चंडीगढ़
पंजाब के सरकारी कर्मचारियों के महंगाई भत्ते (DA) के बकाये से जुड़े मामले में आज (12 अक्टूबर) पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में सुनवाई होगी। पिछली सुनवाई में चीफ जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा की बेंच ने इस मामले को नियमित अवमानना केस से अपग्रेड कर आपराधिक अपराध की तरह सुनवाई।
इस दौरान पंजाब के मुख्य सचिव केएपी सिन्हा के लिखित माफीनामे पर फैसला हो सकता है। उन्होंने कोर्ट में लिखित रूप से बिना शर्त माफी का प्रस्ताव दिया है। पिछली बेंच ने इस माफीनामे को स्वीकार करने या खारिज करने का फैसला नई बेंच पर छोड़ दिया था।
आज नई बेंच यह तय करेगी कि मुख्य सचिव की माफी को स्वीकार कर उनके खिलाफ चल रही आपराधिक अवमानना की कार्रवाई को यहीं बंद किया जाए? या कोर्ट को गुमराह करने और गलत तथ्य रखने के लिए उनके खिलाफ औपचारिक रूप से आरोप तय कर कानूनी कार्रवाई को आगे बढ़ाया जाए?
9 अक्टूबर को सुनवाई के दौरान मुख्य सचिव केएपी सिन्हा अदालत में पेश हुए थे। मामले में मुख्य सचिव के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई का मुद्दा भी उठा था। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा था कि अदालत की गरिमा से समझौता नहीं किया जा सकता।
वहीं, पंजाब सरकार की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट विकास सिंह ने कहा था कि मुख्य सचिव का अदालत को गुमराह करने का कोई इरादा नहीं था। उन्होंने यह भी कहा था कि यदि अदालत चाहे तो मुख्य सचिव बिना शर्त माफी मांगने को तैयार हैं।
पिछली सुनवाई में क्या-क्या हुआ, 5 पॉइंट में पढ़िए
सुप्रीम कोर्ट में मामला सूचीबद्ध नहीं हुआ: कर्मचारियों की ओर से सीनियर एडवोकेट संजय कौशल ने कहा कि DA के बकाये से जुड़े हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ पंजाब सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी, लेकिन यह मामला अब तक सुनवाई के लिए सूचीबद्ध नहीं हुआ है।
वकील बोले- सुनवाई में इतनी देरी क्यों हो रही: संजय कौशल ने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय से जुड़े मामले में हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने के लिए सरकार ने तुरंत अपील दायर की और उस पर सुनवाई भी तय हो गई। एडवोकेट ने इसे सरकार का दोहरा रवैया बताते हुए कहा कि लाखों कर्मचारियों के बकाये के मामले में इतनी देरी क्यों हो रही है?
सरकार बोली- पिछली सरकारों का है बकाया: पंजाब सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने पक्ष रखते हुए कहा कि कर्मचारियों का DA बकाया मौजूदा सरकार के समय का नहीं, बल्कि पिछली सरकारों के कार्यकाल से जुड़ा है। इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि फैसला देने से पहले अदालत पूरे मामले के रिकॉर्ड की जांच कर चुकी है।
गलत जानकारी देने पर कोर्ट ने जताई नाराजगी: हाईकोर्ट ने साफ कहा कि सरकार को अपने फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करने का पूरा अधिकार है। हालांकि, अपील करने के बाद अदालत को गलत जानकारी देना स्वीकार नहीं किया जा सकता।
अपील की कमियां अब तक दूर क्यों नहीं हुई?: कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया कि सुप्रीम कोर्ट में दायर अपील की कमियां अब तक दूर क्यों नहीं की गईं? इसी मामले में अदालत ने आपराधिक अवमानना का नोटिस जारी किया था। हाईकोर्ट ने कहा कि आपराधिक अवमानना के मामले की सुनवाई तय रोस्टर के अनुसार संबंधित पीठ ही करेगी।
मामले में अब तक क्या-क्या हुआ, जानिए
8 अप्रैल 2026: पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में कर्मचारियों की याचिकाओं पर विस्तृत सुनवाई शुरू हुई, जिसमें पंजाब सरकार द्वारा केंद्रीय पैटर्न पर बढ़े हुए DA को रोकने की नीति को चुनौती दी गई थी।
3 अगस्त 2026: पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच (जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर) ने फैसला सुनाया। कोर्ट ने सरकार की वित्तीय तंगी की दलीलें खारिज कीं और करीब 8 लाख कर्मचारियों व पेंशनर्स के बकाये को 15 दिनों के भीतर जारी करने का आदेश दिया। इसी दिन कोर्ट ने सख्त निर्देश दिया कि जब तक बकाया नहीं चुकाया जाता, सरकार अपने प्रचार-प्रसार के लिए बड़े पैमाने पर विज्ञापन (प्रिंट/सोशल मीडिया) जारी नहीं कर सकती।
31 अगस्त 2026: हाई कोर्ट की ओर से अनुपालन हलफनामा दाखिल करने के लिए मुख्य सचिव को दी गई अंतिम समयसीमा समाप्त हो गई, लेकिन सरकार भुगतान करने में विफल रही।
1 सितंबर 2026: पंजाब सरकार ने हाई कोर्ट के इस कड़े आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया और वहां एक विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर की।
10 सितंबर 2026: हाई कोर्ट ने अनुपालन न होने पर सरकार से दोबारा जवाब मांगा। राज्य सरकार ने बताया कि मामला सुप्रीम कोर्ट में दायर किया जा चुका है। हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट की अपील में मौजूद कमियों को 10 दिन में दूर करने का समय दिया।
1 अक्टूबर 2026: एडवोकेट जनरल और मुख्य सचिव के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री में कमियों को दूर कर अपील को दोबारा फाइल किया गया।
6 अक्टूबर 2026: हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री से स्टेटस रिपोर्ट मंगवाई, जिसमें यह खुलासा हुआ कि पंजाब सरकार की अपील अभी भी कमियों के कारण अटकी हुई है और सूचीबद्ध होने के योग्य नहीं है। कोर्ट ने इसे गलत जानकारी देकर गुमराह करना माना और मुख्य सचिव केएपी सिन्हा को आपराधिक अवमानना का कारण बताओ नोटिस जारी कर 9 अक्टूबर को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का हुक्म दिया।
9 अक्टूबर 2026: मुख्य सचिव निजी तौर पर कोर्ट में पेश हुए। उनके वकील ने अदालत से बिना शर्त माफी मांगने की पेशकश की। हालांकि, चीफ जस्टिस की बेंच ने राज्य के इस आचरण को बेहद पीड़ादायक बताया और माफी स्वीकार करने से मना करते हुए पूरे मामले को आपराधिक अवमानना से जुड़ी रोस्टर डिवीजन बेंच के पास ट्रांसफर कर दिया।

