ईरान युद्ध के बीच ट्रंप की बढ़ी चिंता, अमेरिका का क्रूड ऑयल रिजर्व 1982 के बाद सबसे कम

Date:

नई दिल्ली

ईरान युद्ध ने डोनाल्ड ट्रंप का खेल खराब कर दिया है और इसके जंग से एक के बाद एक बड़ा संकट अमेरिका पर खड़ा होता दिख रहा है. US-Iran War के चलते दुनिया के तमाम ऐसे देशों में तेल-गैस संकट गहराया, जो इसके आयात पर निर्भर हैं. तो वहीं अमेरिका में भी महंगाई दर से लेकर पेट्रोल के दाम बढ़ने तक ने ट्रंप की टेंशन बढ़ा दी है. अब एक नई परेशानी देखने को मिली है. दरअसल, अमेरिका के स्ट्रेटिजिक रिजर्व में कच्चे तेल का भंडार 1982 के बाद से अपने सबसे निचले स्तर पर आ गया है। 

कच्चे तेल की कीमत में उछाल जारी 
सबसे पहले बात कर लेते हैं कच्चे तेल की लेटेस्ट कीमत के बारे में, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल वायदा में 52 सेंट या 0.47% की वृद्धि हुई और यह 0628 GMT तक 110.07 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जबकि पिछले सत्र में यह 110.70 डॉलर तक पहुंचा था, जो 20 मई के बाद का इसका उच्चतम स्तर है. इसके अलावा WTI Crude Oil Price 100 डॉलर पर ट्रेड कर रहा है, तो वहीं मर्बन क्रूड का दाम 111 डॉलर प्रति बैरल का स्तर पार कर गया है। 

अमेरिका में ये संकट गहराया
अब बताते हैं अमेरिका और डोनाल्ड ट्रंप की नई टेंशन के बारे में, तो अमेरिकी ऊर्जा विभाग के आंकड़ों के अनुसार, सामरिक पेट्रोलियम रिजर्व (SPR) में अमेरिकी कच्चे तेल का भंडार पिछले सप्ताह घटकर 282.7 मिलियन बैरल रह गया और ये आंकड़ा अक्टूबर 1982 के बाद से सबसे निचला स्तर है. ऐसा इसलिए हुआ, क्योंकि 172 मिलियन बैरल तेल जारी करने के समझौते के तहत निकासी खाड़ी क्षेत्र में ऊर्जा आपूर्ति को लेकर बढ़ती चिंताओं के साथ हुई. मतलब इसके पीछे बड़ा रोल ईरान युद्ध का रहा है। 

जहाजों पर हमलों से तेल में आग  
तेल-गैस के जहाजों की ट्रैकिंग फर्म केप्लर ने बताया कि दो सप्ताह में कम से कम 18 जहाजों पर हमले हुए हैं, जिससे तेल की कीमतों में जोखिम प्रीमियम बरकरार है. यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के एनर्जी साइट्स, एयरपोर्ट्स और सैन्य ठिकानों पर हमलों की जिम्मेदारी ली है, जिनमें यानबू में अरामको का एक प्लांट और शायबाह ऑयल साइट शामिल हैं. सोमवार को यमन के शबवा प्रांत में सरकारी सुरक्षा बलों के ट्रेनिंग कैंप पर हूती हमले में 58 लोग मारे गए और 200 से अधिक लोग घायल हो गए, जिससे क्षेत्रीय स्थिरता और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ गईं हैं। 

क्या कहते हैं एक्सपर्ट? 
ING के एनालिस्ट कहते हुए नज
र आ रहे हैं कि अस्थिरता के बीच तेल बाजार में जोखिम प्रीमियम काफी अधिक है, जो ऑयल फ्लो को सुचारू रहने पर धीरे-धीरे कम हो सकता है, लेकिन अभी तक अस्थिरता में कमी के कोई संकेत नहीं मिले हैं. इसके अलावा एक्सपर्ट कहते हैं कि रूस से संबंधित प्रतिबंधों और शुल्कों को लेकर अनिश्चितता ने भी बाजार की भावना को प्रभावित किया. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने रूस से जुड़े प्रमुख प्रतिबंधों और शुल्कों को हटाने का कार्यकारी आदेश जारी किया, लेकिन कहा कि उन्होंने अभी अंतिम निर्णय नहीं लिया है. विदेश मंत्री मार्को रुबियो का इस संबंध में कहना है कि अधिकारियों को स्थिति का आकलन करने के लिए और समय चाहिए। 

अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी ने बताया कि सितंबर में रूसी कच्चे तेल का उत्पादन 65,000 बैरल प्रति दिन बढ़कर 8.43 मिलियन बैरल प्रति दिन हो गया, जो पिछले वर्ष के स्तर से लगभग 870,000 बैरल प्रति दिन कम रहा. KCM ट्रेड के चीफ एनालिस्ट टिम वाटरर के मुताबिक, रूस से डीजल की अतिरिक्त आपूर्ति से कुछ राहत मिली है, लेकिन व्यापारी मिडिल ईस्ट के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर  को और अधिक नुकसान होने के जोखिम पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

spot_imgspot_img

Popular

More like this
Related

ईरान-अमेरिका तनाव बढ़ा, नौसैनिक ठिकाने पर हमले से होर्मुज संकट गहराया

तेहरान   ईरान जंग की आग ठंडी पड़ने के बजाय और...

आबूरोड-रेवदर हाईवे पर दर्दनाक हादसा, अंबाजी दर्शन को जा रहे तीन दोस्तों की मौत

सिरोही/आबूरोड  राजस्थान के सिरोही जिले में आबूरोड-रेवदर स्टेट हाईवे पर...