फायर सेफ्टी में खामियां मिलीं, अंबाला के चमन वाटिका स्कूल के हॉस्टल पर बड़ा एक्शन

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 चंडीगढ़
 देश-प्रदेश में लगातार सामने आ रही भवन गिरने और आगजनी की घटनाओं से हरियाणा सरकार ने सबक लिया है। खासकर ऐसे भवन, जो पुराने हैं, बाढ़ या अन्य प्राकृतिक आपदाओं का सामना कर चुके हैं अथवा जिनमें अग्नि सुरक्षा के मानक पूरे नहीं हैं, वे जांच के दायरे में हैं।

इसके लिए सरकार ने भवनों का सुरक्षा और फायर सेफ्टी ऑडिट आरंभ कर दिया है। इस अभियान की पहली बड़ी कार्रवाई अंबाला के चमन वाटिका स्कूल में हुई है। चंडीगढ़-अंबाला हाईवे पर स्थित इस स्कूल परिसर में बने छात्रावासों में फिलहाल विद्यार्थियों के रहने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है।

अग्निशमन विभाग के निरीक्षण में सामने आया कि परिसर में अग्निशमन की बुनियादी सुविधाएं पर्याप्त नहीं हैं। अग्निशमन विभाग ने स्पष्ट किया है कि जब तक प्रदेश सरकार के निर्धारित फायर सेफ्टी मानकों का पूरी तरह पालन नहीं होता, तब तक स्कूल परिसर में किसी विद्यार्थी को रहने की अनुमति नहीं होगी।

चमन वाटिका स्कूल का मामला इसलिए गंभीर है, क्योंकि हाल ही में अंबाला में एक भवन गिरा है, जिसमें कई लोग मारे गए। चमन वाटिका का करीब 35 वर्ष पुराना भवन तीन बार बाढ़ का सामना कर चुका है।

छात्रावास और स्कूल भवन की जर्जर स्थिति को देखते हुए यहां छात्राओं के लिए संचालित आवासीय गुरुकुल को मार्च 2026 में बंद कर दिया गया था।

गुरुकुल के तत्कालीन प्रबंधन ने चमन वाटिका से खुद को अलग कर लिया था, लेकिन स्कूल प्रबंधन की ओर से अभिभावकों को धोखे में रखकर अक्टूबर 2026 से इसमें दाखिले होने की सूचना प्रसारित की जा रही है, जिसे फायर सेफ्टी विभाग ने बेहद गंभीरता से लिया है।

अंबाला के अग्निशमन अधिकारी की ओर से जारी पत्र में कहा गया कि स्कूल प्रबंधन के पास जो फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट है, वह केवल 374.86 वर्ग मीटर के ग्राउंड कवरेज के लिए है, जबकि मौके पर परिसर का वास्तविक कवर क्षेत्र इससे काफी अधिक पाया गया।

परिसर के तीन गर्ल्स हास्टल ब्लॉक, मेस और स्विमिंग पूल क्षेत्र मौजूदा फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट के दायरे में नहीं आते। सरकार ने स्कूल को नया स्ट्रक्चरल स्टेबिलिटी सर्टिफिकेट तत्काल प्रस्तुत करने को कहा है। साथ ही हास्टल और स्कूल भवनों के सक्षम अधिकारी से स्वीकृत नक्शे भी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।

सिर्फ फायर सेफ्टी प्रमाणपत्र होना पर्याप्त नहीं
अग्निशमन विभाग ने साफ कर दिया है कि सिर्फ फायर सेफ्टी प्रमाणपत्र होना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि परिसर के सभी भवन और वास्तविक क्षेत्र उसके दायरे में होने चाहिए। इसी तरह पुराने अथवा प्राकृतिक आपदा झेल चुके भवनों के लिए संरचनात्मक स्थिरता का प्रमाण भी जरूरी होगा।

दिल्ली-अंबाला समेत हालिया घटनाओं के बाद शुरू हुआ सुरक्षा ऑडिट यह संकेत दे रहा है कि सरकार अब संभावित रूप से असुरक्षित भवनों की पहचान कर उन्हें हादसे का कारण बनने से पहले कार्रवाई के दायरे में ला रही है।

मानकों पर खरे नहीं उतरने वाले भवनों की जांच पर रहेगा जोर
हरियाणा में सुरक्षा ऑडिट की यह कवायद ऐसे समय शुरू हुई है, जब दिल्ली, अंबाला और देश के अन्य हिस्सों में भवन गिरने तथा आग लगने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। इन घटनाओं ने खासतौर पर स्कूलों, हास्टलों और ऐसे सार्वजनिक भवनों की सुरक्षा पर सवाल खड़े किए हैं, जहां बड़ी संख्या में बच्चे और लोग एकसाथ मौजूद रहते हैं।

सरकार अब ऐसे भवनों की पहचान और जांच पर जोर दे रही है, जिनकी संरचनात्मक मजबूती संदिग्ध है या जिनमें अग्निरोधी व्यवस्था निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं है। सुरक्षा ऑडिट का उद्देश्य हादसा होने के बाद कार्रवाई करने की बजाय पहले ही जोखिम वाले भवनों की पहचान करना है।

 

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