हाईकोर्ट आदेश के बाद भी पेंशन विवाद जारी, बुजुर्ग कर्मचारियों की बढ़ी मुश्किलें

Date:

 रांची

 रांची नगर निगम के करीब 450 सेवानिवृत्त कर्मियों के सामने आर्थिक संकट गहराता जा रहा है। एक ओर नगर निगम प्रशासन हाईकोर्ट के आदेश के बाद मिल रही बढ़ी हुई पेंशन को बंद कर राज्यकर्मियों की तर्ज पर पेंशन भुगतान व्यवस्था समाप्त करने की तैयारी में है।

वहीं दूसरी ओर अप्रैल और मई महीने की पेंशन भी अब तक नहीं मिली है। ऐसे में बुजुर्ग पेंशनधारियों के सामने परिवार चलाने, दवाइयां खरीदने और रोजमर्रा के खर्च पूरे करने का संकट खड़ा हो गया है।

दरअसल, वर्ष 2017 में झारखंड हाईकोर्ट में मामला जीतने के बाद निगम के सेवानिवृत्त कर्मियों को राज्यकर्मियों की तरह अंतिम वेतन के आधार पर पेंशन मिलनी शुरू हुई थी।

बाद में हाईकोर्ट ने 21 अक्टूबर 2024 को भी स्पष्ट किया कि निगम कर्मियों को सेवानिवृत्ति की तिथि से ही पेंशन का लाभ दिया जाए, न कि किसी कृत्रिम समय या तिथि से। साथ ही कोर्ट ने निगम को शेष पेंशनरी लाभ का भुगतान तीन माह के भीतर करने का निर्देश दिया था

हाईकोर्ट के आदेश की अवमानना का आरोप
रांची नगर निगम पेंशनर्स समाज के अध्यक्ष अवध बिहारी तिवारी ने निगम प्रशासन के प्रस्तावित फैसले का विरोध करते हुए इसे हाईकोर्ट के आदेश की भावना के विपरीत बताया है। उन्होंने कहा कि कोर्ट ने स्पष्ट रूप से अंतिम वेतन के आधार पर पेंशन देने और बकाया राशि भुगतान का निर्देश दिया है, लेकिन निगम प्रशासन अब नियमों की अलग व्याख्या कर पेंशन कम करने की कोशिश कर रहा है।

इस संबंध में अवमानना याचिका भी दायर की गई है। अवध तिवारी ने बताया कि अभी हमें छठे वेतन मान के अनुसार पेंशन मिलता है, अगर निगम बिहार के तर्ज में हमें पुराना पेंशन देना शुरू करता है तो हमें प्रत्येक माह वर्तमान में मिलने वाले पेंशन से पांच से सात हजार रुपये कम मिलेंगे।

32 अधिकारियों का वेतन, पेंशनरों पर बोझ
निगम में हाल के वर्षों में झारखंड नगरपालिका सेवा संवर्ग से करीब 32 अधिकारियों की नियुक्ति हुई है, जिनके वेतन भुगतान का अतिरिक्त बोझ निगम पर पड़ा है। आर्थिक दबाव के बीच निगम प्रशासन पेंशन मद में कटौती की तैयारी कर रहा है। हालांकि पेंशनधारियों का कहना है कि वित्तीय संकट का बोझ बुजुर्ग कर्मचारियों पर डालना अन्यायपूर्ण है।

दवा और घर खर्च चलाना मुश्किल
पेंशनधारियों का कहना है कि अप्रैल और मई महीने की पेंशन नहीं मिलने से हालात बेहद खराब हो गए हैं। अधिकांश पेंशनर 70 से 85 वर्ष की आयु के हैं और नियमित रूप से दवाइयों पर निर्भर हैं।

कई परिवारों की आजीविका का मुख्य आधार पेंशन ही है। ऐसे में दो माह से भुगतान नहीं होने के कारण दवा खरीदना, बिजली-पानी का बिल चुकाना और घर का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

spot_imgspot_img

Popular

More like this
Related

10 गाँवों में गूँजेगी डीएसआर की गूँज

​रायपुर  बदलते दौर के साथ छत्तीसगढ़ का अन्नदाता भी अब...

​जरौद समाधान शिविर में मंत्री ने 106 हितग्राहियों को वितरित की विभिन्न सामग्रियां व चेक

​रायपुर  छत्तीसगढ़ सरकार की जनहितैषी प्राथमिकताओं को धरातल पर उतारने...