धमतरी जिले में 3.92 करोड़ रुपए के बोनस वितरण के साथ खुशहाली की नई बयार

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​रायपुर

छत्तीसगढ़ के वनाश्रित अंचलों में जीवन-यापन करने वाले तेंदूपत्ता संग्राहक परिवारों की आर्थिक समृद्धि, सामाजिक सुरक्षा और आजीविका सुदृढ़ीकरण की दिशा में राज्य शासन ने एक बड़ा और निर्णायक कदम उठाया है। लंबे समय से प्रतीक्षित प्रोत्साहन पारिश्रमिक (बोनस) की राशि अब सीधे संग्राहकों के बैंक खातों में पहुंचनी शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय द्वारा रायपुर स्थित कृषि मण्डपम में आयोजित राष्ट्रीय सहकारिता सप्ताह के दौरान वर्ष 2023 के तेंदूपत्ता संग्राहकों के लिए बोनस वितरण का शुभारंभ करने के बाद धमतरी जिले सहित प्रदेश भर में ऑनलाइन भुगतान की प्रक्रिया बेहद तेजी से पूरी की जा रही है।

पारंपरिक आजीविका का स्थायी और मजबूत आधार

​राज्य शासन का यह प्रयास केवल मौसमी रोजगार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पारंपरिक आजीविका को एक स्थायी और मजबूत आर्थिक आधार प्रदान करने की दिशा में एक समग्र रणनीति का हिस्सा है।

​3.92 रुपए करोड़ का स्वीकृत बोनस और प्रत्यक्ष हस्तांतरण ​

जिला लघु वनोपज सहकारी संघ मर्यादित, वनमंडल धमतरी के प्रबंध संचालक एवं वनमंडलाधिकारी के अनुसार, वर्ष 2023 के तेंदूपत्ता विक्रय से लाभ अर्जित करने वाली जिले की 25 प्राथमिक लघु वनोपज सहकारी समितियों के 212 फड़ों से जुड़े ग्रामों के 23,723 संग्राहक परिवारों के लिए कुल 3.92 करोड़ रुपए का प्रोत्साहन पारिश्रमिक स्वीकृत किया गया है।

​पारदर्शिता के साथ त्वरित भुगतान         

20 जुलाई 2026 तक 3.84 करोड़ रुपए की राशि  सीधे हितग्राहियों के बैंक खातों में अंतरित की जा चुकी है। पात्र शेष हितग्राहियों को भी त्वरित प्रक्रिया के तहत राशि सीधे स्थानांतरित की जा रही है। ​इसके साथ ही, राज्य सरकार ने वर्ष 2026 के लिए तेंदूपत्ता संग्रहण दर बढ़ाकर 5,500 रुपए प्रति मानक बोरा निर्धारित की है, जिससे संग्राहकों की आय में प्रत्यक्ष एवं उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है    

धमतरी जिले में तेंदूपत्ता संग्रहण के आंकड़ों पर नज़र डालें तो वर्ष 2026 के लिए 26 हजार 800 मानक बोरा का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। इसके विरुद्ध 26 हजार 550 संग्राहकों के सम्मिलित योगदान से 23 हज़ार 751 मानक बोरा तेंदूपत्ता का संग्रहण किया गया, जो कि कुल लक्ष्य का लगभग 88.70 प्रतिशत है। इस संग्रहण कार्य के बदले संग्राहकों को 13.07 करोड़ रुपए से अधिक का पारिश्रमिक भुगतान सफलतापूर्वक किया जा चुका है।​

वहीं, इससे पिछले वर्ष 2025 में जिले के 27 हजार 887 संग्राहकों ने भाग लिया था, जिनके द्वारा 25 हजार 275.63 मानक बोरा तेंदूपत्ता संग्रहित किया गया था। इस कार्य के लिए संग्राहकों को 13.90 करोड़ रुपए का पारिश्रमिक पूर्ण रूप से वितरित किया गया था। इसके अतिरिक्त, वर्ष 2022 के बोनस के रूप में भी 24 हजार 529 संग्राहकों को 6.33 करोड़ रुपए का भुगतान पूर्व में किया जा चुका है।

​सामाजिक सुरक्षा और कल्याणकारी योजनाओं का दायरा 

​तेंदूपत्ता संग्राहकों और उनके परिवारों के जीवन स्तर को सुधारने के लिए केवल वित्तीय प्रोत्साहन ही नहीं, बल्कि कई सामाजिक सुरक्षा और सुविधामूलक योजनाएं भी पूरी निष्ठा के साथ संचालित की जा रही है। वर्ष 2024-25 में 27 हजार 532 महिला संग्राहकों को चरण पादुकाएं वितरित की गईं। वहीं, सत्र 2025-26 में 28 हजार 723 पुरुष संग्राहकों को चरण पादुकाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। संघ संचालित इस योजना के तहत मई 2026 तक प्राप्त 258 मामलों में से 205 का निराकरण कर 24.60 लाख रूपए की आर्थिक सहायता दी जा चुकी है।  

​राजमोहिनी देवी सामाजिक सुरक्षा योजना के अंतर्गत 392 में से 339 प्रकरणों को स्वीकृति देते हुए 4.43 करोड़ रुपए की सहायता राशि वितरित कर संकट की घड़ी में परिवारों को संबल प्रदान किया गया।

​वनधन विकास, शिक्षा और पीएम जनमन से बदली तस्वीर

 ​वनाश्रित क्षेत्रों में शिक्षा के उजियारे और नए स्वरोजगार के अवसरों को बढ़ावा देने के लिए जिला वनोपज सहकारी यूनियन धमतरी की भूमिका महत्वपूर्ण रही है।

शिक्षा प्रोत्साहन योजना ​

शैक्षणिक वर्ष 2024-25 में संग्राहक परिवारों के 347 छात्र-छात्राओं को उच्च शिक्षा व्यावसायिक एवं गैर- व्यावसायिक पाठ्यक्रम हेतु 39.13 लाख रुपए की छात्रवृत्ति प्रदान की गई, जिससे मेधावी बच्चों को अपनी प्रतिभा निखारने का अवसर मिल रहा है।

 वनधन विकास एवं न्यूनतम समर्थन मूल्य

 वर्ष 2025-26 के दौरान न्यूनतम समर्थन मूल्य योजना के तहत 144.68 क्विंटल लघु वनोपज का संग्रहण कर 64 संग्राहकों को 3.50 लाख रुपए का भुगतान किया गया, जिससे स्थानीय वनोपज संग्रहण को मजबूत आर्थिक आधार मिला।

पीएम जनमन योजना और विशेष पिछड़ी जनजातियां

 ​विशेष पिछड़ी जनजाति कमार समुदाय के आर्थिक उत्थान के लिए कल्लेमेटा में एक आधुनिक वनधन विकास केंद्र स्थापित किया गया है। यहाँ महिला स्व-सहायता समूहों को दोना-पत्तल निर्माण, बांस आधारित उत्पाद निर्माण और विभिन्न स्वरोजगार गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है, जिससे न केवल स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजित हो रहा है, बल्कि जनजातीय परिवारों की आय में भी आत्मनिर्भर वृद्धि हो रही है।

तेंदूपत्ता संग्रहण से लेकर बोनस के direct bank transfer (DBT), सामाजिक सुरक्षा बीमा, नि:शुल्क चरण पादुका वितरण, बच्चों की शिक्षा के लिए छात्रवृत्ति और 'पीएम जनमन' के जरिए स्वरोजगार तक—राज्य सरकार की नीतियां धमतरी के वनाश्रित अंचलों में सकारात्मक बदलाव की एक नई कहानी लिख रही हैं।

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