पीढ़ियों को प्रभावित करने वाले सिकल सेल एनीमिया रोग के नियंत्रण में आगे है प्रदेश

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भोपाल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जनजातीय संस्कृति के संरक्षण के साथ जनजातीय समाज के विकास और समाज की समस्याओं के समाधान के लिए राज्य सरकार कार्य कर रही है। सिकल सेल एनीमिया नियंत्रण का कार्य वर्ष 2022 से प्रारंभ हुआ है। इसके अच्छे परिणाम मिले हैं। कई पीढ़ियां प्रभावित करने वाली बीमारी सिकल सेल एनीमिया की स्क्रीनिंग नियंत्रण और उपचार की दिशा में राज्य सरकार कार्य कर रही है। इस क्षेत्र में प्रदेश अग्रणी है। जनजातीय नायकों के सम्मान में प्रदेश में तीन विश्वविद्यालय प्रारंभ किए गए हैं। सतपुड़ा क्षेत्र में राजा भभूत सिंह, राजा शंकर शाह, रघुनाथ शाह और रानी दुर्गावती की स्मृति में विभिन्न आयोजन किए गए हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव भोपाल के निकट ग्राम अचारपुरा में पांच दिवसीय शिल्पकार महोत्सव के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ डिज़ाइन और जनजातीय कार्य विभाग के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित महोत्सव में जनजातीय कलाकारों द्वारा तैयार शिल्प कृतियों की प्रदर्शनी का अवलोकन किया और इन कलाकृतियों को पारंपरिक शैली में आधुनिकता के साथ पेश करने के प्रयासों की सराहना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कलाकारों से आत्मीयता के साथ चर्चा भी की।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जनजातीय शिल्पकारों को प्रोत्साहित करने के लिए अधिक से अधिक प्रयास किए जा रहे हैं। जनजातीय शिल्प का डंका देश-विदेश में बज रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के विरासत से विकास के अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि पूरे देश में लोक संस्कृति को बढ़ावा देते हुए प्रगति के कदम उठाए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राष्ट्रपति मती द्रौपदी मुर्मु गत सप्ताह मध्यप्रदेश भ्रमण पर रहीं और विभिन्न कार्यक्रमों में हिस्सा लिया, जो प्रदेश के लिए गर्व का विषय है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि 24 जून को वीरांगना रानी दुर्गावती का बलिदान दिवस है। रानी दुर्गावती ने गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत को नई ऊंचाइयाँ प्रदान की। दुनिया ने उनकी वीरता, शौर्य और पराक्रम को देखा। रानी दुर्गावती ने गौंडवाना क्षेत्र के स्वाभिमान की रक्षा के लिए तत्कालीन मुगल सत्ता के विरुद्ध अनेकों युद्धों में विजय प्राप्त की। उन्होंने राष्ट्र गौरव के लिये संघर्ष करते हुए प्राणों की आहूति दे दी। आज हम रानी कमलापति के पराक्रम के क्षेत्र भोपाल में वीरांगना रानी दुर्गावती के शौर्य को नमन कर रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश अनेक जनजातीय वीरों की धरती है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आदिरंग शिल्पकार महोत्सव में जनजातीय कलाकारों ने प्रकृति के माध्यम से हमारे जीवन में उत्सव के रंग भरने का प्रयास किया है। एनआईडी ने जनजातीय परंपरागत कला को नए आयाम पर पहुंचाया है। कला-संस्कृति के माध्यम से कई लोगों के जीवन में आर्थिक समृद्धि का सूर्य उदय होगा। राज्य सरकार इसके लिए प्रतिबद्ध है। प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में भारत चहुंमुखी विकास कर रहा है।

राष्ट्रीय फलक पर पहचान बना रही जनजातीय कला

जनजातीय कार्य मंत्री कुंवर विजय शाह ने कहा कि नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ डिज़ाइन के साथ संयुक्त तत्वावधान में मनाये जा रहे इस आदिरंग शिल्पकार महोत्सव में जनजातीय समाज की प्रतिभा को देखने का अवसर मिला है। एनआईडी के समन्वय से मध्यप्रदेश की परंपरागत शिल्प को अब राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल रही है। जनजातीय कार्य विभाग के प्रयासों से जनजातीय कलाकारों को प्रोत्साहन भी मिल रहा है। राज्य सरकार प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए संकल्पित है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में इस दिशा में बेहतर कार्य किये जा रहे हैं।

राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान (एनआईडी) की निदेशक डॉ. विद्या राकेश ने कहा कि आदिरंग सिर्फ एक शिल्पकार महोत्सव नहीं, बल्कि डिजाइन, कल्चर, कम्युनिटी और एम्पॉवरमेंट को जोड़ने का एक प्रयास है। गत कुछ वर्षों में एनआईडी ने मध्यप्रदेश जनजातीय कार्य विभाग के साथ मिलकर बैगा, गौंड, भील और अन्य जनजातीय समाज के बीच डिजाइन डेवलपमेंट कार्यशालाएं आयोजित की हैं। इनके माध्यम से शिल्पकारों को डिजाइन अवेयरनेस, प्रोडक्ट डेवलपमेंट, ब्रांडिग, पैकेजिंग और मार्केटिंग जैसे विषयों से परिचित करवाया गया है ताकि उनकी कला को वर्तमान बाजार की जरूरतों के हिसाब से लिंक किया जा सके। एनआईडी ने जनजातीय समुदायों की संस्कृति का दस्तावेजीकरण भी किया है। यह उनकी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे रोजगार के साथ-साथ सांस्कृतिक विकास के नए अवसर भी विकसित होते हैं। एनआईडी जनजातीय समाज को वोकल फॉर लोकल से जोड़कर राष्ट्र निर्माण में अहम भूमिका निभा रहा है।

जनजातीय कलाकार  गगन सिंह मरावी ने अनुभव साझा करते हुए बताया कि आदिरंग महोत्सव में गौंड चित्रकारों को नई चीजें सीखने का मौका मिला। भील चित्रकार मती गोरिया भाबोर ने बताया कि इस महोत्सव में हमें अपनी चित्रकार को आगे बढ़ाने का अवसर मिला है।

आदिरंग महोत्सव में 140 से अधिक जनजातीय शिल्पकार हुए शामिल

समारोह में जनजातीय कला, शिल्प और आजीविका संवर्धन के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी गई। पांच दिवसीय महोत्सव में मध्यप्रदेश के विभिन्न अंचलों से आए 140 से अधिक जनजातीय शिल्पकार शामिल हुए। भील, गोंड, बैगा सहित विभिन्न जनजातीय समुदायों के शिल्पकारों ने अपनी पारंपरिक कला, शिल्प और हस्तनिर्मित उत्पादों का प्रदर्शन किया। महोत्सव के दौरान आयोजित डिजाइन हस्तक्षेप कार्यशालाओं में शिल्पकारों ने एनआईडी मध्यप्रदेश के संकाय सदस्यों एवं छात्र स्वयंसेवकों के सहयोग से बाजार की आवश्यकताओं के अनुरूप नए उत्पाद विकसित किए। समापन समारोह में कार्यशालाओं के दौरान विकसित उत्पादों और डिजाइन अवधारणाओं की विशेष प्रदर्शनी आयोजित की गई।

कार्यक्रम में विधायक  विष्णु खत्री, अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष  रामदास रौतेल, अनुसूचित जनजाति आयोग के सदस्य  भगत सिंह नेताम,  मंगल सिंह धुर्वे, प्रमुख सचिव जनजातीय विकास  गुलशन बामरा, आयुक्त  तरुण राठी और अन्य अधिकारी गण उपस्थित थे। कार्यक्रम में मती भगवती एवं साथी कलाकारों ने पारंपरिक लोक संगीत से मुख्यमंत्री डॉ. यादव और अन्य अथितियों का स्वागत किया।मुख्यमंत्री डॉ. यादव को स्मृति चिन्ह के रूप में गौंड चित्रकला से निर्मित कला-रूप भेंट किया गया। कार्यक्रम स्थल परिसर में मध्यप्रदेश के विभिन्न जनजाति अंचलों से आए कलाकारों के उल्लास पूर्ण नृत्य और संगीत से हर्ष, उल्लास का वातावरण निर्मितकर दिया।

 

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