केबल में बड़ा फर्क, खरीदते समय रखें इन बातों का ध्यान

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फोन खरीदते समय लोग हजारों रुपये खर्च कर देते हैं, लेकिन जब चार्जिंग केबल खरीदने की बारी आती है, तो अक्सर सबसे सस्ती केबल उठा लेते हैं. कई लोगों को लगता है कि सभी USB Type-C केबल एक जैसी होती हैं. अगर फोन चार्ज हो रहा है, तो फिर महंगी केबल खरीदने की क्या जरूरत? यहीं सबसे बड़ी गलतफहमी है.

दिखने में भले ही दो USB Type-C केबल एक जैसी लगें, लेकिन उनके अंदर इस्तेमाल होने वाले तार, चिप, डेटा ट्रांसफर की कैपेसिटी और सुरक्षा फीचर अलग हो सकते हैं. यही वजह है कि एक केबल सिर्फ फोन चार्ज करती है, जबकि दूसरी उसी पोर्ट से लैपटॉप चार्ज करने, 4K मॉनिटर चलाने और तेज डेटा ट्रांसफर करने का काम भी कर सकती है.

आइए आसान भाषा में समझते हैं कि आखिर सस्ती और महंगी केबल में क्या फर्क होता है. सबसे बड़ा फर्क अंदर इस्तेमाल होने वाले तार का होता है. किसी भी केबल की असली पावर बाहर नहीं, बल्कि उसके अंदर होती है. अच्छी क्वालिटी की केबल में मोटे और बेहतर कॉपर वायर इस्तेमाल किए जाते हैं. इससे बिजली का नुकसान कम होता है और ज्यादा पावर सुरक्षित तरीके से पहुंचती है.

सस्ती केबल में कई बार पतले तार या कम गुणवत्ता वाली सामग्री इस्तेमाल की जाती है. ऐसी केबल सामान्य चार्जिंग तो कर सकती है, लेकिन ज्यादा पावर पर उसका प्रदर्शन अच्छा नहीं रहता. हर USB-C Cable Fast Charging नहीं करती यह सबसे बड़ा भ्रम है.

सिर्फ कनेक्टर नहीं, पावर देखें
USB Type-C सिर्फ कनेक्टर का नाम है. इसका मतलब यह नहीं कि हर Type-C केबल 100W या 240W फास्ट चार्जिंग को सपोर्ट करेगी. कुछ केबल सिर्फ 15W या 18W तक ही बनी होती हैं, जबकि कुछ 60W, 100W और नई USB-C केबल 240W तक की पावर संभाल सकती हैं.

यानी अगर आपके पास 100W का चार्जर है, लेकिन केबल 18W वाली है, तो आपको पूरी स्पीड नहीं मिलेगी. डेटा ट्रांसफर में भी बड़ा अंतर होता है. कई लोगों को लगता है कि हर केबल से डेटा एक जैसी स्पीड से ट्रांसफर होता है. असल में ऐसा नहीं है. कुछ USB-C केबल सिर्फ USB 2.0 स्पीड देती हैं, जो लगभग 480 Mbps तक होती है.

अगल काम के लिए अलग केबल
वहीं दूसरी केबल USB 3.2, USB4 या Thunderbolt को सपोर्ट करती हैं, जिनसे बड़ी फाइलें कई गुना तेजी से ट्रांसफर हो सकती हैं. अगर आप फोन से लैपटॉप में वीडियो कॉपी करते हैं, तो यह फर्क साफ दिखाई देगा. महंगी केबल में एक खास चिप भी हो सकती है. 100W या उससे ज्यादा पावर सपोर्ट करने वाली कई USB-C केबल में E-Marker Chip लगी होती है.

यह चिप चार्जर और डिवाइस को बताती है कि केबल कितनी पावर सुरक्षित तरीके से संभाल सकती है. अगर यह चिप नहीं होगी, तो हाई-पावर चार्जिंग संभव नहीं होगी या सीमित हो सकती है.

क्या महंगी केबल ज्यादा सुरक्षित होती है? कीमत हमेशा सुरक्षा की गारंटी नहीं होती. लेकिन अच्छी क्वालिटी की केबल में इंसुलेशन, कनेक्टर और हीट मैनेजमेंट बेहतर हो सकते हैं.

अगर केबल USB-IF जैसे मानकों के अनुसार बनाई गई है और जरूरी सुरक्षा परीक्षण पूरे करती है, तो उसके लंबे समय तक सुरक्षित चलने की संभावना ज्यादा होती है. सिर्फ महंगी होने की वजह से कोई केबल बेहतर नहीं हो जाती. उसकी गुणवत्ता और प्रमाणन ज्यादा मायने रखते हैं.

क्या महंगी केबल जल्दी खराब नहीं होती?
अच्छी केबल में अक्सर मजबूत ब्रेडेड कवर, बेहतर कनेक्टर और बार-बार मुड़ने पर टूटने से बचाने वाला डिजाइन होता है. इस वजह से उसकी उम्र सामान्य केबल से ज्यादा हो सकती है. हालांकि इसका मतलब यह नहीं कि हर महंगी केबल हमेशा लंबे समय तक चलेगी.

क्या फोन खराब हो सकता है?
यह सवाल सबसे ज्यादा पूछा जाता है. अगर आप किसी भरोसेमंद कंपनी की मानकों के अनुरूप बनी केबल इस्तेमाल कर रहे हैं, तो सिर्फ सस्ती या महंगी होने से फोन खराब नहीं होता.

लेकिन बहुत खराब गुणवत्ता वाली या नकली केबल में सुरक्षा का स्तर कम हो सकता है. ऐसी स्थिति में चार्जिंग की स्पीड, गर्म होना या केबल का जल्दी खराब होना जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं.

खरीदते समय किन बातों पर ध्यान दें?
केबल खरीदते समय सिर्फ कीमत न देखें. यह जरूर देखें कि वह कितने Watt तक चार्जिंग सपोर्ट करती है. अगर लैपटॉप भी चार्ज करना है, तो 100W या उससे ज्यादा क्षमता वाली केबल की जरूरत पड़ सकती है. अगर बड़ी फाइलें ट्रांसफर करते हैं, तो USB 3.2 या USB4 सपोर्ट वाली केबल चुनना बेहतर रहेगा. अगर सिर्फ फोन चार्ज करना है, तो बहुत महंगी केबल खरीदना हर बार जरूरी नहीं है.

₹100 और ₹1500 की केबल में फर्क सिर्फ कीमत का नहीं होता. अंतर इस बात का होता है कि वह कितनी पावर हैंडल कर सकती है, डेटा कितनी तेजी से सेंड कर सकती है, उसके अंदर किस तरह के तार और चिप लगी है और वह कितने समय तक भरोसेमंद तरीके से काम करेगी.

इसलिए अगली बार USB Type-C केबल खरीदते समय सिर्फ यह मत देखिए कि दोनों दिखने में एक जैसी हैं. कई बार अंदर का फर्क ही तय करता है कि आपको सही चार्जिंग, तेज डेटा ट्रांसफर और लंबे समय तक भरोसेमंद इस्तेमाल मिलेगा या नहीं.

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