पक्षियों से होने वाली बिजली ट्रिपिंग पर लगी रोक, MP Transco ने बर्ड गार्ड और एक्स्क्रीटा प्रिवेंटर से पाया समाधान

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बर्ड गार्ड और बर्ड एक्स्क्रीटा प्रिवेंटर से विंध्य क्षेत्र में पक्षीजनित ट्रिपिंग नियंत्रित करने में एम पी ट्रांसको को मिली सफलता

भोपाल 

ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने जानकारी दी है कि जंगलों, जलाशयों और नदी तटीय क्षेत्रों से गुजरने वाली ट्रांसमिशन लाइनों में पक्षियों की गतिविधियों के कारण होने वाली ट्रिपिंग को रोकने के लिए मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) द्वारा विंध्य क्षेत्र में विशेष तकनीकी उपाय किए जा रहे हैं। रीवा, सतना, पन्ना, सीधी और सिंगरौली जिलों के पक्षी संवेदनशील क्षेत्रों से गुजरने वाली 132 केवी एवं 220 केवी ट्रांसमिशन लाइनों के टावरों पर बर्ड फ्लाइट डाइवर्टर (बीएफडी), बर्ड गार्ड एवं बर्ड एक्स्क्रीटा प्रिवेंटर लगाए जा रहे हैं।

20 ट्रिपिंग से न्यूनतम तक पहुंचा आंकड़ा

एमपी ट्रांसको रीवा सतना के कार्यपालन अभियंता अमित कुमार के अनुसार वर्ष 2025-26 में पक्षियों के कारण रीवा क्षेत्र की ट्रांसमिशन लाइनों में लगभग 20 ट्रिपिंग दर्ज की गई थीं। इन घटनाओं के तकनीकी विश्लेषण के बाद संवेदनशील स्थानों पर बर्ड गार्ड एवं बर्ड एक्स्क्रीटा प्रिवेंटर लगाने का निर्णय लिया गया। इनके उपयोग के बाद पक्षीजनित ट्रिपिंग की घटनाएं लगभग शून्य हो गई हैं। स्थानीय परिस्थितियों और पक्षियों के व्यवहार को ध्यान में रखकर किए गए ये तकनीकी उपाय प्रभावी साबित हो रहे हैं।

टावर पर पक्षियों के बैठने से रोकता है बर्ड गार्ड

जंगलों एवं जलाशयों के आसपास से गुजरने वाली ट्रांसमिशन लाइनों के टावर पक्षियों के लिए बैठने और घोंसला बनाने का स्थान बन जाते हैं। टावर पर बैठकर पक्षियों द्वारा मलमूत्र त्यागने से यह पदार्थ इंसुलेटर डिस्क पर जमा हो सकता है। बारिश या अधिक नमी की स्थिति में इसकी विद्युत चालकता बढ़ने से फ्लैशओवर और लाइन ट्रिपिंग की स्थिति बन सकती है। इस समस्या को कम करने के लिए बर्ड गार्ड को टावर के क्रॉसआर्म के किनारों पर लगाया जाता है। इसकी संरचना पक्षियों को वहां बैठने और घोंसला बनाने में कठिनाई पैदा करती है। यह व्यवस्था कुछ स्थानों पर बंदरों को क्रॉसआर्म के किनारे तक पहुंचने से रोकने में भी सहायक होती है।

बर्ड एक्स्क्रीटा प्रिवेंटर से इंसुलेटर सुरक्षित

बर्ड एक्स्क्रीटा प्रिवेंटर को डिस्क इंसुलेटर के ऊपरी हिस्से पर स्थापित किया जाता है। यदि पक्षी टावर के क्रॉसआर्म पर बैठकर मलमूत्र त्याग करता है, तो प्रिवेंटर के कारण यह सीधे इंसुलेटर डिस्क पर जमा नहीं हो पाता। इससे इंसुलेटर की इंसुलेशन क्षमता प्रभावित होने और परिणामस्वरूप ट्रिपिंग होने की संभावना काफी कम हो जाती है।

सहायक अभियंता अजय चौरसिया ने स्थानीय पक्षियों के व्यवहार के अनुसार किया तकनीकी संशोधन

कार्यपालन अभियंता अमित कुमार की पहल पर रीवा ट्रांसमिशन लाइन मेंटेनेंस में पदस्थ सहायक अभियंता अजय चौरसिया ने विंध्य क्षेत्र में पक्षियों के कारण होने वाली ट्रिपिंग की समस्या के तकनीकी अध्ययन के आधार पर महत्वपूर्ण पहल की। फील्ड की व्यवहारिक और तकनीकी आवश्यकता एवं क्षेत्र में पाए जाने वाले पक्षियों के व्यवहार और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार बर्ड प्रिवेंटर डिवाइसों में इन हाउस आवश्यक तकनीकी संशोधनों के साथ ट्रांसमिशन लाइनों पर उपयोग किया गया। इसके परिणामस्वरूप पक्षीजनित ट्रिपिंग में उल्लेखनीय कमी आई।

व्यवधान मे कमी के साथ पक्षी सुरक्षा भी

मध्यप्रदेश के विंध्य क्षेत्र में एमपी ट्रांसको द्वारा पक्षी संवेदनशील क्षेत्रों से गुजरने वाली ट्रांसमिशन लाइनों पर पक्षी सुरक्षा के विशेष उपाय किए जा रहे हैं। इसके तहत 05 नग 220 केवी ट्रांसमिशन लाइनों के 470 टावरों तथा 133.68 किलोमीटर कुल लंबाई वाले नेटवर्क पर 210 गार्ड एवं 50 प्रिवेंटर लगाए जा रहे हैं। इसी प्रकार 15 नग 132 केवी ट्रांसमिशन लाइनों के 1,530 टावरों तथा 440 किलोमीटर कुल लंबाई वाले नेटवर्क पर 1,600 गार्ड एवं 150 प्रिवेंटर लगाए जा रहे हैं। इन उपायों का उद्देश्य एक ओर पक्षियों के कारण ट्रांसमिशन लाइनों में होने वाली ट्रिपिंग की घटनाओं को कम करना, वहीं दूसरी ओर पक्षियों को विद्युत लाइनों के संपर्क में आने से बचाकर उनकी मृत्यु एवं घायल होने की घटनाओं को रोकना तथा क्षेत्र की जैव विविधता और पक्षी संरक्षण को बढ़ावा देना है।

विंध्य के पक्षी संवेदनशील क्षेत्रों में विस्तार की तैयारी

विंध्य क्षेत्र के बाणसागर एवं रिहंद जलाशय, सोन एवं टमस नदी के तटीय क्षेत्र, संजयदुबरी टाइगर रिजर्व के आसपास के वन क्षेत्रों तथा अन्य जल निकायों में स्थानीय और प्रवासी पक्षियों की बड़ी संख्या में आवाजाही रहती है। इन क्षेत्रों से गुजरने वाली ट्रांसमिशन लाइनों में पक्षियों की गतिविधियां अधिक होने के कारण एमपी ट्रांसको द्वारा संवेदनशील टावरों की पहचान कर चरणबद्ध रूप से बर्ड गार्ड एवं बर्ड एक्स्क्रीटा प्रिवेंटर लगाए जा रहे हैं। इन तकनीकी उपायों से एक ओर पक्षियों के ट्रांसमिशन लाइनों से टकराने और विद्युत संरचनाओं के संपर्क में आने की संभावना कम होगी, वहीं दूसरी ओर पक्षीजनित फॉल्ट, ट्रिपिंग और ब्रेकडाउन में कमी आने से विंध्य क्षेत्र की विद्युत पारेषण व्यवस्था की विश्वसनीयता और उपलब्धता बेहतर होगी।

 

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