चेहरे, बाल और नाखूनों में दिखें ये बदलाव तो रहें सतर्क, AIIMS भोपाल के विशेषज्ञों ने बताई वजह

Date:

भोपाल

 त्वचा पर दाग, रंग में बदलाव, नाखून की असामान्यता या बालों का झड़ना सामान्य लग सकता है, लेकिन कुछ मामलों में ऐसे बदलाव के पीछे कैंसर जैसी गंभीर बीमारी भी छिपी हो सकती है। ऐसे सूक्ष्म बदलावों की पहचान में आधुनिक तकनीक मददगार बन रही है। एम्स भोपाल में आयोजित सीएमई कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने डर्मोस्कोपी के जरिए त्वचा रोगों की बेहतर पहचान और उपचार की योजना बनाने के बारे में बताया। विशेषज्ञों ने त्वचा पर अधिक या कम रंगत, सूजन वाले और ग्रैनुलोमेटस रोग, नाखूनों की समस्याओं तथा बाल झड़ने की अलग-अलग स्थितियों में डर्मोस्कोपी के उपयोग के बारे में चर्चा की।

डर्मोस्कोपी निभाएगी अहम भूमिका- विशेषज्ञ
डॉ. पायल चौहान, डॉ. सौमिल खरे और डॉ. कृति दीवान ने बताया कि कैंसर से जुड़ी त्वचा संबंधी असामान्यताओं और कैंसरकारी त्वचा रोगों की पहचान में डर्मोस्कोपी भूमिका निभाएगी। संदिग्ध बदलावों की बारीकी से जांच कर आगे की चिकित्सकीय रणनीति तय करने में यह उपयोगी होगी। दैनिक क्लिनिकल प्रैक्टिस में डर्मोस्कोपी का समावेशन के बारे में भी बताया। कार्यर म में प्रोफेसर डॉ. रजनीश जोशी, डॉ. नितिन पंड्या डॉ. प्रशंसा जायसवाल और डॉ. मनीष खंडारे ने भी हिस्सा लिया।

आंखों से न दिखने वाले बदलाव भी पकड़ में
डर्मोस्कोपी विशेष उपकरण से त्वचा को करीब से देखने की तकनीक है। इससे त्वचा के ऐसे सूक्ष्म पैटर्न और बदलाव स्पष्ट होते हैं, जिन्हें खुली आंखों से पहचानना मुश्किल होता है। इससे डॉक्टर को बीमारी के आकलन और आगे के उपचार का निर्णय लेने में मदद मिल सकती है।

एमपी का पहला अस्पताल जिसमें होगी रोबोटिकी सर्जरी
प्रोस्टेट, किडनी, गर्भाशय और कोलन कैंसर जैसी सर्जरी में रोबोटिक तकनीक उपयोगी साबित हो सकती है। इसमें परंपरागत ऑपरेशन की तुलना में छोटा चीरा लगाया जाता है। इससे रक्तस्राव और दर्द कम होने के साथ मरीज के जल्दी रिकवर होने की संभावना रहती है। दा विंची रोबोट स्थापित होने के बाद एम्स मध्य प्रदेश का पहला सरकारी अस्पताल बन जाएगा, जहां रोबोटिक सर्जरी की सुविधा उपलब्ध होगी।

त्वचा कैंसर क्या है?
त्वचा कैंसर एक ऐसी बीमारी है जिसमें त्वचा के ऊतकों में असामान्य कोशिकाएं बढ़ने लगती हैं। सामान्य तौर पर, त्वचा की कोशिकाएं बूढ़ी होकर मरने लगती हैं और उनकी जगह नई कोशिकाएं बन जाती हैं। लेकिन जब यह प्रक्रिया ठीक से काम नहीं करती तो कोशिकाएं तेजी से बढ़ने लगती हैं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

spot_imgspot_img

Popular

More like this
Related

भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े ये 7 रहस्यमयी स्थान, आज भी कायम है हजारों साल पुरानी आस्था

 भगवान श्रीकृष्ण... एक ऐसा नाम, जिसमें आस्था है, अध्यात्म...

उपराष्ट्रपति के दौरे और जन्माष्टमी से चंडीगढ़ में ट्रैफिक डायवर्ट, नो-पार्किंग में वाहन पर कार्रवाई

चंडीगढ़ उपराष्ट्रपति और पीयू के चांसलर सीपी राधाकृष्णन आज पंजाब...

इंदिरा गांधी, वाजपेयी, आडवाणी और राजीव गांधी के खिलाफ लड़े चुनाव, 280 बार मैदान में उतरे ‘धरतीपकड़’ का निधन

भागलपुर वार्ड सदस्य से राष्ट्रपति तक चुनाव लड़ने का रिकॉर्ड...

100 किमी दौड़कर फेंकी सिर्फ 1 गेंद, इंग्लिश क्रिकेटर ने रचा अनोखा विश्व रिकॉर्ड

लंदन  क्या आप भरोसा करते हैं कि किसी गेंदबाज ने...