क्या पंजाब में जल्द बज सकता है चुनावी बिगुल? राजनीतिक हलकों में चर्चा गर्म, पार्टियां हुईं सक्रिय

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 चंडीगढ़
 पंजाब में विधानसभा चुनाव तय समय से पहले कराए जाने की संभावना को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। वर्ष 2027 में प्रस्तावित जनगणना और विधानसभा चुनाव के संभावित टकराव को देखते हुए चुनाव आयोग समय से पहले मतदान कराने के विकल्प पर विचार कर सकता है।

यदि यह ऐसा होता है तो फरवरी 2027 के बजाय नवंबर या दिसंबर 2026 में ही पंजाब सहित कुछ अन्य राज्यों में चुनाव कराए जा सकते हैं। हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन विभिन्न राजनीतिक दलों ने संभावित परिस्थितियों को देखते हुए अपनी चुनावी तैयारियां तेज कर दी हैं।

जनगणना 2027 दो चरणों में आयोजित की जा रही है। पहला चरण हाउस लिस्टिंग का है, जबकि दूसरा और सबसे महत्वपूर्ण चरण पापुलेशन एन्यूमरेशन (पीई) फरवरी 2027 में प्रस्तावित है। इसी दौरान जातीय गणना भी कराई जाएगी।

चुनाव कराने के विकल्प पर मंथन 
जनगणना और चुनाव, दोनों प्रक्रियाओं के लिए बड़ी संख्या में शिक्षकों और सरकारी कर्मचारियों की ड्यूटी लगती है। ऐसे में दोनों बड़े राष्ट्रीय कार्य एक ही समय पर होने से कर्मचारियों की उपलब्धता और प्रशासनिक प्रबंधन बड़ी चुनौती बन सकता है।

इसी वजह से समयपूर्व चुनाव कराने के विकल्प पर मंथन चल रहा है। पंजाब में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी इस संभावना को देखते हुए पहले ही चुनावी मोड में दिखाई दे रही है।

आप के कार्यक्रमों और जनसभाओं में भी तेजी
पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और पूर्व दिल्ली मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल हाल ही में यह कह चुके हैं कि उन्हें जानकारी मिली है कि पंजाब में चुनाव फरवरी 2027 के बजाय नवंबर 2026 में कराए जा सकते हैं। उन्होंने कार्यकर्ताओं से अभी से बूथ स्तर पर संगठन मजबूत करने और मुख्यमंत्री भगवंत मान को दोबारा सत्ता में लाने के लिए पूरी ताकत झोंकने का आह्वान किया है।
इसके बाद से आम आदमी पार्टी के संगठनात्मक कार्यक्रमों और जनसभाओं में भी तेजी देखी जा रही है। वहीं, आप के अध्यक्ष अमन अरोड़ा भी कह चुके हैं कि वह चुनाव के लिए पूरी तरह से तैयार है।

जमीनी स्तर पर सक्रिय रहने के निर्देश दे चुकी भाजपा
दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी ने भी संभावित समयपूर्व चुनाव को ध्यान में रखते हुए अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। हाल ही में हुई बैठकों में केंद्रीय नेतृत्व ने प्रदेश इकाई को जमीनी स्तर पर सक्रिय रहने और चुनावी रणनीति को अंतिम रूप देने के निर्देश दिए हैं।

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी इसी 20 जून को पंजाब आ रहे हैं। शिरोमणि अकाली दल से अलग होने के बाद भाजपा पहली बार पूरी ताकत के साथ चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है।

पार्टी नेताओं का मानना है कि यदि चुनाव पहले होते हैं तो संगठनात्मक मजबूती और कार्यकर्ताओं की सक्रियता निर्णायक भूमिका निभा सकती है। उधर, कांग्रेस का भी चुनाव को लेकर मंथन चल रहा है।

प्रशासनिक व्यवस्था पर पड़ेगा अतिरिक्त दबाव
जनगणना और चुनाव एक साथ होने से प्रशासनिक व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा। शिक्षकों और सरकारी कर्मचारियों का बड़ा वर्ग दोनों प्रक्रियाओं में लगाया जाता है, जिससे व्यवस्थाओं के प्रभावित होने की आशंका है। यही कारण है कि समय से पहले चुनाव कराने के विकल्प को व्यावहारिक माना जा रहा है।

हालांकि अंतिम फैसला चुनाव आयोग और केंद्र सरकार के स्तर पर ही होगा। यदि चुनाव वास्तव में तय समय से पहले होते हैं तो आने वाले कुछ महीनों में राज्य में राजनीतिक गतिविधियां और भी तेज हो सकती हैं।

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