सफाई कर्मचारियों की हड़ताल के बीच एक्शन में भोपाल कलेक्टर, खुद सड़क पर उतरकर की सफाई

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भोपाल
 मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में दीपावली के ठीक पहले शहरवासियों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। सफाई कर्मचारियों की तीन दिन से चली आ रही अनिश्चितकालीन हड़ताल मुख्यमंत्री मोहन यादव के साथ हुई उच्चस्तरीय बैठक के बाद आखिरकार समाप्त हो गई है। कर्मचारियों की 10 प्रमुख मांगों में से 8 पर सहमति बनने के बाद अब शहर की स्वच्छता व्यवस्था तेजी से पटरी पर लौट रही है। इस पूरे घटनाक्रम में सबसे खास और प्रेरणादायक तस्वीर भोपाल की सड़कों पर देखने को मिली, जहां हड़ताल खत्म होते ही खुद प्रशासनिक अमला सफाई के मोर्चे पर डट गया।

कलेक्टर और महापौर ने खुद लगाई झाड़ू
हड़ताल के खात्मे के तुरंत बाद भोपाल कलेक्टर प्रियंक मिश्रा, महापौर मालती राय और नगर निगम आयुक्त ने शहर के चर्चित 10 नंबर मार्केट सहित कई प्रमुख इलाकों का पैदल मुआयना किया। स्थिति की गंभीरता और दीवाली के त्योहार को देखते हुए इन बड़े अधिकारियों ने खुद हाथों में झाड़ू उठाकर कचरा समेटना शुरू कर दिया। 'साहब' को सड़क पर झाड़ू लगाते देख वहां मौजूद अन्य लोगों और सफाई कर्मचारियों का भी हौसला बढ़ा। अधिकारियों के इस अनूठे और जमीन से जुड़े नेतृत्व की सोशल मीडिया से लेकर आम जनता के बीच जमकर तारीफ हो रही है।

कलेक्टर प्रियंक मिश्रा की अपील
दौरे के दौरान भोपाल कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने मीडिया और नागरिकों से बातचीत करते हुए कहा कि सफाई कर्मचारियों ने अपनी हड़ताल वापस ले ली है और जल्द ही शहर की स्थिति पूरी तरह सामान्य हो जाएगी। उन्होंने राजधानीवासियों से अपील करते हुए कहा, 'जब तक कचरा कलेक्शन वाहन आपके द्वार तक नहीं पहुंचता, तब तक कचरा घर में ही रखें और सड़कों पर न फेंके, ताकि सफाई व्यवस्था को दोबारा दुरुस्त करने में मदद मिल सके।'

कौन हैं आईएएस प्रियंक मिश्रा ?
मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले प्रियंक मिश्रा 2013 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। प्रशासनिक सेवा में आने से पहले उन्होंने दिल्ली के प्रतिष्ठित सेंट स्टीफंस कॉलेज और दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से अर्थशास्त्र में उच्च शिक्षा प्राप्त की है। अपनी सख्त, परिणाम-उन्मुख और मैदानी कार्यशैली के लिए पहचाने जाने वाले प्रियंक मिश्रा इससे पहले 2020 से 2022 तक कटनी जिले में अपनी सेवाएं दे चुके हैं, जहां वे पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान की गुडबुक में शामिल रहे हैं।

कटनी कलेक्टर रहते हुए उनके नाम एक अनोखी उपलब्धि दर्ज है। वहां उन्होंने मध्य प्रदेश में सबसे ज्यादा 31,904 सुकन्या समृद्धि खाते खुलवाए थे, जिसके चलते उनकी तस्वीर के साथ एक विशेष डाक टिकट भी जारी किया गया था। अब भोपाल जैसे संवेदनशील और बड़े जिले में उनकी यही लीडरशिप क्वालिटी संकट के समय प्रशासनिक मुस्तैदी के रूप में सामने आई है।

दीवाली की खुशियों में नहीं आएगी खलल
दीपावली की तैयारियों में जुटे भोपाल के व्यापारियों और आम नागरिकों के लिए बीते तीन दिन भारी असमंजस भरे रहे थे। बाजारों में खरीदारी की भारी भीड़ के बीच चारों तरफ लगे कचरे के ढेरों से त्योहार की चमक फीकी पड़ती दिख रही थी। हालांकि, अब 10 में से 8 मांगों पर बनी सहमति और अधिकारियों के खुद सड़क पर उतरने से भोपाल की सड़कों के फिर से चमकने की उम्मीद बंध गई है। नगर निगम के कचरा वाहन और सफाई कर्मचारी अपने-अपने वार्डों में मुस्तैदी से लौट आए हैं, जिससे शहरवासी अब बिना किसी चिंता के उल्लास के साथ दीवाली का पर्व मना सकेंगे।

क्या थीं सफाईकर्मियों की मांगें?
सफाई कर्मचारियों का मुख्य दर्द यह था कि महंगाई के इस दौर में उनका मौजूदा वेतन (जैसे 10,500 रुपये) परिवार का खर्च चलाने के लिए नाकाफी था, जिसके चलते वे 25,000 रुपये मासिक वेतन और अन्य सुविधाओं की मांग कर रहे थे। सरकार द्वारा 10 में से 8 मांगों पर सहमति जताना यह दिखाता है कि त्योहार के समय प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर दबाव को भांपते हुए त्वरित निर्णय लिए गए।

भोपाल के नागरिकों के लिए अपील
नागरिकों के लिए यह व्यावहारिक संदेश है कि वे तुरंत हड़ताल खत्म होने के बाद प्रशासन का सहयोग करें और एक-दो दिन तक कचरा केवल निगम की गाड़ियों में ही डालें, ताकि शहर को पूरी तरह स्वच्छ बनाया जा सके।

 

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