अमेरिका से तनाव के बीच भारत की बड़ी तैयारी, 30 देशों में भारतीय सामान पर जीरो ड्यूटी

Date:

नई दिल्ली

चंद महीनों पहले की बात है. अमेर‍िका ने भारत पर 50 फीसदी टैर‍िफ लगाया तो लगा सारे रास्‍ते बंद हो गए हैं. एक के बाद एक बुरी खबरें आने लगीं. ट्रंप 100 फीसदी, 200 फीसदी टैर‍िफ की धमकी देने लगे. सरकार थोड़ी हैरान जरूर थी, लेकिन ट्रंप के सनकीपन के बारे में शायद पता था. इसील‍िए कुछ ही द‍िनों बाद सरकार ने नए रास्‍ते खोलने शुरू कर द‍िए. सबसे पहले अमेर‍िका के ही सबसे करीबी देशों यूरोप को पार्टनर बनाया. अफ्रीका के साथ डील की. एश‍िया के कई देशों से हाथ म‍िलाया. एक के बाद एक ट्रेड डील ने ऐसे हालात बना द‍िए क‍ि ट्रंप को भी कहना पड़ा क‍ि हम भारत के साथ डील करना चाहते हैं. अब वही ट्रंप म‍िडटर्म इलेक्‍शन हार गए हैं. उनके हाथ बंध गए हैं. अब वे कड़े फैसले लेने से पहले कई बार सोचेंगे. ये सब देखकर एक्‍सपर्ट कह रहे क‍ि साल भर की मेहनत का नतीजा अब द‍िखेगा. भारत की ट्रेड ड‍िप्‍लोमेसी से कमाई के नए रास्‍ते खुलने वाले हैं। 

यूरोप के साथ ट्रेड डील चंद महीनों में लागू होने वाली है, जो भारतीय व्‍यापार‍ियों को 27 देशों में खुलकर कारोबार करने के मौके देगी. इसके अलावा यूएई, ओमान, ब्रिटेन, ऑस्‍ट्रेल‍िया , न्यूजीलैंड, मॉरीशस, सिंगापुर नेपाल, साउथ कोर‍िया, स्विट्जरलैंड, नॉर्वे, आइसलैंड, लिकटेंस्टीन जैसे तमाम देशों के साथ भारत ने अलग से ट्रेड डील की है, जो लागू भी हो चुकी है. हम आपको यहां कुछ फैक्‍ट्स दे रहे हैं। 

जहां भारत के ल‍िए खुला बाजार
    यूएई- भारत ने यूएई के साथ ट्रेड डील की है. भारत के 99 फीसदी प्रोडक्‍ट वहां टैर‍िफ फ्री हैं. भारत चाहता है क‍ि बाइलेटरल ट्रेड अगले 7 सालों में 200 अरब डॉलर तक पहुंच जाए. अभी भारत का एक्‍सपोर्ट स‍िर्फ 38 अरब डॉलर के आसपास है. यानी यहां काफी उम्‍मीद है। 

    ऑस्‍ट्रेल‍िया- यहां भी भारतीय प्रोडक्‍ट पर शून्‍य ड्यूटी लगती है. ऑस्‍ट्रेल‍िया के साथ अभी भारत का एक्‍सपोर्ट 7.28 अरब डॉलर है. इसे तीन गुना करने का भारत का टारगेट है। 

    स्विट्जरलैंड, नॉर्वे, आइसलैंड और लिकटेंस्टीन के साथ TEPA लागू. भारत में 15 साल में 100 अरब डॉलर निवेश की प्रतिबद्धता और 10 लाख रोजगार की संभावना है। 

    ओमान के साथ जून 2026 में डील लागू हुई. 98.08% टैरिफ लाइनों पर भारतीय उत्पादों को जीरो ड्यूटी. FY26 निर्यात 4.02 अरब डॉलर है, इसे दोगुना करने का लक्ष्‍य है। 

    ब्रिटेन के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट जुलाई 2026 में लागू हुआ. इससे करीब 99% भारतीय एक्‍सपोर्ट को शुल्क मुक्त बाजार पहुंच म‍िल गई है. FY26 एक्‍सपोर्ट 13.44 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है। 

    न्यूजीलैंड के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट अक्टूबर 2026 में लागू हुआ. भारत के 100% निर्यात पर जीरो ड्यूटी. 20 अरब डॉलर निवेश की प्रतिबद्धता. 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार 7 अरब का लक्ष्य। 

पुरानी ट्रेड डील जहां रास्‍ते और खुले
भारत ने आस‍ियान देशों के साथ कारोबार के नए रास्‍ते खोले हैं. स‍िंगापुर, जापान, नेपाल, साउथ कोर‍िया, मलेश‍िया, श्रीलंका, थाईलैंड, भूटान, साउथ एश‍ियाई देशों के साथ डील का भारत लगातार फायदा उठा रहा है. जो एक्‍सपोर्ट चंद करोड़ों डॉलर का हुआ करता था, वह अब अरबों डॉलर को पार कर रहा है। 

यहां बातचीत पूरी, लागू होने की तैयारी
    यूरोपीय यून‍ियन के साथ बातचीत पूरी हो चुकी है. 27 देशों का लगभग 24 ट्र‍िल‍ियन डॉलर की ज्‍वाइंट इकाॅनमी है. भारत अभी स‍िर्फ 75 अरब डॉलर का एक्‍सपोर्ट है. भारत इसे पांच साल में तीन गुने करने का इरादा रखता है। 

    अमेर‍िका के साथ ट्रेड डील ट्रंप के फैसलों की वजह से अटकी पड़ी है. अमेर‍िका चाहता था क‍ि भारत एग्रीकल्‍चर और डेयरी सेक्‍टर खोले भारत तैयार नहीं है. अगर यह डील हो जाती है तो भारत के फार्मा, टेक्‍सटाइल, इंजीन‍ियर‍िंग और आईटी सर्विसेज को बड़े अवसर म‍िल जाएंगे। 

    इजरायल-कनाडा के साथ भी एफटीए पर बात हो रही है. यहां भारत को ड‍िफेंस, एग्रीकल्‍चर टेक्‍नोलॉजी, एआई, फार्मा और केम‍िकल सेक्‍टर में बड़े मौके म‍िल सकते हैं। 
    च‍िली, पेरू के अलावा रूस के साथ भी भारत ने बातचीत पूरी कर ली है. इंजीन‍ियरिंग, फार्मा, केम‍िकल सेक्‍टर में खूब मौके म‍िलने वाले हैं. वाहन कलपुर्जे, फार्मा इंजीन‍ियरिंग सेक्‍टर में अवसर म‍िल सकता है। 

एक्‍सपर्ट क्‍या कह रहे

एमके ग्‍लोबल फाइनेंश‍ियल सर्विसेस की र‍िपोर्ट के मुताबिक- ट्रंप अब इमरजेंसी इकोनॉम‍िक पावर एक्‍ट का बेजा इस्‍तेमाल करके जबरदस्‍ती भारत पर टैर‍िफ नहीं लगा पाएंगे, क्‍योंक‍ि उनके हाथ बंध जाएंगे. अगर वे कुछ करना भी चाहें तो उनके पास स‍िर्फ सेक्‍शन 301 और सेक्‍शन 232 ही रास्‍ता होगा. लेकिन इसका प्रॉसेस इतना धीमा है क‍ि जब तक लागू होगा, तब तक नए इलेक्‍शन आ जाएंगे। 

एमसी ग्‍लोबल स‍िक्‍योर‍िटीज का कहना है क‍ि म‍िडटर्म इलेक्‍शन में ट्रंप की हार से डॉलर कमजोर होगा. तेल की कीमतों में नरमी आएगी. रुपया मजबूत होगा. यह सबकुछ भारत के ल‍िए पॉज‍िट‍िव साइन है. इससे भारतीय न‍िर्यातकों की संभावनाएं बेहतर होंगी. भारतीय संपत्‍त‍ियों पर जोख‍िम कम होगा. ये भी हो सकता है क‍ि दबाव में आकर अमेर‍िका भारत के साथ र‍िश्ते बेहतर करने के ल‍िए कुछ और फैसले ले। 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

spot_imgspot_img

Popular

More like this
Related

TVS M1-S की एंट्री से इलेक्ट्रिक स्कूटर बाजार में हलचल, सिंगल चार्ज में चलेगा 120 KM

मुंबई  टीवीएस मोटर ने ईआईसीएमए 2026 में अपने उत्पादन-अनुरूप एम1-एस...

ग्रेटर नोएडा वेस्ट को जाम से मिलेगी राहत, 6 लेन अंडरपास का 3 दिन ट्रायल शुरू

  नोएडा ग्रेटर नोएडा वेस्ट में रहने वाले लोगों के...

Medical PG Admission: MD-MS में सीट मिली तो करना होगा ये काम, वरना रद्द होगा एडमिशन

रायपुर  NEET PG Admission 2026: प्रदेश के सरकारी व निजी...