गुरुग्राम में 300 करोड़ की ट्रैफिक सुधार परियोजना, 800 मीटर एलिवेटेड रोड और 500 मीटर टनल बनाने की तैयारी

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गुरुग्राम
सरहौल बॉर्डर से साइबर हब और उद्योग विहार की ओर जाने वाले वाहन चालकों को जल्द ही रोजाना लगने वाले जाम से राहत मिलने की उम्मीद है। इसके लिए सरहौल बार्डर से साइबर हब तक यातायात का दबाव कम करने के लिए डीएलएफ कंपनी एलिवेटेड रोड का निर्माण नवंबर से शुरू कर देगी।

इस महीने के अंत तक ड्राइंग तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है ताकि नवंबर से हर हाल में जमीनी स्तर पर काम शुरू हो जाए। निर्माण की जिम्मेदारी लेने के साथ ही पूरा खर्च भी डीएलएफ कंपनी ही वहन करेगी।

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की मंजूरी
परियोजना को भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) और गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (जीएमडीए) से आवश्यक मंजूरी मिल चुकी है।

इस परियोजना के पूरा होने से साइबर सिटी एवं उद्योग विहार की ओर आने-जाने वाले लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। वर्तमान में इन क्षेत्रों में बड़ी संख्या में कंपनियों के कार्यालय होने के कारण सुबह और शाम के व्यस्त समय में वाहनों का दबाव काफी बढ़ जाता है।

800 मीटर लंबी एलिवेटेड रोड
सरहौल बॉर्डर से दिल्ली-गुरुग्राम सीमा पार करके आने वाले वाहनों के साथ ही साइबर सिटी और उद्योग विहार की ओर जाने वाले वाहनों के कारण कई बार यातायात की गति धीमी हो जाती है। इसका असर कार्यालय पहुंचने और घर लौटने वाले कर्मचारियों पर पड़ता है।

जाम के कारण ईंधन की खपत बढ़ने के साथ ही लोगों का बहुमूल्य समय भी बर्बाद होता है। योजना के तहत लगभग 800 मीटर लंबी एलिवेटेड रोड बनाई जाएगी। इसका उद्देश्य यातायात को अधिक सुगम बनाना और व्यस्त मार्ग पर वाहनों के दबाव को कम करना है।

एलिवेटेड रोड के निर्माण से वाहनों को निर्बाध आवागमन का विकल्प मिलेगा। इससे सरहौल बार्डर से साइबर हब की ओर आने-जाने वाले लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है। परियोजना की ड्राइंग को अंतिम रूप दिया जा रहा है। निर्माण शुरू होने के बाद काम को निर्धारित समय में पूरा करने पर जोर रहेगा।

मालसरी स्टेशन से शंकर चौक तक बनेगी टनल
एलिवेटेड रोड के साथ ही मालसरी रैपिड मेट्रो स्टेशन से शंकर चौक तक लगभग 500 मीटर लंबी टनल बनाने की भी योजना है। इसका उद्देश्य साइबर हब क्षेत्र में यातायात के दबाव को कम करना है। एलिवेटेड रोड और टनल को एक व्यापक यातायात सुधार परियोजना के रूप में विकसित किया जाएगा, ताकि वाहनों की आवाजाही अधिक व्यवस्थित हो सके।

दोनों परियोजना पर लगभग 300 करोड़ रुपये खर्च होंगे। खास बात यह है कि इसके निर्माण का खर्च डीएलएफ कंपनी स्वयं उठाएगी। इससे सार्वजनिक एजेंसियों पर सीधे निर्माण खर्च का बोझ नहीं पड़ेगा। डीएलएफ में परियोजना की जिम्मेदारी संभाल रहे सुनील अरोड़ा के अनुसार, नवंबर में ही निर्माण कार्य शुरू करने की तैयारी है। परियोजना की ड्राइंग लगभग अंतिम चरण में है।

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