Bhopal News: महिला अपराधों में 20% बढ़ोतरी, पूर्व चाइल्डलाइन डायरेक्टर ने माता-पिता को दी अहम सलाह

Date:

भोपाल
 राजधानी में महिला सुरक्षा के दावों के बीच एक बेहद चिंताजनक रिपोर्ट सामने आई है। सरकारी आंकड़ों और पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, शहर में महिलाओं और बच्चियों के खिलाफ होने वाले अपराधों में लगातार तेजी आ रही है। स्थिति कितनी संवेदनशील है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि साल 2024 की तुलना में वर्ष 2025 में दुष्कर्म के मामलों में सीधे 20 फीसदी का उछाल दर्ज किया गया है।

सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि भोपाल इस वक्त महिला सुरक्षा के मामले में एक तरह से 'बारूद के ढेर' पर बैठा है।

हर दिन एक रेप और एक छेड़छाड़ की वारदात
पुलिस से मिले आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, साल 2024 में भोपाल में दुष्कर्म के 305 मामले दर्ज किए गए थे, जो 2025 में बढ़कर 367 हो गए। इस साल यानी 2026 के शुरुआती पांच महीनों (जनवरी से मई) के आंकड़े भी डराने वाले हैं। इस अवधि में अब तक 167 मामले दर्ज हो चुके हैं, जबकि पिछले साल इसी अवधि में 164 मामले आए थे। इसका सीधा मतलब यह है कि राजधानी में औसत रूप से हर दिन एक दुष्कर्म और एक छेड़छाड़ का मामला पुलिस स्टेशन पहुंच रहा है। हालांकि, इस साल छेड़छाड़ के मामलों में 7% की मामूली गिरावट (155 केस) देखी गई है।

60% मामलों में 'सोशल मीडिया' का खूनी खेल
इस पूरे ट्रेंड पर चिंता जताते हुए सामाजिक कार्यकर्ताओं ने एक गहरे और नए खतरे की ओर इशारा किया है, वह है सोशल मीडिया। भोपाल में हो रहे महिला और बाल अपराधों का विश्लेषण करने पर सामने आया है कि अपराधियों का सबसे बड़ा हथियार अब फेसबुक, इंस्टाग्राम और अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म बन चुके हैं।

हमने जितने मामलों का विश्लेषण किया है, उनमें से लगभग 60% मामलों का कोई न कोई लिंक सोशल मीडिया से जुड़ा है। छोटी बच्चियों, किशोरियों और यहां तक कि नाबालिग लड़कों को भी ऑनलाइन शिकार बनाया जा रहा है। पॉक्सो के कई मामलों में बच्चों को ऑनलाइन बातचीत के जरिए प्रभावित किया गया। आरोपी फर्जी नाम, गलत उम्र और झूठी पहचान बताकर पहले बच्चों का भरोसा जीतते हैं, और फिर यह दोस्ती प्रताड़ना, ब्लैकमेलिंग और यौन शोषण में बदल जाती है।

अर्चना सहाय, सामाजिक कार्यकर्ता एवं पूर्व डायरेक्टर, चाइल्डलाइन, भोपाल

'माता-पिता की बात सुनना बंद कर रही हैं लड़कियां'
अर्चना सहाय ने पारिवारिक ताने-बाने पर पड़ रहे इसके असर को लेकर सचेत किया। उन्होंने बताया कि कई मामलों में लड़कियां ऑनलाइन बने दोस्तों के प्रभाव में इस कदर आ जाती हैं कि वे अपने माता-पिता की बातें सुनना तक बंद कर देती हैं। कुछ मामलों में तो बच्चों ने पढ़ाई छोड़ दी या घर से भागने जैसा आत्मघाती कदम उठा लिया। उन्होंने अपील की है कि बच्चों को स्मार्टफोन देने से पहले पैरेंट्स उन्हें सायबर सेफ्टी के बारे में जरूर शिक्षित करें।

अधिकांश मामलों में 'अपराधी' कोई अनजान नहीं
इधर, पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अधिकांश मामलों में आरोपी कोई अजनबी नहीं, बल्कि पीड़िता का कोई परिचित, रिश्तेदार या सोशल मीडिया का करीबी दोस्त ही निकलता है। हालांकि, मामलों की संख्या बढ़ने के पीछे पुलिस का तर्क है कि अब समाज में जागरूकता बढ़ी है, जिससे लोग चुप रहने के बजाय थानों में आकर एफआईआर दर्ज करवा रहे हैं। पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने बताया कि जांच अधिकारियों को संवेदनशील बनाने के लिए लगातार ट्रेनिंग दी जा रही है।

 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

spot_imgspot_img

Popular

More like this
Related

Smartphone Battery Tips: 100% चार्ज करने की आदत पड़ सकती है भारी? जानिए एक्सपर्ट्स की राय

 नई दिल्ली आज के समय में लगभग हर स्मार्टफोन में...

10 साल तक पति से छुपाया सच! आकांक्षा चमोला के खुलासे से सोशल मीडिया पर चर्चा तेज

मुंबई  टीवी स्टार गौरव खन्ना से अपने तलाक की खबर...

WhatsApp Username Feature बना चिंता का कारण, बढ़ते साइबर फ्रॉड के डर से सरकार करेगी समीक्षा

 नई दिल्ली WhatsApp ने हाल ही में अपना नया यूजरनेम...

Tech Layoffs: Microsoft में एक और जॉब कट की आशंका, 5,000 कर्मचारियों पर लटक रही तलवार

नई दिल्ली Microsoft एक बार फिर बड़े स्तर पर कर्मचारियों...