पाकिस्तान के खिलाफ PoK में 27 अक्टूबर को मनेगा ब्लैक डे, JKJAAC ने धरना खत्म करने से किया इनकार

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जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JKJAAC) ने पाकिस्तानी सरकार के खिलाफ अपने लंबे समय से चल रहे आंदोलन को और मजबूत कर दिया है। कमेटी ने औपचारिक घोषणा करते हुए पूरे पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में 24 अक्टूबर से 1 नवंबर तक एक बड़े 'प्रोटेस्ट वीक' का ऐलान किया है। इस दौरान क्षेत्र भर में विरोध प्रदर्शन, धरने और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। कमेटी की केंद्रीय लीडरशिप ने साफ शब्दों में कहा कि वे अपना चल रहा धरना बिना किसी शर्त के खत्म नहीं करेंगे। उन्होंने मांग की है कि सरकारी कमेटियां उनकी चार मुख्य मांगों पर पहले ध्यान दें और उन्हें मानें। तभी कोई सीधी या आधिकारिक बातचीत शुरू हो सकती है।

ब्लैक डे और फुरकान दिवस की घोषणा
बढ़ते विरोध के रोडमैप के तहत JKJAAC ने 27 अक्टूबर को पूरे PoK में 'ब्लैक डे' मनाने का आह्वान किया है। यह कार्यक्रम कायदे-आजम चौक पर आयोजित होगा। इस दिन लोग पाकिस्तान की कथित सैन्य ज्यादतियों, दमन और मानवाधिकार उल्लंघनों के खिलाफ एकजुट होकर विरोध जताएंगे। काले झंडे, पोस्टर और शांतिपूर्ण रैलियों के जरिए संदेश दिया जाएगा। प्रोटेस्ट वीक 1 नवंबर को समाप्त होगा। इस दिन को 'फुरकान दिवस' के रूप में मनाया जाएगा। फुरकान दिवस शहीदों, घायलों, लापता व्यक्तियों और आंदोलन के दौरान प्रभावित परिवारों को श्रद्धांजलि देने का दिन होगा। इस मौके पर विशेष सामूहिक प्रार्थनाएं की जाएंगी और आंदोलन की सफलता के लिए दुआ मांगी जाएगी।

गुप्त वार्ता से इनकार
JKJAAC ने बैकचैनल या सीक्रेट बातचीत की किसी भी संभावना को पूरी तरह खारिज कर दिया है। नेताओं ने लोगों से अपील की है कि वे आंदोलन के समय से पहले खत्म होने की सरकार की तरफ से फैलाई जा रही अफवाहों को नजरअंदाज करें। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसी अफवाहें आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश हैं। कमेटी ने दुनिया भर में रह रहे कश्मीरी समुदाय से अपील भी की है। विदेश में बसे कश्मीरियों से कहा गया है कि वे पाकिस्तानी दूतावासों और वाणिज्य दूतावासों के बाहर रोजाना विरोध प्रदर्शन और धरने जारी रखें। खासकर लंदन और बर्मिंघम जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय केंद्रों में प्रवासी लोगों को संगठित करने की कोशिशों को सराहा गया। इन जगहों पर पहले से ही गतिविधियां चल रही हैं, जिन्हें और मजबूत करने की बात कही गई है।

शांतिपूर्ण आंदोलन और नागरिक निर्देश
राजनीतिक वैधता बनाने की कोशिश में JKJAAC ने साफ किया कि यह एक पूरी तरह शांतिपूर्ण, सामूहिक और जनता पर आधारित आंदोलन है। इसका किसी भी हथियारबंद समूह, मिलिशिया या आतंकी संगठन से कोई संबंध, फंडिंग, समर्थन या तालमेल नहीं है। कमेटी ने जोर दिया कि आंदोलन केवल जनता के अधिकारों और मांगों पर केंद्रित है।

इस दौरान नेताओं ने स्थानीय नागरिकों, ट्रांसपोर्ट वर्करों, व्यापारियों, वकीलों, छात्रों और जानकारों की ऐतिहासिक भागीदारी को सराहा। उन्होंने कहा कि इन वर्गों की एकता ही आंदोलन की असली ताकत है। शासन और कल्याण के मुद्दों पर, स्थानीय वार्ड कमेटियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे दिहाड़ी मजदूरों और कामगारों का पूरा डेटा इकट्ठा करें। यह डेटा आगे की वेलफेयर योजनाओं और मदद के कार्यक्रम बनाने के लिए इस्तेमाल होगा।

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