चंडीगढ़.
हरियाणा में असिस्टेंट प्रोफेसर (भूगोल) भर्ती प्रक्रिया को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट से राहत मिली है। अदालत ने हरियाणा लोक सेवा आयोग (HPSC) की स्क्रीनिंग परीक्षा की अंतिम उत्तर कुंजी में बदलाव और कुछ प्रश्नों को हटाने के फैसले को चुनौती देने वाली 16 याचिकाएं खारिज कर दी हैं।
अदालत ने स्पष्ट किया कि प्रतियोगी परीक्षाओं में विषय विशेषज्ञों की राय को प्राथमिकता दी जानी चाहिए और ठोस गलती साबित हुए बिना न्यायिक हस्तक्षेप उचित नहीं है। जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ की अदालत ने कहा कि उत्तर कुंजी की शैक्षणिक शुद्धता का आकलन करना विशेषज्ञों का काम है। जब तक उत्तर कुंजी में स्पष्ट और निर्विवाद त्रुटि साबित न हो, तब तक अदालत को विशेषज्ञों की राय में हस्तक्षेप करने से बचना चाहिए। याचिकाकर्ताओं ने HPSC की ओर से 27 जून 2025 को जारी अंतिम उत्तर कुंजी, 3 जुलाई 2025 की घोषणा और 11 जुलाई 2025 को घोषित स्क्रीनिंग परीक्षा के परिणाम को चुनौती दी थी। अभ्यर्थियों का आरोप था कि आयोग ने अंतिम उत्तर कुंजी में छह प्रश्नों के उत्तर बदल दिए और 10 प्रश्नों को हटा दिया। याचिकाकर्ताओं के अनुसार, इन बदलावों से परीक्षा की निष्पक्षता और परिणाम की विश्वसनीयता प्रभावित हुई। उन्होंने संशोधित उत्तर कुंजी जारी करने, सभी उत्तर पुस्तिकाओं का दोबारा मूल्यांकन कराने और नई मेरिट सूची तैयार करने की मांग की थी।
बिहार लोक सेवा आयोग की परीक्षा से प्रश्न दोहराने का भी उठाया मुद्दा
याचिकाकर्ताओं ने अदालत में यह भी दलील दी कि बिहार लोक सेवा आयोग की 29 अप्रैल 2025 को आयोजित असिस्टेंट प्रोफेसर (भूगोल) परीक्षा के 30 प्रश्न हरियाणा की परीक्षा में दोहराए गए थे। उनका कहना था कि उत्तर कुंजी में बदलाव और प्रश्न हटाए जाने से योग्य अभ्यर्थियों के चयन की संभावनाएं प्रभावित हुईं। इसी आधार पर उन्होंने भर्ती प्रक्रिया की दोबारा समीक्षा की मांग की। हालांकि, अदालत ने कहा कि किसी दूसरी परीक्षा के प्रश्न दोहराए जाने मात्र से परीक्षा की निष्पक्षता पर संदेह नहीं किया जा सकता।
HPSC ने अदालत में क्या दलील दी?
हरियाणा लोक सेवा आयोग ने अदालत को बताया कि परीक्षा की प्रारंभिक उत्तर कुंजी जारी करने के बाद अभ्यर्थियों से आपत्तियां आमंत्रित की गई थीं। प्राप्त आपत्तियों को विषय विशेषज्ञों के पास भेजा गया और उनकी सिफारिशों के आधार पर अंतिम उत्तर कुंजी तैयार की गई। आयोग के अनुसार, अभ्यर्थियों की शिकायतों की दोबारा समीक्षा भी विशेषज्ञों से कराई गई थी। इस समीक्षा के बाद उत्तर कुंजी में किसी और बदलाव की आवश्यकता नहीं पाई गई।
विशेषज्ञों की राय में हस्तक्षेप नहीं कर सकती अदालत
हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि प्रश्नों की शैक्षणिक शुद्धता और उत्तर कुंजी की वैधता का तकनीकी मूल्यांकन विशेषज्ञों के अधिकार क्षेत्र में आता है। अदालत के अनुसार, याचिकाकर्ता विशेषज्ञों की निष्पक्षता पर सवाल उठाने या उनके फैसले में दुर्भावना साबित करने के लिए ठोस साक्ष्य पेश नहीं कर सके। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल अलग-अलग पाठ्यपुस्तकों में दिए गए उत्तरों की तुलना के आधार पर विशेषज्ञों की राय को खारिज नहीं किया जा सकता। उत्तर कुंजी में स्पष्ट त्रुटि का प्रमाण न होने के कारण न्यायिक हस्तक्षेप का आधार नहीं बनता।
असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती प्रक्रिया के लिए क्या मायने?
हाई कोर्ट द्वारा सभी 16 याचिकाएं खारिज किए जाने से HPSC की अंतिम उत्तर कुंजी और स्क्रीनिंग परीक्षा के परिणाम को चुनौती देने वाली इन याचिकाओं पर कानूनी विवाद समाप्त हो गया है। हालांकि, भर्ती के अगले चरण, नियुक्तियों की समयसीमा और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं को लेकर आयोग की ओर से जारी आधिकारिक निर्देशों पर नजर रखनी होगी। इस फैसले से प्रतियोगी परीक्षाओं में उत्तर कुंजी को चुनौती देने वाले मामलों के लिए यह संदेश भी मिलता है कि केवल असहमति पर्याप्त नहीं है; न्यायिक हस्तक्षेप के लिए स्पष्ट त्रुटि या ठोस आधार प्रस्तुत करना जरूरी है।

