भारत की रक्षा ताकत को नई उड़ान, राजनाथ सिंह बोले- तय समय से पहले हासिल करेंगे उत्पादन और निर्यात लक्ष्य

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नयी दिल्ली 
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि देश रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से बढ़ रहा है और तीन लाख करोड़ रुपए के रक्षा उत्पादन तथा 50,000 करोड़ रुपए के रक्षा निर्यात के लक्ष्यों को समय से पहले हासिल कर लिया जायेगा।

सिंह ने नागपुर में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ यंत्र इंडिया लिमिटेड की आयुध निर्माणी अंबाझरी इकाई में अत्याधुनिक 10,000 टन एल्यूमिनियम एक्सट्रूज़न प्रेस के भूमि पूजन के अवसर पर यह बात कही। उन्होंने कहा है कि निगमीकरण के बाद आयुध निर्माणी बोर्ड का उत्पादन वित्त वर्ष 2025-26 में 26,282 करोड़ रुपए तक पहुँच गया जो वित्त वर्ष 2019-20 में 12,755 करोड़ रुपए था।

निर्यात भी 81 करोड़ से बढ़कर 4,561 करोड़ रुपए पहुंच गया है।

उन्होंने कहा , "जो राष्ट्र अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति स्वयं करने में सक्षम होता है, वह अपने हितों की सुरक्षा के लिए सबसे अधिक आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ता है।" उन्होंने कहा कि यह एक्सट्रूज़न प्रेस देश के दृष्टिकोण में उस परिवर्तन का प्रतीक है, जिसमें आयात पर निर्भर रहने के बजाय महत्वपूर्ण वस्तुओं का घरेलू उत्पादन किया जा रहा है। उन्होंने मौजूदा भू-राजनीतिक परिदृश्य में भविष्य के लिए तैयार रहने के लिए सुरक्षा संबंधी आवश्यकताओं पर नियंत्रण को अनिवार्य बताया।

उन्होंने कहा कि प्रस्तावित प्रेस देश में अपनी तरह की सबसे उन्नत सुविधाओं में से एक होगी। यह रक्षा प्रणालियों एवं विभिन्न प्लेटफॉर्म, अंतरिक्ष एवं विमानन संरचनाओं, मिसाइल कार्यक्रमों, रेलवे एवं परिवहन क्षेत्रों तथा अन्य रणनीतिक औद्योगिक अनुप्रयोगों के लिए आवश्यक बड़े और जटिल एल्यूमिनियम मिश्रधातु प्रोफाइलों के निर्माण में सहायता करेगी। यह परियोजना महत्वपूर्ण एल्यूमिनियम एक्सट्रूज़न के आयात पर निर्भरता कम करने, घरेलू आपूर्ति श्रृंखला को सुदृढ़ करने तथा स्वदेशी उत्पादन के माध्यम से रणनीतिक क्षेत्रों की भविष्य की आवश्यकताओं को पूरा करने में सहायक होगी।

रक्षा मंत्री ने कहा, "यह एक्सट्रूज़न प्रेस एक महत्वपूर्ण आवश्यकता को पूरा करता है। आधुनिक लड़ाकू विमान, मिसाइलें और उन्नत अंतरिक्ष कार्यक्रम ऐसे धातुओं की मांग करते हैं जो हल्की होने के साथ-साथ मजबूत भी हों और अत्यंत कठिन परिस्थितियों का सामना कर सकें। ऐसी धातुएँ विशेष प्रक्रियाओं के माध्यम से तैयार की जाती हैं। यदि धातु की गुणवत्ता श्रेष्ठ होगी, तो वह हर परिस्थिति में प्रभावी सिद्ध होगी।"

ऑपरेशन सिंदूर की सफलता में भारत-निर्मित उपकरणों की महत्वपूर्ण भूमिका का उल्लेख करते हुए सिंह ने मजबूत हार्डवेयर के स्वदेशी निर्माण को बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि बड़ी मशीनों की वास्तविक शक्ति हजारों महत्वपूर्ण अवयवों से मिलकर बनती है और यह एक्सट्रूज़न प्रेस इस महत्वपूर्ण क्षेत्र में राष्ट्र को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण योगदान देगा।

रक्षा मंत्री ने कहा कि आज जबकि युद्ध का स्वरूप बदल रहा है और शत्रुओं की पहचान करना अधिक कठिन हो गया है, फिर भी पारंपरिक युद्ध और उससे जुड़े साधनों की प्रासंगिकता 1947 की तरह आज भी बनी हुई है और 2047 में भी काफी हद तक बनी रहेगी। उन्होंने कहा कि एक मजबूत सैन्य-औद्योगिक आधार का महत्व लंबे समय तक बना रहेगा और यह एक्सट्रूज़न प्रेस भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए एक बड़ी राष्ट्रीय आवश्यकता को पूरा करने की दिशा में उठाया गया कदम है।

रक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण को साकार करने के लिए प्रौद्योगिकी, कार्यबल, ज्ञान और राष्ट्र के प्रति विश्वास जैसे चार प्रमुख तत्वों पर एक साथ कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि सरकार के निरंतर प्रयासों के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं और 2014 में 46,000 करोड़ रुपये का घरेलू रक्षा उत्पादन वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर रिकॉर्ड 1.78 लाख करोड़ हो गया है। उन्होंने कहा कि 2014 में भारत का रक्षा निर्यात 1,000 करोड़ से भी कम था, जो अब बढ़कर 38,424 करोड़ के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुँच गया है।

उन्होंने कहा, "यह केवल आँकड़ों में वृद्धि नहीं है, बल्कि भारत की क्षमताओं में वृद्धि का प्रतीक है। यह राष्ट्र के आत्मविश्वास में बढ़ोतरी को दर्शाता है। हम अगले 2-3 वर्षों के लिए निर्धारित 3 लाख करोड़ रुपए के रक्षा उत्पादन और 50,000 करोड़ रुपए के रक्षा निर्यात के लक्ष्यों को समय से पहले प्राप्त करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।"

रक्षा मंत्री ने आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को आगे बढ़ाने में यंत्र इंडिया लिमिटेड के योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि बदलते समय और उभरती प्रौद्योगिकियों को ध्यान में रखते हुए आयुध निर्माणी बोर्ड का निगमीकरण प्रणाली को अधिक मजबूत और चुस्त बनाने के लिए किया गया था और यंत्र इंडिया लिमिटेड उसी परिवर्तन का परिणाम है।

उन्होंने कहा, "निगमीकरण के बाद हमारी परिकल्पना थी कि नयी इकाइयों को पर्याप्त परिचालन स्वायत्तता मिले और उन्हें नवाचार, जोखिम उठाने, अनुसंधान तथा निर्यात में उत्कृष्टता प्राप्त करने के अवसर प्राप्त हों। सभी नयी रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र इकाइयाँ इस दिशा में सफलतापूर्वक आगे बढ़ी हैं। वित्त वर्ष 2019-20 में निगमीकरण से पहले आयुध निर्माणी बोर्ड का उत्पादन 12,755 करोड़ रुपए था, जो वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 26,282 करोड़ रुपए हो गया। रक्षा निर्यात के क्षेत्र में यह आँकड़ा निगमीकरण से पहले मात्र 81 करोड़ रुपए था, जो अब बढ़कर 4,561 करोड़ रुपए हो गया है, जिसमें यंत्र इंडिया लिमिटेड का योगदान 397 करोड़ रुपए है।"

सिंह सिंह ने कहा कि प्रतिस्पर्धी दुनिया में "अनुसंधान एवं विकास" तथा "पूंजी निवेश" किसी औद्योगिक इकाई को आगे बढ़ाने वाले प्रमुख तत्व हैं। उन्होंने कहा कि दीर्घकालिक प्रगति और प्रतिस्पर्धा के लिए अनुसंधान एवं विकास अत्यंत महत्वपूर्ण है और जो संगठन नवाचार को अपनाते हैं, वही भविष्य का नेतृत्व करते हैं।

पूंजी निवेश पर उन्होंने कहा कि नयी मशीनरी की स्थापना या आधुनिक उपकरणों में निवेश एक महत्वपूर्ण तकनीकी जुड़ाव प्रदान करता है। "आधुनिक मशीनरी के माध्यम से नयी प्रौद्योगिकियाँ विनिर्माण प्रणाली का हिस्सा बनती हैं, जिससे उत्पादन प्रक्रियाओं की दक्षता बढ़ती है, गुणवत्ता में सुधार होता है और पूरी प्रणाली अधिक आधुनिक एवं प्रभावी बनती है।"

रक्षा मंत्री ने जोर देकर कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को कुशल मशीनरी स्थापना और आधुनिकीकरण को प्राथमिकता देनी चाहिए, क्योंकि नवीनतम प्रौद्योगिकी और उन्नत उत्पादन प्रणालियों में निवेश भविष्य की प्रतिस्पर्धात्मकता के लिए आवश्यक है। उन्होंने कहा कि इससे कॉर्पोरेट इकाइयाँ राष्ट्रीय अपेक्षाओं को पूरा कर सकेंगी और वैश्विक मानकों पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा सकेंगी। उन्होंने रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र इकाइयों से बदलते समय के अनुरूप आगे बढ़ने के लिए सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों का अध्ययन और आवश्यकतानुसार उन्हें अपनाने का आह्वान किया।

फडणवीस ने अपने संबोधन में एल्यूमिनियम एक्सट्रूज़न प्रेस को प्रधानमंत्री के नेतृत्व और रक्षा मंत्री के मार्गदर्शन में आत्मनिर्भर और विकसित भारत के दृष्टिकोण को साकार करने की दिशा में एक बड़ा कदम बताया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के प्रयासों के कारण भारत रक्षा क्षेत्र में वैश्विक बाजार में एक प्रमुख निर्यातक के रूप में अपनी पहचान बना रहा है और विश्व भारत के रक्षा क्षेत्र की प्रगति को स्वीकार कर रहा है।

इस अवसर पर रक्षा उत्पादन सचिव संजीव कुमार, रक्षा उत्पादन विभाग की संयुक्त सचिव गरिमा भगत, यंत्र इंडिया लिमिटेड के संचालन निदेशक एवं अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक (अतिरिक्त प्रभार) विजयकुमार अय्यर, रक्षा उत्पादन विभाग एवं यंत्र इंडिया लिमिटेड के अन्य वरिष्ठ अधिकारी, रक्षा बलों के अधिकारी तथा उद्योग जगत के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

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