महिला सशक्तीकरण के लिए बेहद सफल हो रहा योगी सरकार का ‘पावर मॉडल’

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लखनऊ

उत्तर प्रदेश के गांवों में बिजली का बिल अब सिर्फ घर का खर्च नहीं, बल्कि हजारों महिलाओं की कमाई का जरिया भी बन रहा है। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी करीब 16 हजार विद्युत सखियों ने अब तक 1,53,62,709 बिजली बिल जमा कराकर करीब 3,500 करोड़ रुपये का राजस्व संग्रह कराया है। इस काम के बदले महिलाओं के हाथ 45.4 करोड़ रुपये की कमाई आई है। योगी सरकार के इस मॉडल से एक तरफ ग्रामीण महिलाओं को अपने गांव और आसपास ही रोजगार मिल रहा है, वहीं दूसरी तरफ उपभोक्ताओं को बिजली बिल जमा करने के लिए दूर नहीं जाना पड़ रहा है।

उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन और उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन के सहयोग से चल रहे विद्युत सखी कार्यक्रम ने गांवों में रोजगार और जनसुविधा को एक साथ जोड़ दिया है। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को बिजली बिल कलेक्शन का काम सौंपकर उन्हें नियमित आय का अवसर दिया जा रहा है। प्रदेश में अब तक 31,681 महिलाओं को विद्युत सखी के रूप में नियुक्त किया गया है। इनमें 16 हजार से अधिक विद्युत सखियां ई-वॉलेट रिचार्ज कर चुकी हैं और बड़ी संख्या में महिलाएं सक्रिय रूप से बिल कलेक्शन कर रही हैं।

1.53 करोड़ बिल, 3,500 करोड़ का कलेक्शन

विद्युत सखियों के काम का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि गत पांच वर्षों में उनके माध्यम से अब तक प्रदेश में 1.53 करोड़ से अधिक बिजली बिल जमा कराए जा चुके हैं। इन बिलों के जरिए करीब 3,500 करोड़ रुपये बिजली विभाग के खाते में पहुंचे हैं। गांव-गांव में महिलाओं के जरिए खड़ा हुआ यह नेटवर्क बिजली विभाग के लिए राजस्व संग्रह का मजबूत माध्यम बन रहा है।

इस पूरी व्यवस्था का सीधा आर्थिक लाभ विद्युत सखियों को भी मिल रहा है। बिल कलेक्शन के बदले मिलने वाले कमीशन से विद्युत सखियां अब तक 45.4 करोड़ रुपये कमा चुकी हैं। गांव में रहते हुए आय का जरिया मिलने से स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं के लिए स्वरोजगार की नई राह खुली है।

घर की चौखट के पास मिला रोजगार

विद्युत सखी कार्यक्रम की खासियत यह है कि महिलाओं को रोजगार के लिए शहरों की ओर जाने या घर से बहुत दूर काम तलाशने की जरूरत नहीं पड़ रही। वे अपने गांव और आसपास के क्षेत्रों में उपभोक्ताओं के बिजली बिल जमा कराकर आय अर्जित कर रही हैं। इससे महिलाएं घरेलू जिम्मेदारियों के साथ आर्थिक गतिविधियों में भी अपनी भागीदारी बढ़ा पा रही हैं। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को पहले प्रशिक्षण दिया जाता है और इसके बाद उन्हें बिजली बिल जमा कराने की व्यवस्था से जोड़ा जाता है। विद्युत विभाग के ई-वॉलेट के माध्यम से वे उपभोक्ताओं का बिल जमा करती हैं। भुगतान होने के बाद उपभोक्ता को इसकी जानकारी मिल जाती है। इस तरह गांव में ही बिजली बिल जमा करने की आसान व्यवस्था तैयार हुई है।

उपभोक्ताओं का समय और किराया बचा

उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के मिशन निदेशक अरुण कुमार के मुताबिक, विद्युत सखी कार्यक्रम का बड़ा फायदा ग्रामीण क्षेत्रों में सामने आया है। पहले कई गांवों के उपभोक्ताओं को बिजली का बिल जमा करने के लिए अपने गांव से दूर बिजली विभाग के काउंटर या दूसरे भुगतान केंद्रों तक जाना पड़ता था। अब विद्युत सखियां गांव और आसपास ही यह सुविधा उपलब्ध करा रही हैं। इससे ग्रामीणों को सुविधा मिली है और विद्युत सखियों के लिए नियमित काम का दायरा भी तैयार हुआ है।

हर बिल के साथ महिलाओं की बढ़ रही आमदनी

विद्युत सखियों की आय बिल कलेक्शन से मिलने वाले कमीशन पर आधारित है। ग्रामीण क्षेत्रों में 2,000 रुपये तक का बिजली बिल जमा कराने पर विद्युत सखी को 20 रुपये और शहरी क्षेत्र में 12 रुपये कमीशन मिलता है। 45.4 करोड़ रुपये की कुल कमीशन आय यह बताती है कि बिजली बिल कलेक्शन अब हजारों ग्रामीण महिलाओं के लिए नियमित स्वरोजगार का माध्यम बन चुका है। इससे स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने के साथ गांवों में डिजिटल भुगतान और बिजली बिल जमा करने की व्यवस्था का भी विस्तार हो रहा है।

महिलाओं की कमाई और विभाग को राजस्व, दोनों को फायदा

विद्युत सखी मॉडल की खास बात यह है कि इससे तीन स्तर पर फायदा हो रहा है। महिलाओं को गांव में रोजगार मिल रहा है, उपभोक्ताओं को घर के पास बिल जमा करने की सुविधा मिल रही है और बिजली विभाग को ग्रामीण क्षेत्रों से राजस्व संग्रह करने का अतिरिक्त माध्यम मिला है। उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के जरिए स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को अलग-अलग आजीविका गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है। विद्युत सखी कार्यक्रम इसी दिशा में ऐसा मॉडल बनकर उभरा है, जिसमें सरकारी सेवा को महिलाओं की आजीविका से जोड़ा गया है।

गांव की महिलाएं बनीं बिजली विभाग और उपभोक्ता के बीच की कड़ी

विद्युत सखियां अब केवल बिजली बिल जमा करने वाली एजेंट नहीं, बल्कि ग्रामीण उपभोक्ताओं और बिजली विभाग के बीच स्थानीय स्तर की महत्वपूर्ण कड़ी बन रही हैं। गांव के भीतर ही सुविधा उपलब्ध होने के कारण उपभोक्ताओं के लिए समय पर बिल जमा करना आसान हुआ है। वहीं महिलाओं के लिए अपने ही क्षेत्र में कमाई करने का रास्ता बना है।
प्रदेश में 31 हजार से अधिक महिलाओं को विद्युत सखी के रूप में चिह्नित किया गया है। इनमें 16 हजार से अधिक विद्युत सखियां सक्रिय रूप से अपना काम कर रही हैं।

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