चंडीगढ़.
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के पत्र ने पंजाब की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है। ईडी ने पंजाब के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) गौरव यादव को पत्र भेजकर निजी व्यक्ति नितिन गोहल और अन्य के खिलाफ एफआइआर दर्ज करने का आधार बताया है।
ईडी का दावा है कि पीएमएलए के तहत की गई जांच में ऐसे तथ्य सामने आए हैं। जांच में ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जिनसे भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम और भारतीय दंड संहिता की कई धाराओं के तहत संज्ञेय अपराध बनते हैं। इसके बाद पंजाब सरकार अब इस मामले में एफआइआर दर्ज करने समेत आगे की कार्रवाई के विकल्पों पर विचार कर रही है। डीजीपी ने ब्यूरो आफ इन्वेस्टिगेशन (बीओआइ) से उपलब्ध कानूनी रास्तों और ईडी के आरोपों पर राय मांगी है।
क्या है पूरा मामला
ईडी की जांच पीएमएलए के तहत दर्ज ईसीआइआर जेएलजेडओ/21/2024 से जुड़ी है। यह मामला अजय सहगल और इंडियन कोआपरेटिव हाउसिंग बिल्डिंग सोसायटी से जुड़े लोगों के खिलाफ जांच से संबंधित है। ईडी के अनुसार जांच में आरोप सामने आए कि सरकारी अधिकारियों के माध्यम से कुछ रियल एस्टेट संस्थाओं को जमीन के इस्तेमाल में बदलाव यानी सीएलयू की सुविधा दिलाने की कोशिश की गई। इसी जांच के दौरान नितिन गोहल सहित कुछ लोगों की भूमिका एजेंसी के निशाने पर आई। ईडी ने आरोप लगाया कि गोहल ने मुख्यमंत्री के विशेष कार्य अधिकारी (ओएसडी) राजबीर घुम्मण से अपने संपर्क का इस्तेमाल सरकारी कामकाज को प्रभावित करने के लिए किया।
बिचौलिये की निभाई भूमिका
एजेंसी का दावा है कि गोहल अधिकारियों के तबादलों और तैनातियों, गोपनीय सरकारी दस्तावेजों, हथियार लाइसेंस, सुरक्षा संबंधी मंजूरियों तथा अन्य सरकारी लाभों के मामलों में बिचौलिये की भूमिका निभा रहा था। ईडी के मुताबिक इन कथित गतिविधियों के बदले गोहल ने राजबीर घुम्मण और उनके सहयोगियों के साथ मिलकर नकद, जमीन और अन्य माध्यमों से करीब दो करोड़ रुपये की अपराध से अर्जित आय एकत्र की।
तलाशी में दस्तावेज-नकदी मिलने का दावा
ईडी ने सात से 10 मई के बीच नितिन गोहल, अजय सहगल, सुरेश कुमार बजाज और सोसायटी से जुड़े अन्य लोगों के परिसरों की तलाशी ली थी। एजेंसी के अनुसार इस कार्रवाई में कई दस्तावेज और अन्य महत्वपूर्ण सूचनाएं मिलीं। ईडी ने करीब एक करोड़ रुपये नकद बरामद करने का भी दावा किया है। इसके अलावा 20 लाख रुपये वाली एक थैली मिलने की बात कही गई है, जिसे एजेंसी के अनुसार खरड़ स्थित गोहल के फ्लैट से बाहर फेंका गया था। जांच के दौरान ईडी ने गोहल के मोबाइल फोन से मिले 21 वाट्सऐप चैट, कॉल रिकार्ड और दस्तावेजों को भी अपने आरोपों का आधार बनाया है। ये चैट 20 सितंबर 2023 से 18 मार्च 2026 के बीच की बताई गई हैं। ईडी का दावा है कि इनमें पुलिस, पंजाब सिविल सर्विसेज, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति, मार्कफेड और ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथारिटी (गमाडा) से जुड़े अधिकारियों के तबादलों और तैनातियों का उल्लेख है।
नीतिगत फैसलों में दखल का भी आरोप
ईडी ने आरोप लगाया है कि गोहल ने सरकारी अधिकारियों और विभागों से संबंधित नीतिगत फैसलों, नियमों में संशोधन, प्रशासनिक मंजूरियों, टेंडर की शर्तों, लाइसेंसिंग और अन्य सरकारी मामलों को प्रभावित करने की कोशिश की। एजेंसी ने फोर्टिफाइड चावल की आपूर्ति से जुड़े टेंडर और डीएसपी के तबादलों का भी उल्लेख किया है।
रियल एस्टेट से जुड़े मामलों का जिक्र
रियल एस्टेट से जुड़े मामलों में जमीन के इस्तेमाल में बदलाव, गमाडा की मंजूरियों, संपत्ति विवादों और निजी विकासकर्ताओं से संबंधित मामलों का जिक्र किया गया है। ईडी ने मोहाली के फेज-7 में प्लाट डी-156 के कथित लेनदेन का भी उल्लेख करते हुए कहा है कि इसमें भुगतान का एक बड़ा हिस्सा नकद में किया गया था। ईडी ने पंजाब स्माल इंडस्ट्रीज एंड एक्सपोर्ट कारपोरेशन लिमिटेड (पीएसआइईसी) से संबंधित एक मामले में कथित तौर पर अनअर्नड इंक्रीज की राशि वसूल नहीं किए जाने का भी जिक्र किया है। एजेंसी ने ट्रैवल एजेंटों के रिकार्ड का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि गोहल ने राजबीर घुम्मण और बीर देविंदर के हवाई टिकटों तथा होटल में ठहरने के खर्च का भुगतान भी किया। पत्र में एक करण भूषण से हवाला के जरिये कथित भुगतान का भी उल्लेख है।
ईडी ने धाराओं का दिया हवाला
ईडी ने अपने पत्र में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 और आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम के प्रावधानों के अलावा भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी (आपराधिक साजिश), 420 (धोखाधड़ी), 467 (मूल्यवान दस्तावेज की जालसाजी) और 471 (फर्जी दस्तावेज को वास्तविक बताकर इस्तेमाल करना) का हवाला दिया है। एजेंसी ने सुप्रीम कोर्ट के विजय मदनलाल चौधरी और ललिता कुमारी से संबंधित फैसलों का भी उल्लेख करते हुए कहा है कि उपलब्ध सामग्री के आधार पर एफआइआर दर्ज किए जाने का आधार बनता है।
गोहल ने आरोपों को बताया गलत
नितिन गोहल ने ईडी के आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि राजबीर घुम्मण उनके पुराने मित्र हैं और वह उनके कार्यालय में निजी सहायक के तौर पर मदद करते रहे हैं। गोहल ने आरोप लगाया कि ईडी ने प्रशासनिक बातचीत और चैट को गलत संदर्भ में पेश किया है। उन्होंने नकदी वाली थैली के आरोप को भी गलत बताया और कहा कि पूछताछ के दौरान ईडी अधिकारियों ने स्वीकार किया था कि थैली उनकी नहीं थी। हवाला लेनदेन के आरोप पर भी गोहल ने इसे गेम कोड से संबंधित एक मित्र के साथ बातचीत बताया।
राजनीतिक विवाद भी तेज
ईडी का पत्र सामने आने के बाद पंजाब में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस, शिरोमणि अकाली दल और भाजपा ने मामले को लेकर सवाल उठाते हुए जांच की मांग की है। विपक्ष का आरोप है कि ईडी के पत्र में सरकारी कामकाज को प्रभावित करने और कथित भ्रष्टाचार से जुड़े गंभीर तथ्य सामने आए हैं। वहीं, पंजाब सरकार ने केंद्र सरकार और केंद्रीय जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार ने इसे राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश बताया है। वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ईडी, सीबीआइ और आयकर विभाग जैसी एजेंसियों का इस्तेमाल विपक्षी नेताओं और राज्य सरकारों पर दबाव बनाने के लिए कर रही है।
अब डीजीपी की कानूनी राय पर नजर
ईडी के पत्र के बाद फिलहाल सबसे अहम सवाल यह है कि पंजाब पुलिस इस मामले में एफआइआर दर्ज करती है या नहीं। डीजीपी गौरव यादव ने बीओआइ से ईडी द्वारा उपलब्ध कराई गई सामग्री और कानूनी विकल्पों पर इनपुट मांगा है। इसके बाद सरकार यह तय करेगी कि ईडी के आरोपों के आधार पर किस स्तर पर और किस कानून के तहत कार्रवाई की जा सकती है। ऐसे में बीओआइ की कानूनी जांच और डीजीपी की अगली कार्रवाई पर पूरे मामले की दिशा निर्भर करेगी।

