ट्रेन की देरी बनी करोड़ों का आइडिया! एक ऐप बनाया और Google ने ₹280 करोड़ में खरीद लिया

Date:

 नई दिल्ली

कई बार रोजमर्रा की छोटी-सी परेशानी ही किसी बड़े आइडिया की शुरुआत बन जाती है. Where is My Train ऐप की कहानी भी कुछ ऐसी ही है. ट्रेन के लेट होने और उसकी सही लोकेशन पता नहीं चलने की परेशानी से एक ऐसा ऐप बनाने का आइडिया आया, जो आज लाखों यात्रियों के काम आता है. आइए जानते हैं इसके बारे में। 

 जानिए कैसे बनाया गया ऐप
अहमद निजाम और उनकी टीम ने ट्रेन से सफर करने वाले लोगों की इसी परेशानी को समझा. रेलवे स्टेशन पर यात्रियों को अक्सर यह पता नहीं होता था कि ट्रेन कहां पहुंची है और स्टेशन पर आने में उसे कितना समय लगेगा. ट्रेन लेट होने पर यह परेशानी और भी बढ़ जाती थी। 

इसी समस्या को हल करने के लिए टीम ने व्हेयर इज़ माई ट्रेन ऐप तैयार किया. इसे साल 2015 में लॉन्च किया गया था. ऐप का मकसद काफी आसान था. यात्रियों को उनकी ट्रेन की सही लोकेशन और दूसरी जरूरी जानकारी एक ही जगह पर मिल सके। 

ऐप का सबसे खास फीचर
इस ऐप की सबसे खास बात इसका ऑफलाइन ट्रेन ट्रैकिंग फीचर था. यानी कई मामलों में यूजर बिना इंटरनेट और GPS के भी ट्रेन की लोकेशन पता कर सकता था. इसके लिए ऐप मोबाइल टावर से मिलने वाली जानकारी का इस्तेमाल करता था. भारत में ऐसे कई इलाके हैं, जहां इंटरनेट कनेक्शन कमजोर रहता है. ऐसे में यह फीचर यात्रियों के लिए काफी काम का साबित हुआ। 

ऐप में सिर्फ ट्रेन की लोकेशन ही नहीं, बल्कि कई दूसरी सर्विस भी दी गईं. इसमें लाइव ट्रेन स्टेटस, ट्रेन का टाइमटेबल, PNR स्टेटस, प्लेटफॉर्म की जानकारी और कोच की स्थिति जैसी सुविधाएं शामिल थीं. यही वजह रही कि धीरे-धीरे यह ऐप यात्रियों के बीच काफी लोकप्रिय हो गया। 

जानिए गूगल ने कैसे खरीदा
ऐप की बढ़ती पॉपुलैरिटी ने Google का ध्यान अपनी तरफ खींचा. साल 2018 में गूगल ने व्हेयर इज़ माई ट्रेन बनाने वाली कंपनी Sigmoid Labs को खरीद लिया. इस डील की ऑफिशियल कीमत गूगल की तरफ से सार्वजनिक नहीं की गई थी. हालांकि, कई मीडिया रिपोर्ट्स में इस डील की कीमत करीब 280 करोड़ रुपये बताई गई। 

इस पूरी कहानी की खास बात यह है कि शुरुआत किसी बड़ी कंपनी या बड़े निवेश से नहीं, बल्कि एक आम समस्या को हल करने के आइडिया से हुई थी. ट्रेन के लेट होने जैसी छोटी परेशानी से शुरू हुआ यह आइडिया आगे चलकर करोड़ों रुपये की डील तक पहुंच गया। 

व्हेयर इज़ माई ट्रेन की कहानी यह बताती है कि अगर किसी रोजमर्रा की समस्या का आसान और काम का समाधान तैयार किया जाए, तो वह बड़ी संख्या में लोगों की जिंदगी आसान कर सकता है. यही वजह है कि यह ऐप ट्रेन से सफर करने वाले यात्रियों के लिए काफी उपयोगी साबित हुआ। 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

spot_imgspot_img

Popular

More like this
Related

PF खाताधारकों के लिए बड़ी खबर! EPFO 3.0 में ATM-UPI से जोड़ने का प्लान

 नई दिल्ली प्रोविडेंट फंड (PF) से पैसे निकालने वाले करोड़ों...

दुबई शिफ्ट होने के बाद भी नहीं मिला पीछा! मंदाना करीमी के दोस्तों को भेजे जा रहे फर्जी ईमेल

मुंबई  ‘बिग बॉस’ फेम मंदाना करीमी एक बार फिर सुर्खियों...

Apple Event 2026: 9 सितंबर को होगा बड़ा धमाका, iPhone 18 Pro समेत Foldable Ultra पर नजर

 नई दिल्ली Apple का इस महीने एक बड़ा इवेंट आयोजित...