राखियों की चमक से गुलजार नरपतगंज बाजार, भारत-नेपाल रिश्तों की दिखी खूबसूरत झलक

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 फुलकाहा (अररिया)
भाई-बहन के अटूट प्रेम, स्नेह और विश्वास का पावन पर्व रक्षाबंधन जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है, वैसे-वैसे नरपतगंज क्षेत्र के बाजारों में रौनक बढ़ने लगी है।

बाजारों में रंग-बिरंगी, डिजाइनर, बच्चों की पसंदीदा कार्टून राखियों से लेकर पारंपरिक और आकर्षक राखियों की बिक्री शुरू हो गई है। दुकानदारों ने भी पर्व को लेकर विशेष तैयारियां की हैं।

रक्षाबंधन केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति में भाई-बहन के पवित्र रिश्ते का प्रतीक है। इस दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर उनकी सुख-समृद्धि, दीर्घायु और उज्ज्वल भविष्य की कामना करती हैं। बदले में भाई अपनी बहन की रक्षा और जीवनभर उसके साथ खड़े रहने का संकल्प लेते हैं।

इतिहास और परंपराओं से जुड़ा है रक्षाबंधन
रक्षाबंधन का इतिहास भारतीय पौराणिक कथाओं और ऐतिहासिक प्रसंगों से जुड़ा रहा है। मान्यता है कि प्राचीन काल से ही रक्षा सूत्र बांधने की परंपरा समाज में प्रचलित रही है। यह केवल भाई-बहन तक सीमित नहीं था, बल्कि रक्षा, विश्वास और शुभकामनाओं का प्रतीक माना जाता था।

पौराणिक मान्यताओं में भगवान श्रीकृष्ण और द्रौपदी के प्रसंग का उल्लेख मिलता है, जबकि ऐतिहासिक परंपराओं में भी रक्षा सूत्र के माध्यम से संबंधों को मजबूत करने की अनेक कथाएं प्रचलित हैं।

यही कारण है कि समय के साथ रक्षाबंधन भारतीय समाज में प्रेम और सुरक्षा के एक बड़े सांस्कृतिक पर्व के रूप में स्थापित हो गया।

नरपतगंज के बाजारों में राखियों की चहल-पहल
रक्षाबंधन को लेकर नरपतगंज क्षेत्र के प्रमुख बाजारों में इन दिनों चहल-पहल शुरू हो गई है। दुकानों पर तरह-तरह की राखियां सजाई गई हैं। बच्चों के लिए कार्टून और आकर्षक डिजाइन वाली राखियां, युवाओं के लिए स्टाइलिश राखियां तथा पारंपरिक पसंद रखने वालों के लिए साधारण और धार्मिक डिजाइन वाली राखियां बाजार में उपलब्ध हैं।
दुकानदारों का कहना है कि त्योहार के करीब आने के साथ बिक्री में और तेजी आने की उम्मीद है।

भारत-नेपाल के रिश्तों की भी दिखती है खूबसूरत झलक
सीमावर्ती नरपतगंज क्षेत्र में रक्षाबंधन का पर्व केवल पारिवारिक उत्सव नहीं, बल्कि भारत और नेपाल के सदियों पुराने सामाजिक एवं सांस्कृतिक संबंधों की भी सुंदर झलक प्रस्तुत करता है। भारत-नेपाल सीमा के दोनों ओर रहने वाले लोगों के बीच लंबे समय से रोटी-बेटी का संबंध कायम है।

यही दृश्य भारत-नेपाल के बीच केवल राजनीतिक या भौगोलिक संबंधों से कहीं आगे बढ़कर दिलों के रिश्ते की कहानी कहता है। सीमाएं भले ही दोनों देशों को अलग करती हों, लेकिन परिवार, संस्कृति, भाषा, परंपराएं और रिश्ते उन्हें मजबूती से जोड़े हुए हैं।

एक ओर बाजारों में रंग-बिरंगी राखियों की चमक है, तो दूसरी ओर भाई-बहन के प्यार की चमक। एक ओर सीमाएं हैं, तो दूसरी ओर रिश्तों की ऐसी डोर, जिसे कोई सीमा बांध नहीं सकती।

रक्षाबंधन का संदेश साफ है
रिश्तों की रक्षा हो, प्रेम बना रहे और भाई-बहन का यह अटूट बंधन हर वर्ष और मजबूत होता रहे।

 

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