पटना
बिहार सरकार के नवगठित बिहार जल संसाधन विकास निगम लिमिटेड को जल परियोजनाओं के साथ राजस्व संग्रह का महत्वपूर्ण आधार बनाने की तैयारी है। निगम गाद प्रबंधन, सतही जल को पेयजल के रूप में उपयोग करने के लिए स्रोत एवं संरचनाओं का विकास और जलस्रोतों के पुनर्स्थापन जैसे काम करेगा। कैबिनेट की मंजूरी के बाद जल संसाधन विभाग ने निगम को सक्रिय करने की प्रक्रिया तेज कर दी है।
रिवर फ्रंट से भूमि-भवन तक संभालेगा निगम
निगम को रिवर इंटरलिंकिंग, रिवर फ्रंट डेवलपमेंट और विभागीय भूमि, भवन, निरीक्षण भवन समेत अन्य परिसंपत्तियों के प्रबंधन एवं रखरखाव की जिम्मेदारी भी दी जाएगी
इन गतिविधियों के जरिए निगम सेवाएं उपलब्ध कराने के साथ आय अर्जित करेगा। लक्ष्य है कि समय के साथ निगम अपने खर्च के लिए खुद राजस्व जुटाने में सक्षम हो।
DPR से इंजीनियरिंग कंसल्टेंसी तक सेवाएं
निगम के माध्यम से डीपीआर तैयार करने, इंजीनियरिंग कंसल्टेंसी, परियोजना प्रबंधन, निर्माण और तकनीकी सेवाएं उपलब्ध कराने का प्रविधान किया गया है।
इन सेवाओं से मिलने वाले राजस्व को निगम की आर्थिक आत्मनिर्भरता से जोड़ा गया है। कंपनी अधिनियम-2013 के तहत गठित होने वाला निगम पूरे बिहार में काम करेगा और आवश्यकता पड़ने पर राज्य के बाहर भी परियोजनाएं ले सकेगा।
सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण से आगे बढ़ेगा दायरा
निगम सिंचाई, बाढ़ नियंत्रण और जल निकासी जैसे पारंपरिक कार्यों के साथ गैर-पारंपरिक जल परियोजनाओं पर भी काम करेगा। जल परियोजनाओं के सूत्रीकरण, तकनीकी परामर्श और क्रियान्वयन में भी इसकी भूमिका रहेगी।
जलवायु परिवर्तन और अनियमित वर्षा के बीच जल प्रबंधन को आधुनिक बनाने के उद्देश्य से यह पहल की गई है।
50 करोड़ रुपये होगी अधिकृत पूंजी
बिहार जल संसाधन विकास निगम की अधिकृत पूंजी 50 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है। शुरुआती स्थापना और संचालन खर्च के लिए राज्य सरकार छह लाख रुपये की सदस्यता पूंजी देगी।
प्रारंभिक चरण में विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रतिनियुक्ति या पदस्थापन के जरिए निगम में लगाया जाएगा, जिससे सरकार पर अतिरिक्त वित्तीय भार सीमित रखने की योजना है।
GIS और रिमोट सेंसिंग से होगा जल प्रबंधन
निगम में निजी क्षेत्र की तकनीक और विशेषज्ञता का उपयोग किया जाएगा। GIS, रिमोट सेंसिंग और वाटर डाटा एनालिटिक्स जैसी तकनीकों को जल प्रबंधन से जोड़ा जाएगा
राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के सहयोग से नए प्रयोगों को बढ़ावा देने की योजना है। निगम का संचालन निदेशक मंडल करेगा, जबकि दैनिक कामकाज की जिम्मेदारी प्रबंध निदेशक पर होगी।

