यूपी राज्यसभा चुनाव से पहले सियासी हलचल, अब्बास अंसारी-जगदीश राय को लेकर राजभर का बड़ा बयान

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 लखनऊ
उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल के बीच सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष और कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने अपनी ही पार्टी के दो विधायकों को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि  अब्बास अंसारी और जौनपुर की जफराबाद सीट से विधायक जगदीश नारायण राय सुभासपा के चुनाव चिह्न पर जीतकर विधानसभा पहुंचे, लेकिन दोनों शुरू से ही समाजवादी पार्टी के साथ रहे हैं. राजभर के मुताबिक, ये विधायक सपा का झंडा और टोपी लगाकर घूमते हैं और उनका राजनीतिक झुकाव भी समाजवादी पार्टी की ओर है. उन्होंने कहा कि ये दोनों सपा के लिए वोट कर सकते हैं। 

ओमप्रकाश राजभर ने कहा कि अब्बास अंसारी  और जगदीश नारायण राय को लेकर कहा कि ये दोनों विधायकों का व्यवहार चुनाव बाद से ही सुभासपा से अलग रहा है. उन्होंने दावा किया कि पार्टी के जिन 12 प्रत्याशियों को सुभासपा ने चुनाव में उतारा था, उनमें से कई का झुकाव सपा की ओर था. उनके मुताबिक, जो चुनाव हार गए, वे भी अलग हो गए और जीतने वाले विधायक भी सुभासपा के साथ सक्रिय नहीं रहे. राजभर ने कहा कि उन्हें इन विधायकों के जाने से कोई खास चिंता नहीं है और वह चुनाव का इंतजार कर रहे हैं। 

धनराज नथवानी की उम्मीदवारी पर भी उठाए सवाल

राज्यसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी की ओर से धनराज परिमल नथवानी को उम्मीदवार बनाए जाने पर भी ओमप्रकाश राजभर ने सवाल उठाए. उन्होंने आरोप लगाया कि सपा की ओर से जिस उद्योगपति को उम्मीदवार बनाया गया है, उनके परिवार का भाजपा से भी राजनीतिक जुड़ाव रहा है. राजभर ने इसे भाजपा और सपा के बीच कथित तालमेल से जोड़ने की कोशिश की. उन्होंने कहा कि जो सपा के लोग बोलते हैं कि बसपा भाजपा की B टीम है. ओवैसी, भाजपा की B टीम है तो अब तो यह खुद ही बीजेपी की B टीम हो गए हैं. दरअसल, उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए 16 अक्टूबर को चुनाव होना है. सपा ने रामगोपाल यादव और धनराज परिमल नथवानी को उम्मीदवार बनाया है. तीसरी सीट को लेकर भी सियासी चर्चाएं जारी हैं। 

'पीडीए का मतलब परिवार डेवलपमेंट अथॉरिटी'
ओमप्रकाश राजभर ने आजतक से बातचीत में अखिलेश यादव के पीडीए यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक वाले राजनीतिक नारे पर भी निशाना साधा. उन्होंने तंज कसते हुए पीडीए का अर्थ 'परिवार डेवलपमेंट अथॉरिटी' बताया. राजभर का आरोप था कि समाजवादी पार्टी की राजनीति में परिवार और आर्थिक रूप से प्रभावशाली लोगों को प्राथमिकता दी जा रही है. उन्होंने सपा की ओर से राज्यसभा उम्मीदवारों के चयन पर सवाल उठाते हुए कहा कि पार्टी को अपने पीडीए के दावे और उम्मीदवारों के चयन के बीच तालमेल स्पष्ट करना चाहिए. राजभर ने अपने बयान में धनराज नथवानी और रामगोपाल यादव का उल्लेख करते हुए सपा नेतृत्व पर परिवारवाद की राजनीति करने का आरोप लगाया। 

47 से 125 सीटों तक पहुंचने का श्रेय लेने पर सपा को घेरा
इंटरव्यू के दौरान राजभर ने 2022 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के प्रदर्शन और अपने दल की भूमिका पर भी विस्तार से बात की. उन्होंने कहा कि 2017 में भाजपा के साथ रहते हुए वह खुद चुनाव जीते थे. इसके बाद सपा ने उन्हें अपने गठबंधन में शामिल किया और 2022 के चुनाव में सहयोगियों के साथ मिलकर चुनाव लड़ा. राजभर ने दावा किया कि 2022 में सपा गठबंधन की सीटें बढ़ने में सुभासपा की भी महत्वपूर्ण भूमिका थी. उन्होंने कहा कि पूर्वांचल के कई जिलों में उनके समर्थन से सपा को फायदा हुआ. राजभर ने गाजीपुर, मऊ, बलिया, आजमगढ़ और आंबेडकर नगर जैसे जिलों का उल्लेख करते हुए अखिलेश यादव से पूछा कि गठबंधन में सुभासपा के योगदान को क्यों भुलाया जा रहा है। 

उन्होंने सपा नेताओं के उन बयानों पर भी नाराजगी जताई, जिनमें सपा की जीत को केवल अपनी पार्टी की ताकत से जोड़कर देखा जाता है. राजभर ने कहा कि गठबंधन में दोनों दलों का योगदान था और किसी एक दल को पूरी सफलता का श्रेय देना उचित नहीं है। 

कांग्रेस के साथ गठबंधन पर बोले- दोनों साथ मिलकर लड़ेंगे
कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच गठबंधन को लेकर पूछे गए सवाल पर राजभर ने कहा कि दोनों दलों के बीच राजनीतिक जरूरत का रिश्ता है. उन्होंने दावा किया कि सीटों के बंटवारे को लेकर खींचतान के बावजूद दोनों पार्टियां अंततः मिलकर चुनाव लड़ेंगी. राजभर ने कांग्रेस की ओर से सीटों की मांग को लेकर भी कटाक्ष किया. उन्होंने कहा कि कांग्रेस को कम सीटों की मांग करने के बजाय ज्यादा सीटें मांगनी चाहिए. उन्होंने अपने इंटरव्यू में मध्य प्रदेश और उत्तराखंड की राजनीति का भी उल्लेख किया. राजभर ने अखिलेश यादव और कांग्रेस के संबंधों पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि अलग-अलग राज्यों में विपक्षी दलों के नेताओं के बयान उनके गठबंधन की एकजुटता पर प्रश्न खड़े करते हैं। 

चुनाव आयोग पर विपक्ष के आरोपों को लेकर भी साधा निशाना
चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर विपक्ष की ओर से उठाए जाने वाले सवालों पर भी ओमप्रकाश राजभर ने प्रतिक्रिया दी. उन्होंने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के पुराने शासन का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि विपक्षी दल अपने कार्यकाल में चुनावी व्यवस्था पर सवाल नहीं उठाते थे, लेकिन सत्ता से बाहर होने के बाद चुनाव आयोग पर आरोप लगाते हैं. राजभर ने कहा कि चुनाव में जनता का फैसला सबसे महत्वपूर्ण होता है. उनके मुताबिक, जनता सरकार के कामकाज और राजनीतिक दलों के प्रदर्शन के आधार पर अपना निर्णय लेती है। 

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