Navratri 2026: महाराष्ट्र के रिजर्व माता मंदिर में उमड़े श्रद्धालु, जानें 1853 से जुड़ी अनोखी कहानी

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Sharadiya Navratri : शारदीय नवरात्र का पावन पर्व चल रहा है. देशभर में देवी मां के मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ दिखाई दे रही है. महाराष्ट्र के अकोला में स्थित अंबिका देवी के प्राचीन मंदिर में भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिल रही है. सुबह से ही भक्त माता की पूजा-अर्चना के लिए मंदिर पहुंच रहे हैं. माता के दर्शन करने के बाद भक्त नारियल, फूल, हल्दी, धूप, दीप और चुनरी अर्पित कर रहे हैं. स्थानीय लोगों के बीच यह मंदिर रिजर्व माता के नाम से भी प्रसिद्ध है. आइए आपको इस मंदिर का इतिहास बताते हैं.

स्थानीय मान्यता के अनुसार, 300 साल से भी अधिक पुराना यह मंदिर श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का केंद्र है. मां अंबिका को यहां अलग-अलग नामों से पुकारा जाता है. कोई उन्हें 'बागातली देवी' कहता है, तो कोई 'रिजर्व माता' के नाम से जानता है. भक्तों का विश्वास है कि मां अपने दरबार में आने वाले श्रद्धालुओं के संकट दूर करती हैं और जीवन के सुख-दुख में अपने भक्तों पर कृपा बनाए रखती हैं.

श्रद्धालुओं ने बताया कि इस बार नवरात्र के अवसर पर मंदिर परिसर को आकर्षक रोशनी से सजाया गया है. माता के सुंदर श्रृंगार और दिव्य स्वरूप के दर्शन के लिए श्रद्धालु सुबह से ही पहुंच रहे हैं. मंदिर में पूजा-पाठ और भक्ति का माहौल बना हुआ है.

मां के दरबार में केवल स्थानीय श्रद्धालु ही नहीं, बल्कि दूर-दराज के क्षेत्रों से भी भक्त पहुंच रहे हैं. कुछ श्रद्धालु मुंबई से भी माता के दर्शन करने अकोला आए हैं. भक्तों का कहना है कि मां के चरणों में आकर उन्हें मानसिक शांति मिलती है और वे अपनी परेशानियों से मुक्ति की प्रार्थना करते हैं. श्रद्धालुओं ने माता की कृपा और आशीर्वाद से जुड़े अपने अनुभव भी साझा किए.

मंदिर के सेवादार अनिल के अनुसार, यह मंदिर अंग्रेजों के शासनकाल से भी पहले का बताया जाता है. मान्यता है कि पहले मंदिर परिसर के आस-पास फूलों की बाग हुआ करता था और उसी क्षेत्र में माता की प्रतिमा स्थापित थी. इसी वजह से माता को 'बागातली देवी' कहा जाने लगा. समय के साथ यह स्थान श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बन गया.

'रिजर्व माता' नाम कैसे पड़े?
1853 में ब्रिटिश शासन काल के दौरान इस जगह मंदिर को हटाकर पुलिस स्टेशन बनाने का फैसला किया गया था. उस जगह को रिजर्व करने के लिए वहां ग्रिलिंग भी की गई थी. लेकिन लाख कोशिशों के बावजूद वहां पुलिस स्टेशन नहीं बन पाया. ब्रिटिश सरकार ने कई बार यहां पुलिस स्टेशन बनाने का प्रयास किया, लेकिन हर बार उनकी कोशिश नाकाम हो जाती. स्थानीय लोग इसे देवी का चमत्कार मानने लगे. कहते हैं कि तभी से इस मंदिर की देवी को रिजर्व माता के नाम से पुकारा जाने लगा. आज भी स्थानीय लोग देवी को इसी नाम से बुलाते हैं.

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