भोपाल
मध्य प्रदेश में खेल सुविधाओं को लेकर बड़ा बदलाव होने जा रहा है. अब हर जिले में एक जैसी सुविधाएं देने के बजाय इलाके की खेल के हिसाब से पैसा लगाया जाएगा. यानी पहले यह पता लगाया जाएगा कि किस इलाके में किस खेल के अच्छे खिलाड़ी हैं और वहां की सुविधाओं में क्या कमी है. इसी बेस पर कोचिंग, ट्रेनिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाया जाएगा. प्रदेश के 52 खेलो इंडिया सेंटर इस योजना की पहली कड़ी होंगे और जरूरत पड़ने पर नए सेंटर भी खोले जाएंगे।
5 साल में 1,965 करोड़ खर्च
इस योजना पर अगले 5 साल में 1,965 करोड़ रुपये खर्च होंगे. इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए केंद्र सरकार 60% और राज्य सरकार 40% राशि देगी. मध्य प्रदेश का हिस्सा 565 करोड़ रुपये है. खेल मंत्री विश्वास सारंग के मुताबिक, प्रदेश के 230 विधानसभा क्षेत्रों में अभी 90 स्टेडियम हैं और 140 से ज्यादा नए स्टेडियम बनाए जाएंगे. हर स्टेडियम पर करीब 7 करोड़ रुपये खर्च होंगे. गौरतलब है कि केंद्र की 2026-31 की नई खेलो इंडिया योजना पर देशभर में 29,054 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
ये 6 बड़े बदलाव होंगे
नई व्यवस्था में सबसे पहले टैलेंट मैपिंग होगी, यानी प्रदेश में टैलेंट क्लस्टर बनाकर देखा जाएगा कि कहां किस खेल के खिलाड़ी हैं. दूसरा, मेडल मैपिंग के तहत ओलंपिक, एशियन और कॉमनवेल्थ गेम्स से जुड़े खेलों में मेडल की संभावना वाली सुविधाएं बनेंगी और बड़े खेल परिसर अपग्रेड होंगे. तीसरा, स्कूलों से प्रतिभा खोजकर खेलो इंडिया सेंटर, साई ट्रेनिंग सेंटर और अकादमियों तक पहुंचाया जाएगा, जिसमें भोपाल अहम कड़ी बनेगा. चौथा, एलीट लेवल तक नहीं पहुंचे खिलाड़ियों को E-KIA (इमर्जिंग खेलो इंडिया एथलीट) से जोड़ा जाएगा।
5वां खिलाड़ियों को डाइट, रहना, किट, पढ़ाई और मेडिकल सपोर्ट के साथ डॉक्टर, फिजियो, साइकोलॉजिस्ट और न्यूट्रिशनिस्ट जैसे एक्सपर्ट की टीम मिलेगी. छठा, एआई-वीडियो से टैलेंट स्काउटिंग होगी और वेयरेबल डिवाइस से खिलाड़ियों का प्रदर्शन ट्रैक किया जाएगा. इसके साथ ही स्कूल से यूनिवर्सिटी लेवल तक मुकाबले बढ़ाए जाएंगे।

