विकसित भारत की अंतरिक्ष दृष्टि पर मेपकॉस्ट में विशेष व्याख्यान

Date:

भोपाल 

राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस के अवसर पर मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (मेपकॉस्ट) द्वारा एक विशेष व्याख्यान कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस वर्ष की मुख्य थीम “विकसित भारत की ओर: नवाचार, सहयोग और वैश्विक अंतरिक्ष नेतृत्व की प्रेरणा” पर आधारित इस कार्यक्रम में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के प्रमुख वैज्ञानिक  स्वप्निल त्रिवेदी ने भारत की अंतरिक्ष यात्रा और भविष्य की योजनाओं पर अपने विचार व्यक्त किए। व्याख्यान के दौरान  त्रिवेदी ने "आर्यभट्ट से गगनयान तक" के सफर को रेखांकित करते हुए बताया कि इसरो ने उपग्रह निर्माण, प्रक्षेपण यान, पृथ्वी अवलोकन तथा चंद्र एवं सौर मिशनों में सफलता प्राप्त कर अब मानव अंतरिक्ष उड़ान की दिशा में महत्वपूर्ण और आत्मनिर्भर क्षमताएं विकसित कर ली हैं।

चंद्रयान-3 केवल चंद्रमा पर उतरने का मिशन नही, बल्कि वास्तविक विज्ञान निष्पादित करने का मिशन

चंद्रयान-3 मिशन के वैज्ञानिक निष्कर्षों की जानकारी साझा करते हुए वैज्ञानिक  त्रिवेदी ने बताया कि LIBS उपकरण ने चंद्रमा की सतह पर सल्फर की उपस्थिति की प्रामाणिक पुष्टि की है, जबकि APXS ने विभिन्न रासायनिक तत्वों का विस्तृत अध्ययन किया। इसके साथ ही RAMBHA-LP द्वारा प्लाज्मा वातावरण तथा ILSA द्वारा लैंडिंग क्षेत्र की भूकंपीय गतिविधियों का गहन अध्ययन किया गया। उन्होंने रेखांकित किया कि चंद्रयान-3 केवल चंद्रमा पर उतरने का मिशन नहीं था, बल्कि वहां वास्तविक विज्ञान निष्पादित करने का मिशन था।

वैज्ञानिक  त्रिवेदी ने गगनयान मिशन पर चर्चा करते हुए मानव जीवन की सुरक्षा को सर्वोपरि बताया। क्रू मॉड्यूल, जीवन-समर्थन प्रणाली, क्रू एस्केप सिस्टम, पैराशूट और तापीय सुरक्षा प्रणालियों के कड़े परीक्षणों का उल्लेख करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि मानव अंतरिक्ष उड़ान का सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न केवल अंतरिक्ष तक पहुंचना नहीं, बल्कि अंतरिक्ष यात्रियों को सुरक्षित पृथ्वी पर वापस लाना है।

भविष्य की योजनाओं पर बात करते हुए वैज्ञानिक  त्रिवेदी ने बताया कि भारत अब चंद्रमा से आगे बढ़कर शुक्र और मंगल अन्वेषण, भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन की स्थापना, अंतरिक्ष डॉकिंग तथा सर्विसिंग की दिशा में तेजी से अग्रसर है। उन्होंने नासा-इसरो (NASA-ISRO) के बीच अंतरराष्ट्रीय सहयोग, अंतरिक्ष मलबे से निपटने की आवश्यकता और टिकाऊ अंतरिक्ष गतिविधियों को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।

विशेष आकर्षण के रूप में "अंतरिक्ष और हमारा भोपाल" विषय पर प्रकाश डालते हुए वैज्ञानिक  त्रिवेदी ने स्पष्ट किया कि उपग्रह तकनीक का उपयोग केवल दूरस्थ ग्रहों तक सीमित नहीं है। उपग्रहों के माध्यम से भोपाल की ऊपरी झील, शहरी विस्तार, हरियाली और बदलते भू-उपयोग का अध्ययन कर शहर के सुव्यवस्थित और बेहतर विकास की रूपरेखा तैयार की जा सकती है।

वैज्ञानिक  त्रिवेदी ने अंत में भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम को विकसित भारत की वैज्ञानिक, तकनीकी और सामाजिक प्रगति से जोड़ते हुए कहा कि अंतरिक्ष विज्ञान का अंतिम उद्देश्य केवल नई सीमाओं तक पहुंचना नहीं, बल्कि अंतरिक्ष से प्राप्त ज्ञान और तकनीक का उपयोग पृथ्वी तथा समाज के बेहतर भविष्य के लिए करना है।

 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

spot_imgspot_img

Popular

More like this
Related

Aaj Ka Rashifal 25 August: सूर्य देव की विशेष कृपा से इन राशियों का होगा भाग्योदय

मेष राशि- मान-सम्मान पर ठेस पहुंच सकती है थोड़ा सा...

सीएम योगी ने महिला को गाय देने और दिव्यांग की भूमि से अवैध कब्जा हटाने का दिया निर्देश

लखनऊ सीतापुर के गुरुदेव नगर हरगांव की रहने वाली पूनम...

एसएफआईसी डेटा एनालिटिक्स के आधार पर की कड़ी कार्रवाई

भोपाल  राज्य में शासकीय निधियों के संरक्षण और वित्तीय पारदर्शिता...

रायबरेली को 879 करोड़ रुपये की विकास योजनाओं की सौगात देंगे मुख्यमंत्री

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सोमवार को रायबरेली के दौरे पर...