किसानों के लिए मुश्किल बढ़ी, 13 जिलों में बारिश का इंतजार; जल्दबाजी में बोवनी न करने की सलाह

Date:

भोपाल 

मध्य प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून की प्रगति धीमी पड़ने से कृषि क्षेत्र में चिंता बढ़ गई है। राज्य के कई जिलों में जून के पहले 17 दिनों में बहुत कम बारिश दर्ज की गई है, जिससे सोयाबीन, मूंग, उड़द और अन्य खरीफ फसलों की बुवाई रुक गई है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि पर्याप्त नमी के बिना बोवनी करने से फसल खराब हो सकती है।

राज्य में इस महीने अब तक औसत बारिश सामान्य से काफी कम रही है। कुछ जिलों में तो बारिश का आंकड़ा शून्य या आधा इंच से भी नीचे है। इससे बारिश पर निर्भर छोटे और मध्यम किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। जिन इलाकों में सिंचाई की व्यवस्था नहीं है, वहां किसान इंतजार कर रहे हैं।

प्रभावित जिलों की स्थिति
मौसम विभाग के प्रारंभिक आंकड़ों के मुताबिक, अलीराजपुर, टीकमगढ़, दमोह, रीवा, शहडोल, बालाघाट, कटनी, भिंड, दतिया, धार, खरगोन, बड़वानी और मैहर जैसे जिलों में बारिश बेहद कम या न के बराबर रही है। कई अन्य जिलों में भी 1-2 इंच से कम पानी गिरा है, जो बुवाई के लिए पर्याप्त नहीं माना जा रहा। भोपाल और आसपास के कुछ इलाकों में अपेक्षाकृत बेहतर बारिश हुई, लेकिन पूरे राज्य का औसत सामान्य से 25-35 प्रतिशत कम रहा।

आज तीन जिलों में हीटवेव का अलर्ट, 28 में बारिश होगी
मौसम विभाग के अनुसार, गुरुवार को प्रदेश के 3 जिले रतलाम, छिंदवाड़ा-बालाघाट में हीट वेव का अलर्ट है। वहीं, ग्वालियर, नीमच, मंदसौर, आगर-मालवा, राजगढ़, गुना, अशोकनगर, विदिशा, शिवपुरी, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, बुरहानपुर, खंडवा, हरदा, नर्मदापुरम, बैतूल, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, जबलपुर, सिवनी, मंडला, डिंडौरी और अनूपपुर में आंधी-बारिश का दौर रहेगा। वहीं भोपाल, इंदौर, उज्जैन, झाबुआ, अलीराजपुर, बड़वानी, धार, खरगोन, शाजापुर, देवास, सीहोर, रायसेन, सागर, दमोह, पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर, कटनी, उमरिया और शहडोल में गर्मी का असर रहेगा।

मानसून की रफ्तार धीमी, सामान्य तारीख निकल चुकी
मौसम विभाग के मुताबिक प्रदेश में मानसून के प्रवेश की सामान्य तिथि 15 जून मानी जाती है। पिछले वर्षों में 2021 में मानसून सबसे जल्दी 9 जून को पहुंचा था, जबकि 2018 में सबसे देर से 25 जून को प्रवेश हुआ था। वर्ष 2025 में मानसून 16 जून को मध्य प्रदेश पहुंचा था और पूरे सीजन में सामान्य से अधिक वर्षा हुई थी। इस वर्ष मानसून की प्रगति धीमी बनी हुई है और इसके लगभग एक सप्ताह देरी से पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। यही वजह है कि जून महीने की बारिश का आंकड़ा अभी काफी पीछे चल रहा है।

जून में अब तक 35% कम बारिश
1 जून से 16 जून के बीच मध्य प्रदेश में सामान्य से करीब 35 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है। जहां इस अवधि तक औसतन करीब डेढ़ इंच बारिश होनी चाहिए थी, वहां वास्तविक वर्षा इससे काफी कम रही है। पूर्वी मध्य प्रदेश की स्थिति अधिक चिंताजनक है, जहां सामान्य का आधा पानी भी नहीं बरस पाया है।

इन 35 जिलों में सामान्य से कम बारिश
अनूपपुर, बालाघाट, छतरपुर, छिंदवाड़ा, दमोह, डिंडौरी, जबलपुर, कटनी, मैहर, मऊगंज, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, रीवा, सागर, सिवनी, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, अलीराजपुर, बड़वानी, बैतूल, भिंड, बुरहानपुर, दतिया, देवास, धार, ग्वालियर, इंदौर, झाबुआ, खरगोन, रतलाम, उज्जैन और विदिशा जिलों में अब तक सामान्य से कम वर्षा दर्ज की गई है। 

बीज खराब होने का खतरा बढ़ा मानसून के समय पर आने की संभावना के चलते प्रदेश के कई जिलों में किसानों ने सोयाबीन की बोवनी कर दी। उन पर बीज खराब होने का खतरा मंडरा रहा है, क्योंकि पानी के अभाव में बीज खराब हो सकता है। ऐसे में किसानों को दोबारा बोवनी करना पड़ेगी। हालांकि, उन किसानों के लिए राहत है, जिनके पर सिंचाई के लिए पानी है।

भोपाल-राजगढ़ में आधा इंच से ज्यादा पानी गिरा इससे पहले बुधवार को प्रदेश में आंधी-बारिश का दौर जारी रहा। भोपाल और राजगढ़ में आधा इंच से ज्यादा पानी गिर गया। बैतूल, गुना, इंदौर और छिंदवाड़ा में भी बारिश दर्ज की गई।

मौसम में ठंडक घुलने से दिन के तापमान में भी गिरावट आई है। बैतूल में एक ही दिन में 10 डिग्री की गिरावट हुई और पारा 26.5 डिग्री पर आ गया। शिवपुरी-पचमढ़ी में पारा 34 डिग्री, छिंदवाड़ा में 35.9 डिग्री, रायसेन में 26.6 डिग्री, सागर में 37 डिग्री, नर्मदापुरम में 37.2 डिग्री, श्योपुर-धार में 37.4 डिग्री, मंडला में 37.8 डिग्री सेल्सियस रहा।

प्रदेश के 5 बड़े शहरों की बात करें तो भोपाल में 34.8 डिग्री, इंदौर में 37.2 डिग्री, उज्जैन में 39 डिग्री, जबलपुर में 39.3 डिग्री और ग्वालियर में 39.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

विशेषज्ञों की चेतावनी
कृषि वैज्ञानिकों का सुझाव है कि बुवाई के लिए मिट्टी में कम से कम 4 इंच (लगभग 100 मिमी) बारिश का होना जरूरी है। इससे जमीन में पर्याप्त नमी बनी रहेगी और बीज अच्छे से अंकुरित होंगे। जल्दबाजी में बोई गई फसल सूखे के कारण नष्ट हो सकती है, जिससे किसानों को दोबारा खर्च उठाना पड़ सकता है।

मानसून की संभावना
भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, मानसून महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ से होते हुए मध्य प्रदेश में 21 से 24 जून के आसपास पहुंच सकता है। इस बार समग्र मौसम पूर्वानुमान सामान्य से थोड़ा कम बारिश का इशारा कर रहा है, इसलिए किसानों को सतर्क रहने की जरूरत है।

 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

spot_imgspot_img

Popular

More like this
Related

आम आदमी भी ठहरेगा वीआईपी बंगले में? सरकार बना रही खास प्लान

पटना. सरकार पर्यटन को बढ़ावा देने एवं सरकारी परिसंपत्तियों के...

श्री हरमंदिर साहिब पहुंचे तरुण चुघ और केवल सिंह ढिल्लों, की अरदास और सेवा

अमृतसर. BJP के नए बने राज्यसभा सदस्य तरुण चुघ और...

गृह निर्माण मंडल का सख्त एक्शन, निजी बिल्डर से छुड़ाई करोड़ों की सरकारी जमीन

रायपुर. छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल ने अपनी...

दिल्ली से मिनटों में पहुंचेंगे सोनीपत-पलवल, मेट्रो और नमो भारत विस्तार योजना को मिली रफ्तार

नई दिल्ली दिल्ली-एनसीआर में ट्रांसपोर्ट का सबसे प्रमुख जरिया मेट्रो...