भारत-नेपाल सीमा पर बहुओं को बड़ी राहत, नागरिकता और दस्तावेजों की जटिलता दूर करने पर बनी सहमति

Date:

 क‍िशनगंज
 भारत और नेपाल के बीच सदियों पुराने 'रोटी-बेटी' के पारिवारिक व सामाजिक रिश्ते को सुदृढ़ बनाए रखने की दिशा में दोनों देशों के प्रशासन ने महत्वपूर्ण पहल की है। सीमा पार विवाह के बाद महिलाओं को नागरिकता और जरूरी पहचान दस्तावेजों को लेकर होने वाली जटिलताओं को दूर करने के लिए भारत-नेपाल समन्वय समिति की बैठक में विस्तृत सहमति बनी है।

बैठक में तय किया गया कि दोनों देशों में ब्याही गई बहुओं को आवश्यक वैध दस्तावेजों व साक्ष्यों के आधार पर नागरिकता प्रदान करने की प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाया जाएगा।

दोनों तरफ शिविर और डिजिटल साक्ष्यों से होगा समाधान
भारत के सीमावर्ती इलाकों में विशेष शिविर लगाकर नागरिकता के निर्धारित मापदंडों की जानकारी दी जा रही है और कागजी प्रक्रिया शुरू कराई जा रही है। वहीं, नेपाल सरकार द्वारा नागरिकता संबंधी नियमों को अद्यतन किए जाने के बाद अब डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर भारतीय बहुओं के लिए अंगीकृत नेपाली नागरिकता प्राप्त करने का मार्ग प्रशस्त हुआ है।

बैठक में नेपाल के झापा जिला के प्रमुख जिला अधिकारी शिवराम गेलल ने स्पष्ट किया कि नियमों के अनुसार पात्र महिलाओं के जरूरी साक्ष्य व प्रमाण उपलब्ध होते ही नागरिकता जारी करने की प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाया जाएगा।

नेपाल के वर्तमान कानून में नागरिकता के प्रावधान
कानूनी प्रावधानों के अनुसार, किसी नेपाली नागरिक से विवाह करने वाली विदेशी महिला अंगीकृत नेपाली नागरिकता के लिए आवेदन कर सकती है। इसके लिए आवेदक को निर्धारित प्राधिकारी के समक्ष निम्नलिखित दस्तावेज प्रस्तुत करने होते हैं:

    वैध विवाह निबंधन प्रमाणपत्र (भारत या नेपाल में पंजीकृत)

    पति का नेपाली नागरिकता प्रमाणपत्र, पहचान व आवासीय दस्तावेज

    महिला का मूल भारतीय पहचान/पासपोर्ट व जन्म प्रमाणपत्र

    भारतीय नागरिकता त्यागने का आधिकारिक प्रमाण

उल्लेखनीय है कि सात वर्ष की अनिवार्य प्रतीक्षा अवधि का प्रस्ताव वर्ष 2020 में चर्चा में आया था, लेकिन वर्तमान लागू व्यवस्था में वैवाहिक पंजीकरण और पूर्व नागरिकता त्याग के वैध साक्ष्य ही मुख्य आधार हैं।

सीमावर्ती परिवारों को मिलेगी बड़ी राहत
नेपाल के विराटनगर निवासी फिरोज बताते हैं कि दोनों देशों के बीच शादी के बाद सबसे बड़ी समस्या दस्तावेजों में त्रुटि या अनुपलब्धता की होती है, जिसे दूर करना बेहद जरूरी था।

अनुमंडल दंडाधिकारी (SDO) अनिकेत कुमार ने बताया कि दोनों देशों के नागरिकों के अभिलेखों में सुधार और नागरिकता से जुड़े विषयों पर समन्वय समिति में सकारात्मक विमर्श हुआ है। आवश्यक कागजात दुरुस्त होते ही नियमानुसार नागरिकता की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इस पहल से सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले हजारों परिवारों की वर्षों पुरानी परेशानी समाप्त होगी।

 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

spot_imgspot_img

Popular

More like this
Related

10 मिनट में 50 नकली स्टांप तैयार करता था राजेश, मुजफ्फरपुर में फर्जीवाड़े का खुलासा

पटना बिहार में फर्जी स्टांप टिकट के कारोबार का खुलासा...

HTET 2026 का रिजल्ट जारी, सिर्फ 16.57% अभ्यर्थी हुए पास

भिवानी हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड ने हरियाणा अध्यापक पात्रता परीक्षा...

पंजाब के शिक्षक का बड़ा सम्मान, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के हाथों मिलेगा पुरस्कार

चंडीगढ़. सरकारी विक्टोरिया गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल, पटियाला के शिक्षक...

संघर्ष, सक्रियता और संगठन के भरोसे का मिला बड़ा सम्मान, कासिम अंसारी को मिली जिले की कमान

मनेन्द्रगढ़/एमसीबी भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) ने संगठन को नई...