रांची
जेपीएससी मेधा घोटाला मामले की जांच कर रही सीआईडी ने गिरफ्तार अभ्यर्थी हजारीबाग के बड़कागांव निवासी सुमन सौरभ का भी बयान दर्ज किया है।
उसने सीआईडी को बताया है कि उसे 14वीं जेपीएससी परीक्षा को अंतिम रूप से चयन कराने के एवज में उससे 80 लाख में पवन नामक एजेंट ने सौदा किया था। इसमें 20 लाख रुपये पीटी के पहले, 40 लाख रुपये मुख्य परीक्षा के पहले व 20 लाख रुपये साक्षात्कार के पहले देना था।
पीटी परीक्षा पास करने पर उसका विश्वास जम गया था। उसने पीटी परीक्षा पास कराने के एवज में तय राशि में केवल 16 लाख रुपये ही दिया था, जो कुल पांच किश्तों में दिया था। रिश्वत की राशि बैंक में दी थी। अब सीआईडी उसका व आरोपित पवन के बैंक खाते का ब्यौरा खंगाल रही है। रुपये कैसे-कैसे व कहां-कहां ट्रेवेल किए, यह जानकारी जुटाई जा रही है।
पीटी सफल अभ्यर्थी सुमन सौरभ ने सीआईडी को बताया है कि वर्ष 2020 में स्नातक उत्तीर्ण होने के बाद वह प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा था। दो बार जेपीएससी परीक्षा में शामिल हुआ। सातवीं व ग्यारहवीं में असफल रहा।
इसके बाद वर्ष 2023 में जेएसएससी की सीजीएल परीक्षा में भी असफल हो गया। इन तीनों ही परीक्षाओं में कई परिचित साथी सफल हो गए। इसके चलते वह परेशान रहने लगा। वह सुना था कि बिना सेटिंग के कोई उपाय नहीं है।
इसके बाद उसके दोस्त दिवाकर कुमार के मामा प्रकाश कुमार के बारे में जानकारी मिली। यह भी पता चला कि प्रकाश कुमार हजारीबाग के हरली के रहने वाले हैं और एनटीपीसी व अन्य जगहों पर लोगों को अनुबंध पर काम लगवाते हैं। सुमन सौरभ ने प्रकाश कुमार से मुलाकात की और फिर उनसे जान-पहचान हो गई।
और फिर हुई एजेंट पवन कुमार से मुलाकात
सुमन सौरभ के अनुसार, उसके दोस्त दिवाकर कुमार के मामा प्रकाश कुमार ने पूरी बात सुनने के बाद उसकी मुलाकात एजेंट पवन सिंह से कराई जो जेपीएससी की परीक्षाओं में सेटिंग कराता था। पवन ने ही उसे बताया कि 14वीं जेपीएससी की वैकेंसी निकली है, वह पास करवा देगा, लेकिन इसके एवज में कुल 80 लाख रुपये लगेंगे।
किश्त भी बंट गई कि 20 लाख रुपये पीटी पास कराने पर, 40 लाख रुपये मेंस व 20 लाख रुपये साक्षात्कार पास कराने पर देने होंगे। पैसा किश्तों देना था तो सुमन सौरभ तैयार हो गया।
पवन ने कहा था कि जिस प्रश्न का उत्तर आता हो उसे ही भरना है, बाकी छोड़ देना है। 19 अप्रैल 2026 को बोकारो के सरस्वती शिशु विद्या मंदिर स्थित परीक्षा केंद्र पर सुमन सौरभ की परीक्षा हुई। पहली पाली में उसने केवल 38 प्रश्न का उत्तर बनाया और शेष ओएमआर शीट खाली छोड़ दिया। वहीं दूसरी पाली में केवल 48 प्रश्न का उत्तर बनाकर ओएमआर शीट खाली छोड़ दिया। अपना क्रमांक व कार्बन कापी पवन सिंह को दे दी।
प्रारंभिक परीक्षा देने के बाद स्थानांतरित की रिश्वत की राशि
सुमन सौरभ के अनुसार, उसने प्रारंभिक परीक्षा देने के बाद अपने पिता के खाते से पवन सिंह के एक्सिस बैंक रांची के खाते में चार किश्त में 12 लाख रुपये स्थानांतरित की। दो जुलाई 2026 को परीक्षा परिणाम आने के बाद और चार लाख रुपये स्थानांतरित की। परीक्षा परिणाम आने के बाद उसका ओएमआर शीट इंटरनेट मीडिया पर वायरल हो गया था। इसके बाद सीआइडी जांच शुरू हो गई और वह पकड़ा गया।
कुछ सफल अभ्यर्थियों ने कहा, रिश्वत या सिफारिश की बदौलत नहीं, अपनी प्रतिभा से पाई है नौकरी
13वीं जेपीएससी प्रतियोगिता परीक्षा में चयनित दो ऐसे अभ्यर्थी भी सामने आए हैं, जो यह बता रहे हैं कि वे रिश्वत व किसी सिफारिश से नहीं, बल्कि अपनी प्रतिभा की बदौलत चयनित हुए हैं। वे पुलिस के सामने इसका सबूत भी देंगे। इन प्रतिभागियों में एक डीएसपी के पद पर चयनित है।
उसने बताया है कि उसे पूर्व में भी जेपीएससी की परीक्षा में साक्षात्कार तक पहुंचे जिसमें उन्हें 62 अंक मिले थे। इसके चलते वह असफल हो गया था। 13वीं जेपीएससी में उसे 66 अंक मिले और वह वर्तमान में डीएसपी हैं। वह जेपीएससी की सदस्य डॉ. अजिता भट्टाचार्य के बोर्ड के सामने बैठा था, इसका मतलब यह थोड़े न हुआ कि वह पैसे देकर सफल हुआ। यह गलत आरोप है।
दूसरे सफल एक अन्य अभ्यर्थी ने भी अपनी प्रतिभा की बदौलत परीक्षा में सफल होने की बात कही है और अभय तिवारी के लगाए गए आरोपों को खारिज किया है।
गौरतलब है कि अभय तिवारी ने सीआइडी की पूछताछ में स्वीकार किया था कि 11वीं से 13वीं जेपीएससी सिविल सेवा प्रतियोगिता परीक्षा में जेपीएससी के सदस्य डॉ. अजिता भट्टाचार्य, डॉ. जमाल अहमद, तत्कालीन अध्यक्ष एल. खियांग्ते आदि के सिंडिकेट ने सेटिंग कराकर सात अभ्यर्थियों को साक्षात्कार में लाभ पहुंचाया था।
इस सिंडिकेट में कोचिंग संचालक सह एजेंट आदित्य पांडेय, डॉ. अजिता भट्टाचार्य के पीए ब्रजराम, परीक्षा संचालित कराने वाली एजेंसी टीडीपीएल के निदेशक रामवीर सिंह, एल. खियांग्ते का कंप्यूटर आपरेटर धर्मेंद्र कुमार आदि शामिल थे। सिर्फ साक्षात्कार में मदद पहुंचाने के एवज में 15-15 लाख रुपये प्रति अभ्यर्थी की वसूली हुई थी।

