बिहार में स्वास्थ्य व्यवस्था का नया मॉडल, ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट से बदल सकती है सरकारी अस्पतालों की तस्वीर

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पटना 

बिहार की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था, डॉक्टरों की भारी किल्लत और मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर की कमियों को दूर करने के लिए राज्य सरकार ने अब तक का सबसे बड़ा और निर्णायक कदम उठाया है. बिहार सरकार ने सूबे के स्वास्थ्य ऊंचे और मेड‍िकल एजुकेशन को मजबूत करने के लिए प्राइवेट सेक्टर से हाथ मिलाने का पूरा मन बना लिया है। 

बुधवार को राजधानी पटना में बिहार सरकार ने देश भर के बड़े स्वास्थ्य संस्थानों, निवेशकों और दिग्गजों के साथ एक बेहद महत्वपूर्ण स्टेकहोल्डर मीटिंग (महा-मंथन) की. इस बैठक का मुख्य एजेंडा राज्य में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत नए मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों को ऑपरेट करना है. आइए समझते हैं कि आखिर बिहार सरकार का यह नया 'हेल्थ रोडमैप' क्या है और यह राज्य की सूरत कैसे बदलेगा। 

17 नए मेडिकल कॉलेज और 'ग्रीनफील्ड' प्रोजेक्ट्स का खाका
इस हाई-लेवल मीटिंग की कमान खुद विकास आयुक्त सह स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत और स्वास्थ्य सचिव कुमार रवि ने संभाली. बैठक में देश भर से आए 80 से अधिक बड़े हेल्थकेयर ऑर्गेनाइजेशन्स और कॉर्पोरेट घरानों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया. सरकार का मुख्य फोकस राज्य में आने वाले 17 नए मेडिकल कॉलेज अस्पतालों को 'ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट्स' (यानी बिल्कुल नए सिरे से स्क्रैच से बनने वाले प्रोजेक्ट्स) के रूप में विकसित और संचालित करना है। 

इस कंसल्टेशन मीटिंग के दौरान सरकार ने अपनी पूरी योजना और इंफ्रास्ट्रक्चर का ब्लूप्रिंट संभावित निवेशकों के सामने रखा और उनसे सीधे सुझाव मांगे. इस दौरान निवेश के अवसरों, प्रोजेक्ट स्ट्रक्चर, रेगुलेटरी अप्रूवल (सरकारी मंजूरियों) और राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के तौर-तरीकों पर गंभीर चर्चा हुई। 

क्यों पड़ी PPP मॉडल की जरूरत? 
बिहार में यह पूरा पीपीपी (PPP) कार्यक्रम मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के महत्वाकांक्षी 'सात निश्चय-3' रोडमैप का एक बेहद अहम हिस्सा है. सरकार का मानना है कि निजी क्षेत्र के आने से मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों के निर्माण और विकास में तेजी आएगी. नए मेडिकल कॉलेज खुलने से राज्य में मेडिकल सीटों का दायरा बढ़ेगा, जिससे हर साल सैकड़ों नए डॉक्टर्स तैयार होंगे और बिहार में डॉक्टरों की भारी कमी को दूर किया जा सकेगा। 

इस भारी-भरकम निजी निवेश से न सिर्फ एडवांस मेडिकल सुविधाएं आम जनता तक पहुंचेंगी, बल्कि स्वास्थ्य क्षेत्र में हजारों युवाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते भी खुलेंगे। 

अब आगे क्या?
स्वास्थ्य विभाग ने साफ किया है कि इस महा-मंथन के दौरान देश भर के प्राइवेट प्लेयर्स और इंवेस्टर्स से जो भी फीडबैक और सुझाव मिले हैं, उनका बारीकी से अध्ययन किया जाएगा. इसके आधार पर प्रोजेक्ट फ्रेमवर्क को अंतिम रूप दिया जाएगा और फिर इच्छुक निजी कंपनियों से बोलियां (Bids) आमंत्रित करने के लिए आधिकारिक तौर पर टेंडर जारी किया जाएगा। 

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