नारनौंद.
कभी पशु प्रतियोगिताओं के रैंप पर अपनी कद-काठी से लोगों का ध्यान खींचने वाली और फिर 35 किलो 669 ग्राम दूध देकर विश्व स्तर पर हरियाणा की मुर्रा नस्ल का नाम चमकाने वाली ‘राधा’ अब नहीं रही। शनिवार को उसकी मौत की खबर सिंघवा खास पहुंची तो उसे विश्व चैंपियन बनाने वाले पशुपालक ईश्वर सिंह के लिए यह किसी गहरे सदमे से कम नहीं थी।
करीब एक माह पहले ही उन्होंने राधा को उत्तर प्रदेश के गोरखपुर निवासी पशुपालक सुनील यादव को उपहार में दिया था, लेकिन उससे उनका लगाव कम नहीं हुआ था। वह प्रतिदिन फोन कर राधा की सेहत और खानपान की जानकारी लेते थे। शुक्रवार को राधा ने एक स्वस्थ कटडी को जन्म दिया था। पशुपालक के अनुसार इसके बाद रात तक स्थिति सामान्य थी, लेकिन शनिवार सुबह वह नहीं उठी।
मुर्रा नस्ल को विश्व स्तर पर अलग पहचान दिलाई
चिकित्सक को बुलाकर जांच कराई गई। पशुपालक के अनुसार बीमारी के कारण उसकी मौत होने की आशंका जताई गई है। राधा की मौत के साथ ही पशुपालन के क्षेत्र में सिंघवा खास की उस उपलब्धि का एक यादगार अध्याय भी समाप्त हो गया, जिसने मुर्रा नस्ल को विश्व स्तर पर अलग पहचान दिलाई थी। मुर्रा नस्ल की बेहतरीन भैंसों के लिए पहचान रखने वाले सिंघवा खास के ईश्वर सिंह लंबे समय से पशुपालन कर रहे हैं। उनकी धन्नो और हेमा मालिनी नाम की भैंसें भी पशु प्रतियोगिताओं में पहचान बना चुकी हैं। इसके बाद उन्होंने दूध उत्पादन का नया कीर्तिमान बनाने के लिए राधा को तैयार किया। ईश्वर सिंह के अनुसार उन्होंने इंटरनेट पर अधिक दूध देने वाली भैंसों के रिकार्ड की जानकारी जुटाई। इससे पहले 33 किलो 800 ग्राम दूध का रिकार्ड कैथल के बूढा खेडा के पशुपालक नरेश की भैंस रेशमा के नाम होने की जानकारी मिली थी। इसके बाद राधा ने 35 किलो 669 ग्राम दूध देकर कीर्तिमान बनाया।
चार लाख में खरीदी, चैंपियन बनाने के लिए तैयार की खास दिनचर्या
ईश्वर सिंह ने बताया कि राधा को पिछले वर्ष फतेहाबाद के गांव कन्हेडी से चार लाख रुपये में खरीदा था। उसके लिए साफ गद्दे बिछाए जाते थे। दिन में तीन बार स्नान, महीने में एक बार कटिंग और प्रतिदिन सरसों के तेल से मालिश की जाती थी। गर्मी में कूलर की व्यवस्था रहती थी। आहार में आठ किलो चने, चार किलो बिनोला, दो किलो गेहूं का दलिया और दो किलो गुड सहित विशेष फीड दी जाती थी। राधा को प्रधानमंत्री भी सम्मानित कर चुके थे।
खबर मिली तो घर में नहीं जला चूल्हा: ईश्वर
ईश्वर सिंह ने बताया कि राधा को उपहार में देने के बाद भी वह लगातार उसकी जानकारी लेते थे। शनिवार को उसकी मौत की सूचना मिली तो पूरा परिवार दुखी हो गया और घर में चूल्हा तक नहीं जला। उन्होंने कहा कि राधा उनके लिए केवल पशु नहीं थी, बल्कि वर्षों की मेहनत और पशुपालन से जुडे सपने की पहचान बन चुकी थी।
पशु पालकों में शोक, राधा की उपलब्धि बनी रहेगी याद
राधा की मौत की सूचना मिलने के बाद क्षेत्र के पशुपालकों ने भी दुख जताया। पशुपालकों का कहना है कि 35.669 किलो दूध देकर राधा ने अकेले अपने पालक का ही नहीं, बल्कि हरियाणा की मुर्रा नस्ल का नाम विश्व स्तर पर पहुंचाया। उसकी उपलब्धि पशुपालकों को बेहतर नस्ल और वैज्ञानिक तरीके से पशुपालन के लिए प्रेरित करती रहेगी।

