कोटपूतली-किशनगढ़ एक्सप्रेस-वे के लिए 1,022 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित होगी, 13,480 परिवार होंगे प्रभावित

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जयपुर
 कोटपूतली-किशनगढ़ ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे के निर्माण के लिए जयपुर जिले में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया तेज करने की तैयारी है। जिले में 95.4 किमी लंबे इस ‘एक्सेस कंट्रोल्ड एक्सप्रेस-वे’ के लिए चौमूं, किशनगढ़-रेनवाल, जोबनेर, फुलेरा और दूदू तहसील के 50 गांवों के 13,480 परिवार प्रभावित होंगे। परियोजना के लिए 2,274 खसरों की 1,022 हेक्टेयर निजी और 50 हेक्टेयर सरकारी भूमि ली जाएगी। निर्माण की जद में आने से 11,108 पेड़ों को नुकसान होगा और 20 व्यावसायिक इकाइयां भी प्रभावित होंगी। इनमें अनुसूचित जाति एवं जनजाति के 1,743 परिवार शामिल हैं। सार्वजनिक निर्माण विभाग ने जयपुर जिले के लिए परियोजना की अंतिम सामाजिक समाघात रिपोर्ट जारी कर दी है।

209.5 किमी का होगा पूरा एक्सप्रेस-वे, 90 मीटर चौड़ा राइट-ऑफ-वे
कोटपूतली-किशनगढ़ ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे की कुल लंबाई 209.5 किमी होगी। यह एक्सेस कंट्रोल्ड एक्सप्रेस-वे होगा, यानी इस पर अनधिकृत प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा। जयपुर जिले में इसकी लंबाई 95.4 किमी होगी। एक्सप्रेस-वे 90 मीटर राइट-ऑफ-वे में बनाया जाएगा और इसकी एम्बैंकमेंट ऊंचाई 2.5 से 13 मीटर तक रखी जाएगी।

इन तहसीलों से गुजरेगा एक्सप्रेस-वे
पूरा एक्सप्रेस-वे कोटपूतली, पाटन, नीम का थाना, खंडेला, श्रीमाधोपुर, रींगस, चौमूं, किशनगढ़-रेनवाल, जोबनेर, फुलेरा, दूदू, रूपनगढ़ और किशनगढ़ तहसीलों से होकर गुजरेगा। यह किशनगढ़ के पश्चिम से शुरू होकर कोटपूतली के पूर्व में समाप्त होगा।

शिवनगर, उड़गवार, भूतेड़ा, आष्ठीकलां, हस्तेड़ा, विजय नगर, नोपा का बास, लालासर, जुनसिया, बाघावास, धोल्याकावास, हरसोली, सुन्दरपुरा, रामजीपुरा कलां, रामजीपुरा खर्द, पचकोड़िया, श्योसिंहपुरा, सुखालपुरा, मूण्डोती, भोजुरा खुर्द, दीपपुरा, चारणवास, आईदानकावास, डयोड़ी, शिम्भूपुरा, जोरपुरा, प्रतापपुरा, जगमालपुरा, गुमानपुरा, माजीपुरा, सुरसिंहपुरा, माल्यावास, रोजड़ी, सामोताकावास, खेड़ीराम, कुड़ियों की ढाणी, आकोदा, रामनगर, चारणवास, चैनपुरा, नरायना, नारदपुरा, भरतोलाव, जैकमपुरा, नानण, हटुपुरा, श्योपुरा, साखून, लदेगा और सिरोहीकलां शामिल हैं।

एनएच-48 पर बढ़ते दबाव को कम करने का तर्क
रिपोर्ट में कहा गया है कि ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे बनने से सुगम, तेज और सुरक्षित यातायात संचालन के साथ क्षेत्रीय आर्थिक विकास, व्यापार-वाणिज्य और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। राज्यों के बीच बढ़ती व्यावसायिक एवं औद्योगिक गतिविधियों के कारण एनएच-48 पर यातायात का दबाव लगातार बढ़ रहा है। वाहनों की बढ़ती संख्या, सड़क की सीमित चौड़ाई, दुर्घटनाओं में वृद्धि और पर्यावरण प्रदूषण जैसी समस्याओं को देखते हुए नए ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे की आवश्यकता बताई गई है।

घर-संरचना खोने वाले परिवारों के मुआवजे का प्रावधान
रिपोर्ट में कहा गया है कि एक्सप्रेस-वे निर्माण के कारण जिन परिवारों के घर या अन्य संरचनाएं प्रभावित होंगी, परियोजना अधिकारियों को उनका सत्यापन और मूल्यांकन करना होगा। रिपोर्ट में मुआवजा भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 2013 के प्रावधानों के आधार पर निर्धारित करने के लिए कहा गया है। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़े वर्गों के परिवारों के लिए विशेष पुनर्वास पैकेज तैयार करने की सिफारिश की गई है। रिपोर्ट में सिफारिश की गई है कि कटने वाले हर पेड़ की एवज में कम से कम तीन पेड़ लगाए जाएं।

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