अंबाला.
हरियाणा बागवानी विभाग में वर्ष 26 योजनाओं में करोड़ों का घोटाला उजागर हुआ है। 2006-07 से 2012-13 के बीच संचालित योजनाओं में कथित करोड़ों रुपये के गबन और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों पर अब 13 वर्ष बाद राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (विजिलेंस) ने तत्कालीन जिला बागवानी अधिकारी प्रेम सिंह संधू, एचओडी सुरेश कुमार, डीपी शर्मा, राजकुमार राणा और अकाउंटेंट पूर्ण सिंह पर केस दर्ज किया है।
मौके पर कुछ भी नहीं मिलने के आरोपों तक पहुंच गया है। शिकायत में कुल 26 बिंदुओं पर आरोप लगाए गए हैं, जिनमें नई बागवानी योजनाएं, पुराने बागों का पुनर्जीवन, नर्सरी, टिश्यू कल्चर, सब्जी बीज, मशरूम, पॉलीहाउस, ड्रिप सिंचाई, जैविक खेती, मधुमक्खी पालन, पैक हाउस, एससी-एसटी सब्सिडी, पदोन्नति और प्रशासनिक निर्णय तक शामिल हैं।
2013 में मुख्य सचिव के माध्यम से विजिलेंस को भेजी गई थी शिकायत
शिकायत वर्ष 2013 में मुख्य सचिव, हरियाणा के माध्यम से विजिलेंस को भेजी गई थी। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि वर्ष 2007-08 से विभाग ने पांच लाख से अधिक फलदार पौधे निजी नर्सरियों से खरीदकर दो हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में बाग विकसित करने का दावा किया, जबकि किसानों के खेतों में केवल पांच से दस प्रतिशत पौधे ही जीवित मिले। पुराने बागों के पुनर्जीवन पर करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद खेतों में कार्य नहीं मिला। निजी एवं सरकारी नर्सरियों, टिश्यू कल्चर इकाइयों, सब्जी बीज उत्पादन, मशरूम इकाइयों और कम्पोस्ट इकाइयों को सब्सिडी देने के बावजूद उत्पादन नहीं होने का आरोप भी शिकायत में शामिल है।
सरकारी एजेंसियों के बजाय निजी कंपनियों से ऊंची दरों पर खरीदे गए बीज
शिकायत में कहा गया है कि फूल, सब्जी, मसाला और औषधीय पौधों के बीज सरकारी एजेंसियों के बजाय निजी कंपनियों से ऊंची दरों पर खरीदे गए। राज्य बीज परीक्षण प्रयोगशाला द्वारा घटिया घोषित बीज भी किसानों को वितरित किए गए, लेकिन संबंधित आपूर्तिकर्ताओं के खिलाफ बीज अधिनियम के तहत कार्रवाई नहीं की गई। सामुदायिक टैंक, ड्रिप सिंचाई, पॉलीहाउस, शेडनेट हाउस, मल्चिंग शीट, आईपीएम योजना, जैविक खेती, पौध संरक्षण उपकरण, पैक हाउस, मधुमक्खी पालन, बागवानी उपकरण और जिला योजनाओं के तहत सामग्री खरीद में भी वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हैं। शिकायत में कहा गया है कि कई योजनाओं में निजी एजेंसियों से बाजार से अधिक कीमत पर सामग्री खरीदी गई तथा फर्जी और डुप्लीकेट लाभार्थियों को भी अनुदान जारी किया गया।
इन सभी में अनियमितताएं बरतीं
लघु सिंचाई योजना के तहत ड्रिप, स्प्रिंकलर और माइक्रो स्प्रिंकलर पर 50 से 90 प्रतिशत सब्सिडी में गबन, वर्ष 2006-07 में अंबाला सहित 14 जिलों में जैविक और अजैविक सामग्री ऊंची दरों पर खरीदने, बीज अधिनियम-1966 के उल्लंघन, राज्य कृषि विश्वविद्यालय की अनुशंसा के बिना बीज एवं कीटनाशकों की खरीद, पदोन्नति में अधिकारों के दुरुपयोग, सेवा विस्तार में अनियमितता, पालीहाउस निर्माण में गड़बड़ी, बिना विभागीय जांच आरोपपत्र जारी करने, वेजिटेबल ग्रुप सोसायटी योजना में गबन, दूर-दराज के अधिकारियों को अतिरिक्त प्रभार देने और एससी-एसटी सब्सिडी योजना में अनियमितताओं के आरोप भी शामिल किए गए हैं। शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि वर्ष 2002-03 से एससी-एसटी कर्मचारियों की पदोन्नति में आरक्षण नीति का पालन नहीं किया गया।
प्रदेश के कई जिलों में घोटाले की थी शिकायत, सीबीआइ जांच की थी मांग
शिकायत में यह भी कहा गया है कि अंबाला, यमुनानगर, पानीपत, रोहतक, भिवानी, सिरसा, फरीदाबाद, पलवल, मेवात, गुरुग्राम और झज्जर सहित कई जिलों की शिकायतों की जांच संयुक्त निदेशक, उपनिदेशक, लेखाधिकारी, अधीक्षक, सलाहकार और जिला बागवानी अधिकारियों की उच्चस्तरीय समितियों ने की थी। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इन समितियों ने विजिलेंस जांच, आपराधिक मुकदमा और विभागीय कार्रवाई की सिफारिश की, लेकिन वरिष्ठ अधिकारियों की मिलीभगत के कारण रिपोर्टों पर कार्रवाई नहीं हुई। शिकायतकर्ता ने पूरे मामले की सीबीआइ जांच की मांग करते हुए दावा किया कि उसके पास आरटीआइ से प्राप्त कई जांच रिपोर्टें हैं और उसने करीब 100 करोड़ रुपये के गबन की शिकायत तीन बार लिखित रूप में दी थी।
जांच में नहीं मिले पौधे, लाभ एक परिवार के तीन-तीन सदस्यों को दिया
जांच के अनुसार नारायणगढ़ ब्लाक के गांव उज्जल माजरी में एक ही परिवार के तीन सदस्यों के नाम पर राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत वर्ष 2007-08 में 1.2 हेक्टेयर में आम और 0.4 हेक्टेयर में अमरूद का बाग लगाने के लिए अनुदान जारी किया गया, लेकिन निगरानी समिति के निरीक्षण में खेत में एक भी पौधा नहीं मिला। इसी प्रकार बराड़ा ब्लाक के गांव अब्दुलागढ़ में एक किसान को एक हेक्टेयर क्षेत्र में आर्गेनिक खेती के लिए प्रोत्साहन राशि दिए जाने के बावजूद खेत में कोई बागवानी फसल नहीं मिली। जांच में इन मामलों के आधार पर तत्कालीन एचडीओ राजकुमार राणा द्वारा कागजी कार्रवाई कर सरकारी राशि के गबन का आरोप दर्ज किया गया है।

