अमेरिका-भारत ट्रेड टेंशन बढ़ी, 100% टैरिफ लगाने की तैयारी

Date:

 नई दिल्ली

अमेरिका अब भारत पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने की तैयारी कर रहा है। खबर है कि रूसी प्रतिबंधों से जुड़े इस बिल पर मतदान होना है। दरअसल, इस विधेयक में एक संशोधन का भी प्रस्ताव दिया गया है, जिसमें भारत समेत कई देशों का नाम जोड़ने की बात कही गई थी। कहा जा रहा है कि बुधवार को इस पर मतदान होना है, जहां संभावनाएं जताई जा रही हैं कि यह बिल पास हो सकता है।

इसका नाम लिंडसे ओ ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट है। अमेरिकी सीनेट में इसे 86-11 वोट से पास कर दिया गया था। अब अगर यह बिल प्रतिनिधि सभा यानी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में पास हो जाता है, तो अमेरिका के राष्ट्रपति को रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने का अधिकार मिल जाएगा। खास बात है कि 3 नवंबर को मिड टर्म चुनाव होने हैं और सदन के महज 4 दिन ही बचे हैं।

बिल में क्या
इस विधेयक के जरिए अमेरिकी सरकार रूस के नेतृत्व और एनर्जी सेक्टर पर प्रतिबंध लगाना चाहती है। साथ ही उन जहाजों पर भी बैन लगाना चाहता है, जिनकी मदद से रूस तेल सप्लाई पर लगी पाबंदियों को दरकिनार कर आसानी से तेल आगे बढ़ाता है। इसे शैडो फ्लीट या गुप्त बेड़ा भी कहा जाता है। अमेरिका दावा करता रहा है कि रूस कच्चे तेल की मदद से ही यूक्रेन के खिलाफ युद्ध के लिए पैसा जुटा रहा है।

इन देशों का नाम
डेमोक्रेट सांसद स्टेनी होयर ने संशोधन पेश किया गया था, जिसमें देशों के नाम जोड़ने का प्रस्ताव था। इनमें चीन, भारत, तुर्किए, अजरबैजान, हंगरी, स्लोवाक गणराज्य, संयुक्त अरब अमीरात, सिंगापुर, कजाकिस्तान और किर्गिज रिपब्लिक को शामिल करने की मांग गई थी। इन देशों पर 100 फीसदी शुल्क लगाया जा सकता है। इसे प्रतिनिधि सभा में पारित किया जाना बेहद जरूरी है।

इससे पहले जब इसे सीनेट में पास किया गया था, तब इसमें उन देशों के नाम शामिल नहीं किए गए थे। हालांकि, ऐसे 5 बड़े इम्पोर्टर्स के नामों को जोड़ा गया था, जो सबसे ज्यादा तेल और गैस खरीदते हैं।

पहले भी बनाया भारत को निशाना
खास बात है कि बीते साल भी अमेरिका ने भारत को रूसी तेल का हवाला कर निशाना बनाया था। तब भारत पर 25 और 25 फीसदी यानी कुल 50 प्रतिशत टैरिफ लगा दिया गया था। हालांकि, बाद में इसे कम किया गया। इतना ही नहीं अमेरिकी सरकार के कई नेताओं ने भारत की आपत्तिजनक शब्दों में आलोचना भी की थी। फिलहाल, दोनों देशों के बीच ट्रेड डील पर बातचीत चल रही है।

कई नेता विरोध में भी
खबरें हैं कि हकीम जेफ्रीज समेत कई डेमोक्रेटिक नेता इस बिल के विरोध में भी हैं। कुछ सांसदों की तरफ से बयान जारी किया गया था, 'प्रतिनिधि सभा में डेमोक्रेटिक सदस्य यूक्रेन के समर्थन में पूरी मजबूती से खड़े हैं लेकिन लिंडसे ओ ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट से फायदा होने के बजाय नुकसान अधिक होगा।'

उन्होंने कहा, 'यह विधेयक शुल्क लगाने के राष्ट्रपति के अधिकारों का बहुत अधिक विस्तार करेगा लेकिन रूस पर प्रतिबंध लगाना अनिवार्य नहीं बनाएगा। ये दोनों ही बातें अस्वीकार्य हैं। इन खामियों के कारण अमेरिकियों के लिए वस्तुएं महंगी होंगी और दीर्घकाल के लिहाज से यूक्रेन के लिए समर्थन कमजोर होगा।'

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

spot_imgspot_img

Popular

More like this
Related

संगीतमय होगा विद्यालय का माहौल, संगीत-तकनीक के संगम से तैयार होंगी 12 प्रेरणादायक प्रार्थनाएं

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार विद्यालयी...

आज का राशिफल 17 सितंबर: इन राशियों पर बरसेगी मां लक्ष्मी की कृपा, धन लाभ के संकेत

मेष करियर और फाइनेंशियल लाइफ आज नॉर्मल रहेगी। आज आपको...

1 दिसंबर से घर-घर पहुंचेंगे प्रगणक, परिवार के सभी सदस्यों का नाम दर्ज करना जरूरी

लखनऊ  जनगणना-2027 के दूसरे चरण की तैयारियां उत्तर प्रदेश में...