हरियाणा में Anti-Terrorist Squad का गठन, आतंकवाद पर नकेल कसने के लिए पंचकूला बना केंद्र

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चंडीगढ़.

हरियाणा ने पहली बार आतंकवाद से निपटने के लिए अपनी सुरक्षा व्यवस्था में बड़ा ढांचागत बदलाव करते हुए राज्य स्तर पर एंटी टेररिज्म स्क्वॉड (एटीएस) का गठन कर दिया है। अब आतंकवाद से जुड़े मामलों की जांच सामान्य पुलिस व्यवस्था के बजाय एक विशेष एजेंसी करेगी, जिसकी अपनी कमांड, अपना मुख्यालय और अपने अलग पुलिस थाने होंगे।

गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव सुधीर राजपाल की ओर से बृहस्पतिवार को जारी अधिसूचना के मुताबिक एटीएस को अपराध अन्वेषण विभाग (सीआईडी) के भीतर एक विशेषीकृत एजेंसी के रूप में स्थापित किया गया है। इसका मुख्यालय पंचकूला में होगा और इसका नेतृत्व पुलिस महानिरीक्षक (आईजीपी) रैंक से कम का अधिकारी नहीं करेगा। यह अधिकारी सीआईडी प्रमुख के माध्यम से सीधे पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को रिपोर्ट करेगा। यह फैसला सिर्फ एक नई इकाई बनाने भर का नहीं है, बल्कि राज्य की सुरक्षा रणनीति को स्थानीय अपराध नियंत्रण से आगे बढ़ाकर विशेष खतरा प्रबंधन मॉडल की ओर ले जाने वाला कदम माना जा रहा है।

आखिर अभी क्यों बनी एटीएस
सरकारी अधिसूचना में साफ कहा गया है कि उद्देश्य पुलिस सेवा की दक्षता बढ़ाना, आतंकवाद से मुकाबला करना और आतंकवाद से जुड़े मामलों का प्रभावी निपटान सुनिश्चित करना है। दरअसल, बदलते सुरक्षा परिदृश्य में आतंक से जुड़े नेटवर्क, डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल, राज्यों के बीच आवाजाही और संवेदनशील संस्थानों की सुरक्षा जैसी चुनौतियां बढ़ी हैं। ऐसे मामलों में सामान्य पुलिस तंत्र के बजाय विशेष प्रशिक्षण, अलग इंटेलिजेंस समन्वय और तेज जांच तंत्र की जरूरत महसूस की जा रही थी। इसी सोच के तहत हरियाणा ने एटीएस मॉडल अपनाया है।

अब दो एटीएस थाने, पूरे राज्य की जिम्मेदारी तय
राज्य सरकार ने एटीएस गठन के साथ दो विशेष पुलिस थानों की भी अधिसूचना जारी कर दी है, ताकि आतंकवाद से जुड़े अपराधों की जांच का स्पष्ट अधिकार क्षेत्र तय हो सके। पंचकूला एटीएस थाना राज्य के उत्तरी, पश्चिमी और मध्य हिस्से को कवर करेगा। इसके अधिकार क्षेत्र में पंचकूला, अंबाला, कुरुक्षेत्र, यमुनानगर, करनाल, पानीपत, कैथल, हिसार, हांसी, फतेहाबाद, जींद, सिरसा, रोहतक, भिवानी और चरखी दादरी जिले शामिल किए गए हैं। वहीं गुरुग्राम एटीएस थाना दक्षिणी और एनसीआर बेल्ट की जिम्मेदारी संभालेगा। इसके दायरे में सोनीपत, झज्जर, गुरुग्राम, फरीदाबाद, पलवल, नूंह, रेवाड़ी और महेंद्रगढ़ जिले रखे गए हैं। इस तरह पहली बार आतंकवाद संबंधी मामलों के लिए हरियाणा को दो संचालन क्षेत्रों में बांटा गया है।

सिर्फ जांच नहीं, समन्वय और त्वरित प्रतिक्रिया भी लक्ष्य
नई व्यवस्था का मकसद केवल केस दर्ज करना नहीं होगा। एटीएस से उम्मीद होगी कि वह संदिग्ध गतिविधियों पर निगरानी, खुफिया इनपुट का विश्लेषण, अंतरराज्यीय एजेंसियों के साथ समन्वय और जरूरत पड़ने पर त्वरित कार्रवाई की क्षमता विकसित करे। पंचकूला को मुख्यालय बनाने का फैसला भी रणनीतिक माना जा रहा है, क्योंकि यहां पहले से पुलिस और प्रशासनिक ढांचे की प्रमुख इकाइयां मौजूद हैं और उत्तर हरियाणा के संवेदनशील इलाकों तक पहुंच अपेक्षाकृत तेज है।

समझिए अब क्या बदलेगा
नई व्यवस्था लागू होने के बाद आतंकवाद से जुड़े मामलों में जांच का केंद्रीकरण होगा, विशेषज्ञ अधिकारियों की तैनाती संभव होगी और अलग जवाबदेही तय होगी। इससे स्थानीय पुलिस पर निर्भरता घटेगी और गंभीर सुरक्षा मामलों में तेज तथा समन्वित कार्रवाई का रास्ता बनेगा। गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव सुधीर राजपाल का कहना है कि इस एजेंसी के गठन से राज्य की आतंकवाद विरोधी क्षमता मजबूत होगी और सुरक्षा संबंधी चुनौतियों का अधिक प्रभावी ढंग से सामना किया जा सकेगा।

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