पूजा सिंघल दंपती ने कोर्ट के निर्देश पर सरेंडर किए पासपोर्ट, विदेश यात्रा से लौटने के बाद कार्रवाई

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रांची
ईडी कोर्ट में मनी लांड्रिंग में आरोपित आइएएस पूजा सिंघल और उनके पति अभिषेक झा ने बुधवार को अपना पासपोर्ट जमा कर दिया। दोनों हाल ही में सिंगापुर से लौटे हैं, जहां वे अपनी बेटी के इलाज के लिए गए थे।

इससे पहले पूजा सिंघल और अभिषेक झा ने अदालत में याचिका दाखिल कर पासपोर्ट रिलीज करने तथा विदेश यात्रा की अनुमति मांगी थी। याचिका में बताया गया था कि उनकी बेटी गंभीर न्यूरोलाजिकल बीमारी से पीड़ित है और उसके इलाज के लिए सिंगापुर जाना आवश्यक है।

अदालत ने उन्हें विदेश यात्रा की अनुमति देते हुए शर्त रखी थी कि वे 31 मई तक रांची लौट आएंगे और वापसी के एक सप्ताह के भीतर अपना पासपोर्ट अदालत में जमा करेंगे। अदालत के आदेश का अनुपालन करते हुए दोनों बुधवार को अपना पासपोर्ट जमा कर दिया।

चिल्ड्रेन कोर्ट से हत्या के मामले में नाबालिग बरी
चिल्ड्रेन कोर्ट ने हत्या के मामले के नाबालिग आरोपित को बुधवार को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपित के खिलाफ आरोपों को संदेह से परे साबित करने में सफल नहीं हो सका। इसलिए उसे संदेह का लाभ दिया जाता है।

घटना को लेकर युवती के पिता ने 23 मई 2024 को लापुंग थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। आरोप लगाया गया था कि बेटी नाबालिग लड़के से बातचीत करती थी। 15 मई 2024 को घर से सहेली के मिलने के निकली, लेकिन वापस नहीं आई।

पिता ने हत्या करने का आरोप लगाते हुए नाबालिग के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। घटना के समय उसकी उम्र करीब 17 वर्ष पाई गई, जिसके कारण उसका मामला अलग कर चिल्ड्रेन कोर्ट में चलाया गया।

बैटरी चोरी के मामले में पांच आरोपित बरी
न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी मयंक मलियाज की अदालत ने टेलीकाम टावर से बैटरी चोरी के मामले में लगभग दो वर्ष तक चली सुनवाई के बाद पांच आरोपितों को बरी कर दिया है। अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष एक भी गवाह पेश नहीं कर सका।

मामले से शहनवाज, साजिद अंसारी, रिजवान, आर्यन खान तथा नायर आलम को बरी किया गया। मामला नामकुम (खरसीदाग ओपी) थाना से जुड़ा था। प्राथमिकी के अनुसार 26 जुलाई 2024 की रात करीब 2:30 बजे एक टेलीकाम टावर के शेल्टर का ताला तोड़ कर वहां रखी 48 बैटरियों में से 24 एक्साइड बैटरियां अज्ञात चोरों द्वारा चोरी कर ली गई थी।

सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष को गवाह प्रस्तुत करने के लिए कई अवसर दिए गए। अदालत ने समन, वारंट, एसएसपी को पत्र और अंतिम अवसर तक प्रदान किया, लेकिन इसके बाद एक भी गवाह अदालत में उपस्थित नहीं हुआ। अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि यह नो एविडेंस का मामला है।

दहेज उत्पीड़न मामले में पुनरीक्षण याचिका खारिज
न्यायायुक्त की अदालत ने वैवाहिक प्रताड़ना और दहेज उत्पीड़न के मामले में पत्नी की ओर से दाखिल पुनरीक्षण याचिका को खारिज कर दिया। अदालत ने निचली अदालत के उस आदेश को सही ठहराया, जिसमें केवल पति सुखराम हजाम के संज्ञान लिया गया था।

यह मामला शिकायतवाद से जुड़ा है। मामले में शिकायतकर्ता सुरेखा प्रमाणिक ने आरोप लगाया था कि पति के साथ-साथ सास-ससुर एवं अन्य ससुराल वालों ने भी उसे प्रताड़ित किया और पांच लाख रुपये की मांग की।

शिकायतकर्ता ने दलील दी थी कि जांच के दौरान गवाहों ने सभी आरोपितों की भूमिका की पुष्टि की है। इसलिए उनके खिलाफ भी संज्ञान लिया जाना चाहिए था। लेकिन अदालत ने याचिका खारिज कर दी।

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