नेपाल में बाढ़ का असर मुजफ्फरपुर तक, 19 पुल टूटे और 40 किमी सड़क बह गई

Date:

मुजफ्फरपुर.

नेपाल में भोटेकोशी नदी ने बुधवार सुबह अचानक ऐसा रौद्र रूप दिखाया कि सीमावर्ती क्षेत्र में कुछ ही घंटों में तबाही का मंजर दिखने लगा। तेज बहाव में पुल और सड़कें क्षतिग्रस्त हो गईं, रसुवागढ़ी सीमा शुल्क कार्यालय के 14 कर्मचारी लापता हो गए और कई इलाकों का संपर्क प्रभावित हुआ।

बाढ़ के असामान्य रूप से बढ़े जलस्तर के कारणों को लेकर अब नेपाल सरकार ने चीन के साथ समन्वय शुरू कर दिया है।

19 पुल और 40 किमी सड़क क्षतिग्रस्त
भोटेकोशी में आई बाढ़ का सबसे बड़ा असर बुनियादी ढांचे पर पड़ा है। त्रिशूली नदी पर बने 19 पुल क्षतिग्रस्त हो गए हैं। करीब 40 किलोमीटर सड़क को भी नुकसान पहुंचा है। सड़क विभाग की टीमें क्षतिग्रस्त हिस्सों का आकलन करने में जुटी हैं। प्रभावित मार्गों पर मरम्मत का काम भी शुरू कर दिया गया है। पुलों और सड़कों के टूटने से कई क्षेत्रों में आवागमन प्रभावित हुआ है।

सीमा शुल्क कार्यालय में मची अफरातफरी
रसुवागढ़ी सीमा शुल्क कार्यालय के 14 कर्मचारी बाढ़ के बाद लापता बताए गए हैं। गृह मंत्रालय के अनुसार, कार्यालय में 36 स्थायी कर्मचारी कार्यरत थे। इनमें 11 लापता हैं, जबकि 25 से संपर्क हो गया है। चार संविदा एवं दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों में से तीन लापता हैं और एक से संपर्क हो चुका है। लापता कर्मचारियों की तलाश जारी है।

12 हेलीकाप्टर राहत-बचाव में
बाढ़ प्रभावित लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए नेपाल सरकार ने 12 हेलीकाप्टर लगाए हैं। इनमें नेपाली सेना के चार और निजी क्षेत्र के आठ हेलीकाप्टर शामिल हैं। धादिङ, नुवाकोट, रसुवा और चितवन के सुरक्षा निकायों को भी राहत एवं बचाव अभियान में लगाया गया है।

तिब्बत से आया पानी तो नहीं?
बाढ़ की भयावहता के बीच सबसे बड़ा सवाल इसके अचानक आने को लेकर है। नेपाल के मौसम विभाग के अनुसार रसुवा क्षेत्र में मंगलवार शाम से अत्यधिक भारी बारिश नहीं हुई थी। ऐसे में सामान्य बारिश के बावजूद भोटेकोशी का जलस्तर अचानक इतना बढ़ने की वजह तलाशने में प्रशासन जुटा है।

सैटेलाइट तस्वीरों से होगी जांच
नेपाल राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण तथा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार बाढ़ का वास्तविक कारण अभी स्पष्ट नहीं है। आशंका है कि नदी का जलग्रहण क्षेत्र चीन के तिब्बत तक फैला होने के कारण वहां हिमस्खलन, हिमताल फटने या किसी अन्य प्राकृतिक अथवा संरचनात्मक घटना से अचानक पानी बढ़ा हो। नेपाल सरकार सैटेलाइट तस्वीरों के माध्यम से इसकी जांच कराएगी। चीन और अंतरराष्ट्रीय एकीकृत पर्वतीय विकास केंद्र (इसिमोड) से भी सहयोग लिया जा रहा है।

कारण स्पष्ट होने तक किसी निष्कर्ष से बचने की सलाह
प्राधिकरण की उपसचिव गोमादेवी चेम्जोंग ने कहा कि बाढ़ का कारण अभी निश्चित नहीं है। चीन के भू-भाग से भी इसका संबंध हो सकता है। इसलिए जांच पूरी होने तक किसी एक कारण को जिम्मेदार बताना उचित नहीं होगा। मौसम विज्ञानी मिन कुमार अर्याल ने भी तिब्बत क्षेत्र में हिमस्खलन या हिमताल फटने की संभावना से इनकार नहीं किया है।

 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

spot_imgspot_img

Popular

More like this
Related

‘ग्वालियरवासियों को भगवान भरोसे छोड़ दिया’, सड़क परियोजना रिपोर्ट पर हाईकोर्ट ने निगम को फटकारा

 ग्वालियर  ग्वालियर की बदहाल सड़कों को लेकर दायर जनहित याचिका...

ग्लेशियर फटने से नेपाल में जलप्रलय, 1000 लोग बाढ़ में बहे; कई हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स प्रभावित

रसुवा हिमालयी क्षेत्र में एक बार फिर ग्लेशियर और बाढ़...

महतारी वंदन से आरभ हुआ सफ़र- ड्रोन दीदी, ई-रिक्शा दीदी और

रायपुर छत्तीसगढ़ में महिला सशक्तिकरण अब केवल एक नारा नहीं,...