पहाड़ और बाढ़ भी नहीं रोक पाएंगे डाक, असम-हिमाचल में 150 ड्रोन रूट की तैयारी

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नई दिल्ली
 दूर-दराज के गांवों तक डाक पहुंचाने का तरीका बदलने जा रहा है। पहाड़ों और मुश्किल रास्तों के बीच अब डाक का इंतजार कम होगा। इंडिया पोस्ट ने दुर्गम इलाकों में डाक के बैग पहुंचाने के लिए ड्रोन का इस्तेमाल शुरू किया है। हिमाचल प्रदेश में 12 जून से मंडी-रेहड़धार मार्ग पर इसकी शुरुआत हुई और अब असम में भी पहली ड्रोन उड़ान के साथ इस व्यवस्था का विस्तार किया गया है। विभाग का लक्ष्य असम और हिमाचल प्रदेश में करीब 150 निर्धारित मार्गों पर ड्रोन आधारित डाक सेवा शुरू करना है।

असम में पहली बार ड्रोन से पहुंची डाक
'द ट्रिब्यून' की खबर के मुताबिक, असम में इस सप्ताह पहली बार डाक के बैग पहुंचाने के लिए ड्रोन उड़ाया गया। यह पहल उन इलाकों को ध्यान में रखकर की गई है, जहां खराब सड़क, लंबी दूरी, बाढ़ या कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण सड़क मार्ग से डाक पहुंचाने में ज्यादा समय लगता है। प्रस्तावित नेटवर्क में अकेले असम के करीब 40 मार्ग शामिल हैं। इसका मकसद दूर-दराज के क्षेत्रों में डाक सेवा को तेज और अधिक भरोसेमंद बनाना है।

स्काई एयर मोबिलिटी के साथ साझेदारी
इंडिया पोस्ट ने इस पहल के लिए गुरुग्राम की ड्रोन वितरण और तकनीकी कंपनी स्काई एयर मोबिलिटी के साथ साझेदारी की है। इसके तहत ड्रोन खाता डाकघरों से शाखा डाकघरों के बीच डाक के बैग पहुंचाएंगे। कंपनी के मुताबिक प्रस्तावित नेटवर्क हिमाचल प्रदेश और असम में करीब 150 मार्गों को जोड़ेगा। इनमें हिमाचल प्रदेश के 110 और असम के 40 स्थान शामिल हैं। ड्रोन 10 किलोग्राम तक वजन ले जा सकते हैं और अलग-अलग दूरी वाले मार्गों पर काम करने के लिए तैयार किए गए हैं।

दो घंटे का सफर अब करीब 7 मिनट में
इस तकनीक का असर हिमाचल प्रदेश के मंडी-रेहड़धार मार्ग पर साफ दिखाई दिया है। सरकारी जानकारी के मुताबिक, मंडी मुख्य डाकघर से रेहड़धार शाखा डाकघर की दूरी करीब 12 किलोमीटर है। पारंपरिक व्यवस्था में यहां पहुंचने में दो घंटे से ज्यादा समय लगता था। ड्रोन के जरिए यही डाक करीब 7 मिनट में पहुंचाई जा रही है। विभाग का कहना है कि इस व्यवस्था में वास्तविक समय में निगरानी की सुविधा भी है और इससे दुर्गम पहाड़ी इलाकों में डाक सेवा को मजबूत करने में मदद मिलेगी।

सड़क बंद तो भी पहुंच सकता है डाक का बैग
अधिकारियों के मुताबिक, इस पहल का विचार सरल है। जिन रास्तों पर सड़क से डाक पहुंचाने में ज्यादा समय लगता है, वहां ड्रोन तय मार्ग से सीधे डाक का बैग पहुंचा सकते हैं। इससे मुख्य सड़कों से दूर बसे समुदायों तक पहुंच बेहतर हो सकती है। खासकर असम में मौसमी बाढ़ और हिमाचल प्रदेश में बर्फबारी और पहाड़ी भूभाग के कारण प्रभावित होने वाले मार्गों के लिए यह व्यवस्था उपयोगी साबित हो सकती है। इसका मकसद केवल रफ्तार बढ़ाना नहीं, बल्कि डाक के बैग की आवाजाही को ज्यादा भरोसेमंद और आसानी से निगरानी योग्य बनाना भी है।

ड्रोन की उड़ान आसान, लेकिन खर्च बड़ी चुनौती
हालांकि, इस बदलाव के सामने कई चुनौतियां भी हैं। सबसे बड़ी चुनौती लागत की है। इंडिया पोस्ट इस सेवा के संचालन के लिए निजी कंपनी के साथ काम कर रहा है। ऐसे में हर ड्रोन उड़ान और हर डाक बैग को पहुंचाने की लागत का आकलन जरूरी होगा। ड्रोन के रखरखाव, कर्मचारियों, बैटरी, बीमा, तकनीक और खराब मौसम के कारण उड़ान प्रभावित होने जैसी लागत भी इसमें शामिल हो सकती है। इसलिए तेज डिलीवरी अपने आप सस्ती डिलीवरी नहीं होगी। पूरे तंत्र को लंबे समय तक चलाने की आर्थिक व्यवहार्यता भी इस प्रयोग की सफलता का अहम पैमाना होगी।

150 मार्गों पर होगी असली परीक्षा
करीब 150 मार्गों तक नेटवर्क के विस्तार के साथ कई सवाल भी महत्वपूर्ण हो जाएंगे। डाक के बैग की वास्तविक समय में निगरानी कैसे होगी? मार्ग से ड्रोन के भटकने की स्थिति में क्या व्यवस्था होगी? खराब मौसम में उड़ान कैसे संचालित होगी? आपात स्थिति में डाक के बैग की सुरक्षित बरामदगी कैसे होगी? इन सभी पहलुओं को अलग-अलग इलाकों और मौसम की परिस्थितियों में परखा जाना होगा। असम में 40 और हिमाचल प्रदेश में 110 स्थानों को जोड़ने की योजना के कारण यह केवल एक छोटा परीक्षण नहीं, बल्कि बड़े पैमाने पर डाक व्यवस्था को बदलने की कोशिश है।

दूर गांवों तक तेज कनेक्टिविटी की उम्मीद
इंडिया पोस्ट के लिए असम में पहली ड्रोन उड़ान इस प्रयोग के अगले चरण की शुरुआत है। इसके संभावित फायदे भी बड़े हैं। ड्रोन यात्रा का समय घटा सकते हैं। मुख्य सड़कों से दूर बसे समुदायों तक डाक पहुंच बेहतर हो सकती है। मुश्किल मार्गों पर पारंपरिक परिवहन पर निर्भरता भी कम हो सकती है। हिमाचल प्रदेश में शुरुआती अनुभव ने दिखाया है कि जहां सड़क से घंटों लगते हैं, वहां ड्रोन कुछ ही मिनटों में डाक पहुंचा सकता है। अगर असम और हिमाचल प्रदेश के प्रस्तावित मार्गों पर यह व्यवस्था सफल रहती है, तो दूर-दराज के लोगों के लिए डाक नेटवर्क से जुड़ना पहले से तेज और भरोसेमंद हो सकता है।

 

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